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शासन के आदेश पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा प्रशासन

Thu, 22 Mar 2018 11:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 22 Mar 2018 11:44 PM IST
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Administration in preparing reports on order of governance
मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान गांव सिंभालका में घटनास्थल का निरीक्षण करते पुलिस अधिकारी (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा के दौरान 67 बेगुनाहों की मौत हुई थी। नफरत और उन्माद भरे माहौल में फैली दहशत से 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। वर्तमान में कोर्ट में 131 मुकदमे विचाराधीन है, जिनमें 13 मुकदमे हत्या और 11 हत्या के प्रयास तथा छह मुकदमे रेप के हैं। प्रशासन उनकी मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हैै। जिन मुकदमों को वापस लेने के लिए आख्या मांगी गई हैं, उनमें दोनों ही समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे शामिल हैं। यह वापस हुए तो दंगे से जुड़े सभी मुकदमे में खत्म हो जाएंगे।
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मुजफ्फरनगर और शामली में 511 मुकदमे दोनों समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज किए थे, जिनमें हत्या और दुष्कर्म के मामले भी मामले भी शामिल थे। दो साल से ज्यादा वक्त तक चली एसआईटी की जांच में 170 मुकदमे खारिज किए थे, जबकि 169 में एफआर लगाई थी। बाकी 172 मुकदमे कोर्ट में चार्टशीट दाखिल की गई। कोर्ट की कार्रवाई के दौरान 41 मुकदमों का निस्तारण हो चुका है। इन मुकदमों में अभी तक किसी को भी कोई सजा नहीं हो सकी। सभी मुकदमों में गवाहों के पक्षद्रोही होने से आरोपी बरी हो चुके है। 131 मुकदमे अभी कोर्ट में चल रहे हैं, इन सभी पर शासन ने आख्या मांगी है।
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जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 को शाहनवाज की मौत के बाद भीड़ ने मलिकपुरा के ममेरे भाईयों गौरव और सचिन की भरे चौराहे पर बेहरमी से हत्या कर दी थी। उस घटना के बाद से जिले में संप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई थी। शहर के खालापार में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों ने वारदात के विरोध में तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा और एसएसपी एससी दूबे को ज्ञापन सौंपा था तो हिंदू संगठनों और भाजपाइयों ने नंगला मंदौड में 31 अगस्त और फिर सात सितंबर को बड़ी पंचायत की थी। पंचायत खत्म होते ही जिले में दंगा भड़क गया था। तत्कालीन सपा सरकार ने एसआईटी का गठन कर दंगा प्रभावित थाना क्षेत्रों में मामलों की जांच कराई थी।सीएम के निर्देश पर शासन के विशेष सचिव राजेश सिंह ने मुजफ्फरनगर और शामली के डीएम को पत्र भेज कर दंगे के 131 मुकदमों में मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है।
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मुकदमे वापसी अच्छी पहल: संगीत सोम मेरठ। सरधना विधायक और मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी ठा. संगीत सोम ने कहा कि मुजफ्फरनगर की घटना को लेकर सपा सरकार ने फर्जी मुकदमे दर्ज कर न केवल जनता का उत्पीड़न किया था, बल्कि माहौल भी खराब किया था। हमने पहले ही कह दिया था कि भाजपा सरकार बनने के बाद ये सभी फर्जी मुकदमे वापस होंगे। सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया है। इससे माहौल भी सौहार्दपूर्ण बनेगा और जनता में सरकार की निष्पक्ष और अच्छी छवि बनेगी।
दंगे के दौरान प्रभावित हुए थे कई गांव शामली। 2013 में मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे के दौरान गांव लांक, लिसाढ़, बहावड़ी और सिंभालका में भी घटनाएं हुई थीं। दंगे के दौरान लांक, लिसाढ़ और बहावड़ी जनपद मुजफ्फरनगर के थाना फुगाना क्षेत्र में आते थे, जबकि बाद में यह गांव शामली जिले में ही जुड़ गए। वहीं, सिंभालका गांव में हुई घटनाओं के संबंध में शामली कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई थीं। सिंभालका गांव में हमला, आगजनी और मारपीट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थीं। शासन ने जिन 131 मुकदमों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है, उनमें सिंभालका गांव में हुई घटनाओं के तीन मुकदमे भी शामिल हैं। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि कई दिन पूर्व शासन से इस संबंध में पत्र आया था। उस पर जिला शासकीय अधिवक्ता से 11 बिंदुओं पर रिपोर्ट ली जा रही है। कुल 13 बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजनी है। शासकीय अधिवक्ता की रिपोर्ट आने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सभी मुकदमे वापस होना चाहिए : चौधरी श्याम सिंह गठवाला खाप के थांबेदार चौधरी श्याम सिंह बहावड़ी का कहना है कि दंगे के दौरान जितने भी मुकदमे दर्ज हुए, वह सभी वापस होने चाहिए। प्रदेश सरकार यदि मुकदमे वापस कराने का प्रयास कर रही है, तो वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि दंगे के दौरान 1500 से ज्यादा लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी, उनके परिवारों ने इस दौरान बहुत पीड़ा झेली हैं। उन्होंने बताया कि पिछले माह प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण सिंह के साथ शामली के भाकियू नेता सतपाल पहलवान सहित अन्य लोगों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और दंगे के दौरान दर्ज मुकदमे वापस कराने की मांग रखी गई थी। न्यायालय से आग्रह कर सकता है शासन- चंद्रवीर सिंभालका गांव में हुई घटनाओं के मुकदमों में बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह निर्वाल का कहना है कि शामली के गांव सिंभालका में हुई घटना के संबंध में तीन मुकदमे दर्ज हुए थे। उनमें से एक मामले में धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ करने और आग लगाने के मामले में आरोपी बरी हो चुके हैं, जबकि इमामुद्दीन की तरफ से दर्ज मुकदमे में बुधवार को ही न्यायालय में तारीख थी। उन्होंने बताया कि मुकदमों में चार्टशीट न्यायालय में दाखिल होने के बाद न्यायालय का निर्णय ही सर्वोपरि है। शासन को भी न्यायालय से आग्रह करना होगा। अब न्यायालय पर निर्भर है कि शासन का आग्रह स्वीकार किया जाए या अस्वीकार। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए : नाहिद हसन कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन का कहना है कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे के दौरान बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए। बच्चों और बूढ़ों की हत्या हुई। ऐसे में संगीन मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुकदमे वापस कराने का फैसला प्रदेश सरकार का एकपक्षीय है, जो आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर लोकलुभावन है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी की होती है, किसी एक पक्ष के लिए कार्य नहीं करना चाहिए। विधायक ने कहा कि दंगे के दौरान दर्ज हुए मुकदमों का फैसला न्यायालय से ही होना चाहिए। अब्दुल हमीद का नहीं लगा सुराग गांव सिंभालका निवासी शौकत ने बताया कि 2013 के दंगे के दौरान उसके पिता अब्दुल हमीद लापता हो गए थे। इस संबंध में शामली कोतवाली में पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उसमें अपहरण कर हत्या की आशंका जताई गई थी। शौकत ने बताया कि अब तक यह पता नहीं चला है कि उसके पिता अब्दुल हमीद जिंदा है या मर गए। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। नौ अप्रैल की तारीख लगी हुई है।
दंगे का दर्द हिंदू और मुस्लिमों ने बराबर सहा है। आपसी सौहार्द और भाईचारे से ही समाज और देश बच सकता है। दंगे के मुकदमों में जिन निर्दोषों को फंसा दिया गया था, उन्हें मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले खाप चौधरियों ने ऐसे मुकदमों को खत्म करने की मांग की थी, जिन्हें जानबूझ कर दंगे के दौरान मुकदमे में लपेटा गया। - चौधरी नरेश टिकैत, भाकियू अध्यक्ष एवं बालियान खाप चौधरी
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