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श्रीराम कॉलेज में जल संशोधन संयंत्र निर्माण कार्य की शुरूआत
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श्रीराम कॉलेज में जल संशोधन संयंत्र निर्माण कार्य की शुरूआत
मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज में जापान की कंपनी ताईसेई सॉयल सिस्टम की ओर से जल संशोधन संयंत्र के निर्माण के कार्य की शुरूआत की गई। जापान से आए तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा निर्माण स्थल का सर्वे कर कार्य की शुरूआत की गई।
प्रतिनिधिमंडल के केनीची तामुरा, केनीची युचिडा एवं हिमांशु मिश्रा ने निर्माण स्थल का अंतिम सर्वेक्षण कर लगभग 1.25 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री के साथ कॉलेज परिसर में प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का प्रारंभ किया। संस्था चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस संयंत्र की शोधन क्षमता 8000 लीटर प्रतिदिन होगी। इस तकनीक के माध्यम से सेप्टिक टैंक से बहने वाले प्राथमिक उपचार वाले पानी को सिफॉन प्रवाह और कोशिका रूप में मिट्टी में टफगार्ड के माध्यम से फैलाया जाता है।यह तकनीक मिट्टी की सतह से जल के वाष्पीकरण को बढ़ावा देता है, साथ ही पौधों की जड़ों से पानी को खींचकर उनकी पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इस अवसर पर डॉ आदित्य गौतम, अर्जुन सिंह, डॉ अभिषेक बागला, डॉ पूनम शर्मा, देवेन्द्र चैधरी आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज में जापान की कंपनी ताईसेई सॉयल सिस्टम की ओर से जल संशोधन संयंत्र के निर्माण के कार्य की शुरूआत की गई। जापान से आए तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा निर्माण स्थल का सर्वे कर कार्य की शुरूआत की गई।
प्रतिनिधिमंडल के केनीची तामुरा, केनीची युचिडा एवं हिमांशु मिश्रा ने निर्माण स्थल का अंतिम सर्वेक्षण कर लगभग 1.25 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री के साथ कॉलेज परिसर में प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का प्रारंभ किया। संस्था चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस संयंत्र की शोधन क्षमता 8000 लीटर प्रतिदिन होगी। इस तकनीक के माध्यम से सेप्टिक टैंक से बहने वाले प्राथमिक उपचार वाले पानी को सिफॉन प्रवाह और कोशिका रूप में मिट्टी में टफगार्ड के माध्यम से फैलाया जाता है।यह तकनीक मिट्टी की सतह से जल के वाष्पीकरण को बढ़ावा देता है, साथ ही पौधों की जड़ों से पानी को खींचकर उनकी पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इस अवसर पर डॉ आदित्य गौतम, अर्जुन सिंह, डॉ अभिषेक बागला, डॉ पूनम शर्मा, देवेन्द्र चैधरी आदि मौजूद रहे।
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