{"_id":"638e2eed4fffbc5480630e02","slug":"ahmedabad-jama-masjid-s-statement-unnecessary-religious-leader-devband-news-mrt6165102113","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoband: अहमदाबाद जामा मस्जिद के शाही इमाम के बयान पर धर्मगुरुओं का जवाब, कही ये बड़ी बात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoband: अहमदाबाद जामा मस्जिद के शाही इमाम के बयान पर धर्मगुरुओं का जवाब, कही ये बड़ी बात
Tue, 06 Dec 2022 06:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Dec 2022 06:57 PM IST
सार
Deoband News : अहमदाबाद जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद के बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं का जवाब आया है। उन्होंने कही ये बड़ी बात।
विज्ञापन
राव मुशर्रफ
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अहमदाबाद जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद द्वारा मुस्लिम महिलाओं के राजनीति में हिस्सा लेने वाले बयान को आरएसएस के घटक दल मुस्लिम राष्ट्रीय मंच सहित हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसे गैर जरूरी बताया है।
विज्ञापन
अहमदाबाद के शाही इमाम के बयान पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक राव मुशर्रफ अली ने कहा कि इस्लाम औरतों को बराबरी के हक देता है, जबकि हज भी मर्द और औरत एक साथ करते है। इतना ही नहीं अपने को मुस्लिम देश कहने वाले बांग्लादेश व पाकिस्तान में भी महिलाएं प्रधानमंत्री रहीं हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में औरतों का चुनाव न लड़ने की बात कहना समझ से परे है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय ध्यानगुरु स्वामी दीपांकर महाराज ने कहा कि देश की आजादी के 75 वर्ष बाद भी अगर महिलाओं को लेकर इस तरह की बात होती है तो यह आजाद हिंदुस्तान और पूरे समाज के लिए प्रश्न चिह्न है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Meerut: आखिर खुल गया दिल्ली के मानव की हत्या का राज, मेरठ में मिली सिर कटी लाश, कातिल ने उगला पूरा राज
जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने अहमदाबाद के शाही इमाम शब्बीर अहमद के बयान को गैर जरूरी करार देते हुए कहा कि मुस्लिमों को अगर कोई मसला जानना है तो वह किसी के बयान से नहीं बल्कि मुफ्तियों से लिखित में मालूम करते है। जो शरीयत की रोशनी में हर मसले का हल निकालते हैं। इस तरह के बयान बिना वजह की बहस को जन्म देते हैं।
यह भी पढ़ें: Saharanpur: ससुर ने बहू के लिए रिश्ता तलाशा, शादी का पूरा जिम्मा उठाया, फिर बेटी बनाकर किया विदा