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रामशरण को दोषी नहीं मानते अमरेश के परिजन
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मुजफ्फरनगर/भोपा। दो अप्रैल 2018 को नई मंडी कोतवाली पर हुए हमले में गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश की मौत प्रकरण में भले ही कोर्ट ने हत्यारे रामशरण को सात साल कैद की सजा सुना दी हो, लेकिन अमरेश के परिजन आज भी उसे आरोपी नहीं मानते। एक फैक्टरी में नौकरी करने वाले अमरेश के पिता सुरेश ने बताया कि उनके बेटे की मौत तत्कालीन नई मंडी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर हरशरण शर्मा की गोली से हुई थी। इस संबंध में उन्होंने कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा कायम कराने के लिए वाद भी दायर किया हुआ है, जो फिलहाल विचाराधीन है। रामशरण को पुलिस ने अपनी जान बचाने के लिए अमरेश की हत्या में फर्जी रूप से फंसाया था, इसलिए बेटे की हत्या में सजा होने पर आखिर वे कैसे खुश हो सकते हैं ?
संत रविदास मंदिर में लगाना चाहते थे बेटे की मूर्ति
भोपा। दो अप्रैल 2018 को हुए बवाल में मारे गए अमरेश के परिजन गांव गादला स्थित पंचायती संत रविदास मंदिर में बेटे की मूर्ति लगाने का प्रयास किया था। अमरेश की मूर्ति भी तैयार करा ली गई थी, जिसको प्रशासन ने उन्हें मंदिर में मूर्ति लगाने से रोक दिया था।
302 में मुकदमा, 304 में मिली सजा
मुजफ्फरनगर। गांव मेघाखेड़ी निवासी रामशरण को नई मंडी कोतवाली पुलिस ने अमरेश हत्याकांड का खुलासा कर धारा-302 के तहत जेल भेजा था। तत्कालीन एसएसआई मंडी मदन सिंह बिष्ट ने इसी धारा में उसके पास से पिस्टल बरामद दिखाकर चार्जशीट भी दायर की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे 302 आईपीसी के स्थान पर 304 आईपीसी का मामला माना। इसी आधार पर न्यायाधीश ओमबीर सिंह ने आरोपी रामशरण को सात साल कैद व 55 हजार रुपये जुुर्माने की सजा सुनाई है।
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संत रविदास मंदिर में लगाना चाहते थे बेटे की मूर्ति
भोपा। दो अप्रैल 2018 को हुए बवाल में मारे गए अमरेश के परिजन गांव गादला स्थित पंचायती संत रविदास मंदिर में बेटे की मूर्ति लगाने का प्रयास किया था। अमरेश की मूर्ति भी तैयार करा ली गई थी, जिसको प्रशासन ने उन्हें मंदिर में मूर्ति लगाने से रोक दिया था।
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302 में मुकदमा, 304 में मिली सजा
मुजफ्फरनगर। गांव मेघाखेड़ी निवासी रामशरण को नई मंडी कोतवाली पुलिस ने अमरेश हत्याकांड का खुलासा कर धारा-302 के तहत जेल भेजा था। तत्कालीन एसएसआई मंडी मदन सिंह बिष्ट ने इसी धारा में उसके पास से पिस्टल बरामद दिखाकर चार्जशीट भी दायर की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे 302 आईपीसी के स्थान पर 304 आईपीसी का मामला माना। इसी आधार पर न्यायाधीश ओमबीर सिंह ने आरोपी रामशरण को सात साल कैद व 55 हजार रुपये जुुर्माने की सजा सुनाई है।
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