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गाजियाबाद के एडीजे ने किया दारुल उलूम का दौरा, मोहतमिम से मिले
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दारूल उलूम के मेहमानखाने में नायाब मोहतमिम से मुलाकात करते एडीजे दिनेश कुमार गुप्ता
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। गाजियाबाद के एडीजे दिनेश कुमार गुप्ता ने रविवार को विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की और संस्थान में दी जानी वाली शिक्षा और छात्रों के रहन सहन के बारे में जानकारी प्राप्त की।
रविवार को शाम के समय दारुल उलूम में पहुंचे एडीजे दिनेश कुमार ने संस्था के मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी व नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी समेत अन्य उलमा से मुलाकात की। इस दौरान उलमा ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। संस्था के मोहतमिम ने एडीजे को दारुल उलूम और उलमा-ए-देवबंद का इतिहास और जंग-ए-आजादी में देवबंदी उलमा की कुर्बानियों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि देश की स्वतंत्रता, निर्माण और विकास में दारुल उलूम की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां देश के कोने कोने से छात्र तालीम हासिल करने के लिए आते हैं, उन्हें दीनी तालीम के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। इसके बाद एडीजे ने संस्था में स्थित लाइब्रेरी में जाकर ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा। इसके बाद वह एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में भी गए। उन्होंने कहा कि उनकी बहुत पहले से दारुल उलूम आने की ख्वाहिश थी, जो आज पूरी हुई है। दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा था यह उससे कहीं अधिक है। इस मौके पर रिजवान कासमी, मौलाना शफीक अहमद, मौलाना शौकत आदि मौजूद रहे।
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रविवार को शाम के समय दारुल उलूम में पहुंचे एडीजे दिनेश कुमार ने संस्था के मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी व नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी समेत अन्य उलमा से मुलाकात की। इस दौरान उलमा ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। संस्था के मोहतमिम ने एडीजे को दारुल उलूम और उलमा-ए-देवबंद का इतिहास और जंग-ए-आजादी में देवबंदी उलमा की कुर्बानियों के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि देश की स्वतंत्रता, निर्माण और विकास में दारुल उलूम की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां देश के कोने कोने से छात्र तालीम हासिल करने के लिए आते हैं, उन्हें दीनी तालीम के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। इसके बाद एडीजे ने संस्था में स्थित लाइब्रेरी में जाकर ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा। इसके बाद वह एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में भी गए। उन्होंने कहा कि उनकी बहुत पहले से दारुल उलूम आने की ख्वाहिश थी, जो आज पूरी हुई है। दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा था यह उससे कहीं अधिक है। इस मौके पर रिजवान कासमी, मौलाना शफीक अहमद, मौलाना शौकत आदि मौजूद रहे।
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