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वायु प्रदूषण : पेपर मिलों में जल रहा वेस्ट पॉलिथीन कचरा

Fri, 22 Oct 2021 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:24 AM IST
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Air pollution: waste polythene waste burning in paper mills
मुजफ्परनगर के जौली रोड पर फैला पॉलिथीन का कचरा। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर/सिखेड़ा। शहर के जौली मार्ग स्थित एंट्री प्वाइंट पर सड़क के दोनों ओर विदेशों से आने वाले वेस्ट पॉलिथीन कचरे के ढेर लगे हैं। इस कचरे को क्षेत्र की पेपर मिलों में ईंधन के रूप में जलाए जाने की शिकायतें लगातार स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही प्रशासन भी लगातार शिकायतों के बावजूद पॉलीथिन कचरा जनपद में लाने वालों और इसे ईंधन के रूप में जलाने वाली पेपर मिलों के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। इसके चलते यह वेस्ट पॉलिथीन कचरा एक ओर जहां खेतों की उपजाऊ क्षमता को प्रभावित कर रहा है, वहीं इसे जलाए जाने से निकलने वाला जहरीला धुआं भी लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है।
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रात के अंधेरे में होता है अवैध कारोबार
जनपद में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के साथ ही कई अन्य राज्यों से भी बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रॉलों में भरकर रात के अंधेरे में यह कचरा लाया जा रहा है। इस पूरे धंधे में पुलिस प्रशासन के कर्मचारियों की भी सेटिंग है। सूत्रों की मानें तो वेस्ट पॉलीथिन कचरे से भरे एक ट्रॉली की कीमत बमुश्किल पांच से सात हजार रुपये तक होती है। यहां लाने के बाद इस कचरे को छांटकर प्लास्टिक और पॉलिथीन अलग की जाती है। इसके बाद प्लास्टिक को करीब पांच से सात सौ रुपये क्विंटल और वेस्ट पॉलीथिन कचरे को 70-80 रुपये क्विंटल पेपर मिलों में सप्लाई कर दिया जाता है। इस तरह एक ट्रॉली पर ही ठेकेदार को करीब 30-40 हजार रुपये तक का मोटा मुनाफा होता है। शहर क्षेत्र में इस कचरे को गांव धंधेड़ा में कोल्हू के पीछे, गांव निराना में अलनूर मीट फैक्टरी के ठीक सामने, जौली रोड पर नाले के पास और सिकरेड़ा रोड पर धर्मकांटे के सामने खेतों में डालकर स्टॉक किया जाता है।
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कम लागत में होता है अधिक उत्पादन
पेपर मिलों में वेस्ट पॉलिथीन कचरे को बॉयलर में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पॉलिथीन होने के चलते बॉयलर तेजी से गर्म होता है और देर तक गर्म होता है, जिससे मिल की पेपर उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। मानकों के अनुसार, बॉयलर में लकड़ी, गिट्टी या कोयला डाला जाना चाहिए, लेकिन यह काफी महंगा होने के साथ ही देर से बॉयलर गर्म करता है। वहीं, लकड़ी, गिट्टी व कोयला जलाने के लिए एसटीपी प्लांट की भी जरूरत होती है, लेकिन वेस्ट पॉलीथिन जलाने के लिए एसटीपी प्लांट भी नहीं चलाना पड़ता।
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दो पेपर मिलों के खिलाफ हो चुकी कार्रवाई
जनपद में करीब एक पखवाड़े पूर्व अवैध रूप से वेस्ट पॉलिथीन कचरा जलाने पर दो पेपर मिलों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। जनपद में अवैध कचरे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे गांव पीनना निवासी समाजसेवी सुमित मलिक की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन दो मिलों पर भारी-भरकम जुर्माना भी ठोका था। हालांकि इसके बावजूद मोटे मुनाफे के लालच में पेपर मिल संचालक इस कचरे को जलाने का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। सुमित का आरोप है कि बुधवार रात कचरे से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़वाए जाने के चलते ठेकेदार द्वारा उन्हें घर आकर धमकी भी दी जा चुकी है।

कार्रवाई की जा रही है
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि वेस्ट पॉलीथिन कचरे के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। बुधवार रात भी चेकिंग करते हुए वेस्ट पॉलीथिन कचरे से लदे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज किए गए हैं। इस संबंध में गांव धंधेड़ा निवासी ठेकेदार लुकमान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए चरथावल थाने में तहरीर भी दी गई है। शहर के भोपा रोड पर भी कई ट्रक मखियाली चौकी पुलिस को सुपुर्द कर कार्रवाई के लिए कहा गया है।
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