देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा तब्लीगी जमात के खिलाफ देशभर में दर्ज मुकदमों को तुरंत लिया जाए। साथ ही जेलों में बंद जमातियों को उचित मुआवजा दिया जाए। सोमवार को मौलाना महमूद मदनी ने जारी बयान में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद डिवीजन बेंच के माध्यम से तब्लीगी जमात से संबंधित किए फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन सरकारों के लिए सबक है, जो देशहित को उपेक्षित करके सांप्रदायिक कट्टरपंथियों के संगीत पर नृत्य करती हैं।
मदनी ने कहा कि जस्टिस टीवी नालावाडे और जस्टिस एमजी सेवलेकर की बेंच का फैसला एक ऐसा स्पष्ट और पारदर्शी दर्पण है, इसमें केंद्रीय और राज्य सरकारें अपना विकृत चेहरा देख सकती हैं। न्यायालय ने अपने फैसले में जिन तथ्यों पर प्रकाश डाला है, इनसे सांप्रदायिकता, धर्मांधता और तानाशाही को निराशा और पराजय हुई है। मौलाना मदनी ने कहा कि फैसले में अदालत ने इन मामलों से न सिर्फ सरकार को जागरूक करने का काम किया है, बल्कि देश के सम्मान, उसके संविधान, उसकी प्रतिष्ठा और उसकी महान परंपराओं के प्रति इसके अनुत्तरदायी व्यवहार पर उसे चेताया भी है। आरोप लगाते हुए कहा कि खासतौर पर उत्तर प्रदेश की सरकार को इससे सीख हासिल करनी चाहिए। जिसका व्यवहार अत्यधिक गलत और बदले की भावना पर आधारित रहा है। मौलाना महमूद मदनी ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि तब्लीगी जमात के खिलाफ देश में जहां भी मुकदमे दर्ज हैं, वह बिना देरी किए शीघ्र वापस लिए जाएं तथा जेलों में बंद लोगों को तुरंत रिहा करते हुए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।