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वैदिक संस्कृति से बनेगा अखंड भारत
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शहर के गांधी कालोनी ऋग्वेद पारायण यज्ञ में आहुति देते श्रद्धालुगण
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। वेदों की ज्योति जलती रहे, ओंम का झंडा ऊंचा रहे...के जयघोष के साथ तीन दिवसीय ऋग्वेद पारायण यज्ञ का शुभारंभ आचार्य गुरुदत्त आर्य ने किया। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति से अखंड भारत का निर्माण होगा। वेदों के ज्ञान-विज्ञान की अनदेखी से देश में कुरीतियां बढ़ी है।
आर्य समाज गांधी कालोनी के सहयोग से पचेंडा रोड पर आयोजित ऋग्वेद पारायण यज्ञ में वेद मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गई। शुभारंभ अवसर पर वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सनातन धर्म वैदिक ज्ञान-विज्ञान पर आधारित है। ऋग्वेद विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। ऋषियों के तप, त्याग और शिक्षा से ही जीवन कल्याण संभव है। युवा पी?ी धर्म की रक्षा के लिए संस्कृति और संस्कारों को अपनाए।
जयपुर से पधारी आचार्या श्रुति शास्त्री ने कहा कि वेद मंत्रों में सृष्टि का ज्ञान निहित है। महर्षि दयानंद ने बेटियों के उत्थान हेतु उन्हें शिक्षा और यज्ञ से जोड़ने का महान कार्य किया था। परिवार में यज्ञ परंपरा बनाये, ताकि बच्चे संस्कारित बने। वेदपाठ मीनाक्षी आर्य एवं कविता आर्य ने किया। संगीत संध्या में भजनोपदेशक दिनेश पथिक ने प्रेरक भजन सुनाए।
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संयोजक गजेंद्र एवं नीरज राणा ने अतिथियों का आभार जताया। स्वामी योगानन्द, आचार्य संजीव शास्त्री, देवेंद्र सिंह राणा, अजीत सिंह, प्रणपाल सिंह, रविंद्र पाल सिंह, धीरज पाल सिंह, कृष्ण राणा आदि मौजूद रहे। बताते चले कि सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के राष्ट्रीय प्रधान स्वामी आर्यवेश शनिवार को यज्ञ में शामिल होंगे।
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आर्य समाज गांधी कालोनी के सहयोग से पचेंडा रोड पर आयोजित ऋग्वेद पारायण यज्ञ में वेद मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गई। शुभारंभ अवसर पर वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सनातन धर्म वैदिक ज्ञान-विज्ञान पर आधारित है। ऋग्वेद विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। ऋषियों के तप, त्याग और शिक्षा से ही जीवन कल्याण संभव है। युवा पी?ी धर्म की रक्षा के लिए संस्कृति और संस्कारों को अपनाए।
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जयपुर से पधारी आचार्या श्रुति शास्त्री ने कहा कि वेद मंत्रों में सृष्टि का ज्ञान निहित है। महर्षि दयानंद ने बेटियों के उत्थान हेतु उन्हें शिक्षा और यज्ञ से जोड़ने का महान कार्य किया था। परिवार में यज्ञ परंपरा बनाये, ताकि बच्चे संस्कारित बने। वेदपाठ मीनाक्षी आर्य एवं कविता आर्य ने किया। संगीत संध्या में भजनोपदेशक दिनेश पथिक ने प्रेरक भजन सुनाए।
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संयोजक गजेंद्र एवं नीरज राणा ने अतिथियों का आभार जताया। स्वामी योगानन्द, आचार्य संजीव शास्त्री, देवेंद्र सिंह राणा, अजीत सिंह, प्रणपाल सिंह, रविंद्र पाल सिंह, धीरज पाल सिंह, कृष्ण राणा आदि मौजूद रहे। बताते चले कि सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के राष्ट्रीय प्रधान स्वामी आर्यवेश शनिवार को यज्ञ में शामिल होंगे।