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20 माह से गृह मंत्रालय के आदेश दबाए रहा प्रशासन
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20 माह से गृह मंत्रालय के आदेश दबाए रहा प्रशासन
रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। एक हजार करोड़ की शत्रु संपत्ति को लेकर जिला प्रशासन 20 माह तक जांच दबाए बैठा रहा। शत्रु संपत्ति घोषित करने को गृह मंत्रालय ने पहली बार 16 फरवरी 2018 में पत्र जारी किया था, जिसमें छह बिंदुओं पर जिला प्रशासन से आख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। शहर के राधेश पप्पू द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद सरकार जागी और जिला प्रशासन को 15 अक्तूबर 2019 को दोबारा पत्र जारी किया। पत्र जारी करने के साथ ही उक्त संपत्ति के विक्रय और निर्माण पर रोक लगा दी है।
गृह मंत्रालय के सहायक शत्रु संपत्ति अभिरक्षक पीसी फियालो ने 16 फरवरी 2018 को एक पत्र जारी करते हुए छह बिंदुओं पर आख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। डीएम को यह भी लिखा गया था कि जांच रिपोर्ट शीघ्र भेजने का प्रबंध करें, ताकि विचाराधीन एक हजार करोड़ की शत्रु संपत्ति मामले का निस्तारण किया जा सके। जिन छह बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई उनमें यह पूछा गया था कि राजस्व अभिलेखों में खेवट नंबर 4/1 रकबा 189-10-15 की राजस्व अभिलेखों में 1947 से 1954 और निर्णायक अवधि दस सितंबर 1965 से 25 सितंबर 1977 तक फसली वर्ष में किसके नाम रही। राजस्व और निकाय के अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि दें। दूसरा बिंदु यह था कि 1965 से 1977 के बीच संपत्ति के स्वामी की नागरिकता क्या थी। तीसरे बिंदु में संपत्ति के स्वामी की नागरिकता की जांच एलआईयू से कराने के लिए कहा गया था। चौथे बिंदु में वर्तमान के कब्जाधारियों का नाम, कब्जा कब से और किस आधार पर कब्जा इसकी रिपोर्ट देना था। पांचवें बिंदु में उक्त भूमि का जो क्रय विक्रय हुआ, रजिस्ट्री के आधार पर उसका पूरा रिकार्ड देना था। अंतिम बिंदु में पाक नागरिक की इस भूमि और संपत्तियों का मैप और फोटोग्राफ मांगे गए थे। जिला प्रशासन 20 माह तक केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश को दबाए बैठा रहा। मामले में तेजी उस समय आई जब शहर के राधेश ने हाईकोर्ट में केंद्र सरकार को पार्टी बनाते हुए याचिका दायर की। इसके बाद 15 अक्तूबर 2019 को उक्त संपत्ति के विक्रय और इस पर निर्माण को रोक लगाने के आदेश हुए। जिला प्रशासन ने इस आदेश का पालन छह नवंबर से शुरू किया। हालांकि एडीएम वित्त आलोक कुमार ने दावा किया है कि सरकार के आदेश का पूरी तरह पालन होगा। इस संबंध में बृहस्पतिवार को बैठक भी बुलाई गई है।
आखिर कब तैयार होगी रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बीस माह बीत चुके हैं और सरकार ने दोबारा पत्र जारी किया है। जिन विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है उन्हें 16 अक्तूबर को यह कहते हुए पत्र जारी किया गया कि एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करके दे दें। तीन सप्ताह बीत चुके हैं। किसी भी विभाग की रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है।
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। एक हजार करोड़ की शत्रु संपत्ति को लेकर जिला प्रशासन 20 माह तक जांच दबाए बैठा रहा। शत्रु संपत्ति घोषित करने को गृह मंत्रालय ने पहली बार 16 फरवरी 2018 में पत्र जारी किया था, जिसमें छह बिंदुओं पर जिला प्रशासन से आख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। शहर के राधेश पप्पू द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद सरकार जागी और जिला प्रशासन को 15 अक्तूबर 2019 को दोबारा पत्र जारी किया। पत्र जारी करने के साथ ही उक्त संपत्ति के विक्रय और निर्माण पर रोक लगा दी है।
गृह मंत्रालय के सहायक शत्रु संपत्ति अभिरक्षक पीसी फियालो ने 16 फरवरी 2018 को एक पत्र जारी करते हुए छह बिंदुओं पर आख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। डीएम को यह भी लिखा गया था कि जांच रिपोर्ट शीघ्र भेजने का प्रबंध करें, ताकि विचाराधीन एक हजार करोड़ की शत्रु संपत्ति मामले का निस्तारण किया जा सके। जिन छह बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई उनमें यह पूछा गया था कि राजस्व अभिलेखों में खेवट नंबर 4/1 रकबा 189-10-15 की राजस्व अभिलेखों में 1947 से 1954 और निर्णायक अवधि दस सितंबर 1965 से 25 सितंबर 1977 तक फसली वर्ष में किसके नाम रही। राजस्व और निकाय के अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि दें। दूसरा बिंदु यह था कि 1965 से 1977 के बीच संपत्ति के स्वामी की नागरिकता क्या थी। तीसरे बिंदु में संपत्ति के स्वामी की नागरिकता की जांच एलआईयू से कराने के लिए कहा गया था। चौथे बिंदु में वर्तमान के कब्जाधारियों का नाम, कब्जा कब से और किस आधार पर कब्जा इसकी रिपोर्ट देना था। पांचवें बिंदु में उक्त भूमि का जो क्रय विक्रय हुआ, रजिस्ट्री के आधार पर उसका पूरा रिकार्ड देना था। अंतिम बिंदु में पाक नागरिक की इस भूमि और संपत्तियों का मैप और फोटोग्राफ मांगे गए थे। जिला प्रशासन 20 माह तक केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश को दबाए बैठा रहा। मामले में तेजी उस समय आई जब शहर के राधेश ने हाईकोर्ट में केंद्र सरकार को पार्टी बनाते हुए याचिका दायर की। इसके बाद 15 अक्तूबर 2019 को उक्त संपत्ति के विक्रय और इस पर निर्माण को रोक लगाने के आदेश हुए। जिला प्रशासन ने इस आदेश का पालन छह नवंबर से शुरू किया। हालांकि एडीएम वित्त आलोक कुमार ने दावा किया है कि सरकार के आदेश का पूरी तरह पालन होगा। इस संबंध में बृहस्पतिवार को बैठक भी बुलाई गई है।
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आखिर कब तैयार होगी रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बीस माह बीत चुके हैं और सरकार ने दोबारा पत्र जारी किया है। जिन विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है उन्हें 16 अक्तूबर को यह कहते हुए पत्र जारी किया गया कि एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करके दे दें। तीन सप्ताह बीत चुके हैं। किसी भी विभाग की रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है।
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