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नैनो यूरिया की एक बोतल, एक बैग के बराबर असरदार
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नगर के गन्ना संस्थान में नैनो यूरिया का प्रशिक्षण देते अधिकारी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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नैनो यूरिया की एक बोतल, एक बैग के बराबर असरदार
मुजफ्फरनगर। गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र के सभागार में इफ्को और गन्ना विभाग की ओर से नैनो यूरिया के प्रयोग पर प्रशिक्षण दिया गया। इफ्को के उप महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि 500 मिली लीटर की नैनो यूरिया की एक बोतल एक बैग यूरिया के बराबर है। नैनो यूरिया का ट्रांसपोर्ट खर्च बहुत कम है।
उन्होंने बताया कि यूरिया के उर्वरक पर सरकार द्वारा दी जानी वाली सब्सिडी को भी इस नैनो यूरिया के उपयोग से कम किया जा सकता है, जो सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण में सहायक होगा। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने बताया कि गन्ने की फसल में किसानों द्वारा बुवाई के समय प्रयोग किया जा रहे यूरिया की मात्रा प्राय: फसल को नहीं मिल पाती, क्योंकि गन्ने के जमाव और जड़ों के विकसित होने में लगभग एक माह का समय लगता है। किसान यदि गन्ने के टिलर (फुटाव) और ग्रांड ग्रोथ अवस्था, जो लगभग बुवाई के 120 दिन के आसपास आती है, पर नैनो यूरिया का स्प्रे (छिड़काव) कर दें, तो यह परंपरागत रूप से प्रयोग की जाने वाली यूरिया से बेहतर परिणाम देने वाला होगा। नैनो यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन का पौधे द्वारा लगभग 80 से 90 प्रतिशत उपयोग किया जा सकता है, जबकि यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन का अधिकतम 30 प्रतिशत ही पौधे द्वारा उपयोग हो पाता है और शेष या तो पानी के साथ लीच कर जाता है अथवा वायुमंडल में उड़ कर चला जाता है।
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मुजफ्फरनगर। गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र के सभागार में इफ्को और गन्ना विभाग की ओर से नैनो यूरिया के प्रयोग पर प्रशिक्षण दिया गया। इफ्को के उप महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि 500 मिली लीटर की नैनो यूरिया की एक बोतल एक बैग यूरिया के बराबर है। नैनो यूरिया का ट्रांसपोर्ट खर्च बहुत कम है।
उन्होंने बताया कि यूरिया के उर्वरक पर सरकार द्वारा दी जानी वाली सब्सिडी को भी इस नैनो यूरिया के उपयोग से कम किया जा सकता है, जो सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण में सहायक होगा। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने बताया कि गन्ने की फसल में किसानों द्वारा बुवाई के समय प्रयोग किया जा रहे यूरिया की मात्रा प्राय: फसल को नहीं मिल पाती, क्योंकि गन्ने के जमाव और जड़ों के विकसित होने में लगभग एक माह का समय लगता है। किसान यदि गन्ने के टिलर (फुटाव) और ग्रांड ग्रोथ अवस्था, जो लगभग बुवाई के 120 दिन के आसपास आती है, पर नैनो यूरिया का स्प्रे (छिड़काव) कर दें, तो यह परंपरागत रूप से प्रयोग की जाने वाली यूरिया से बेहतर परिणाम देने वाला होगा। नैनो यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन का पौधे द्वारा लगभग 80 से 90 प्रतिशत उपयोग किया जा सकता है, जबकि यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन का अधिकतम 30 प्रतिशत ही पौधे द्वारा उपयोग हो पाता है और शेष या तो पानी के साथ लीच कर जाता है अथवा वायुमंडल में उड़ कर चला जाता है।
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