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बैंकों के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन
Updated Thu, 11 Jan 2018 12:22 AM IST
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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के व्यापारियों ने बैंकों द्वारा ग्राहकों के साथ सेवाओं के लिए बढ़ाए शुल्कों का विरोध प्रदर्शन किया।
बुधवार को संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णगोपाल मित्तल के नेतृत्व में व्यापारियों ने कलक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय पर पहुंचे। वहां बैंकों के खिलाफ प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। व्यापारियों ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक ने खाताधारकों से 1771 करोड़ रुपये वसूले, जो बैंक के तिहाई शुद्ध लाभ से भी अधिक हैं। बैंक का उद्देश्य पैसा कमाने का नहीं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिए लोगों को आर्थिक बचत के सुअवसर उपलब्ध कराना है। आज व्यापारी और आम जनता आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं, ऐसे में बैंकों द्वारा सेवा दरों में वृद्धि करना ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी है। प्राइवेट बैंकों में ये लूट बड़ी होती जा रही है। बैंकों में हो रही कटौतियां सरकार की आर्थिक नीतियों के विपरीत हैं।
बैंक अपने कर्जों को वसूल कर पाने में असमर्थ हैं, आम ग्राहकों का शोषण करने पर उतारू हैं। बैंकों से मिलने वाली नि:शुल्क सेवा के लिए भी अब अलग से चार्ज देना होगा, ये आम आदमी पर बोझ है। व्यापारियों ने राष्ट्रपति से इस संदर्भ में हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है। मौके पर कृष्ण गोपाल मित्तल, राकेश त्यागी, ओमप्रकाश गुप्ता, सेवाराम गर्ग, प्रवीण जैन, रानी अब्बास, बलविंदर सिंह, भीम बालियान, जमीर अंसारी, भूरा कुरैशी, सुनील वर्मा, गौरव, अनिल सिंघल, फुरकान, सुशील, सुनील तायल, शिवकुमार, पवन अग्रवाल, ज्ञानी गुरबचन सिंह, इकरार फारूखी, जितेंद्र सिंघल, जयहिंद प्रकाश, राम अवतार, जयपाल सिंह, तरुण मित्तल, सुरेंद्र, ओमप्रकाश गांधी आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णगोपाल मित्तल के नेतृत्व में व्यापारियों ने कलक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय पर पहुंचे। वहां बैंकों के खिलाफ प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। व्यापारियों ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक ने खाताधारकों से 1771 करोड़ रुपये वसूले, जो बैंक के तिहाई शुद्ध लाभ से भी अधिक हैं। बैंक का उद्देश्य पैसा कमाने का नहीं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिए लोगों को आर्थिक बचत के सुअवसर उपलब्ध कराना है। आज व्यापारी और आम जनता आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं, ऐसे में बैंकों द्वारा सेवा दरों में वृद्धि करना ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी है। प्राइवेट बैंकों में ये लूट बड़ी होती जा रही है। बैंकों में हो रही कटौतियां सरकार की आर्थिक नीतियों के विपरीत हैं।
बैंक अपने कर्जों को वसूल कर पाने में असमर्थ हैं, आम ग्राहकों का शोषण करने पर उतारू हैं। बैंकों से मिलने वाली नि:शुल्क सेवा के लिए भी अब अलग से चार्ज देना होगा, ये आम आदमी पर बोझ है। व्यापारियों ने राष्ट्रपति से इस संदर्भ में हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है। मौके पर कृष्ण गोपाल मित्तल, राकेश त्यागी, ओमप्रकाश गुप्ता, सेवाराम गर्ग, प्रवीण जैन, रानी अब्बास, बलविंदर सिंह, भीम बालियान, जमीर अंसारी, भूरा कुरैशी, सुनील वर्मा, गौरव, अनिल सिंघल, फुरकान, सुशील, सुनील तायल, शिवकुमार, पवन अग्रवाल, ज्ञानी गुरबचन सिंह, इकरार फारूखी, जितेंद्र सिंघल, जयहिंद प्रकाश, राम अवतार, जयपाल सिंह, तरुण मित्तल, सुरेंद्र, ओमप्रकाश गांधी आदि मौजूद रहे।
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