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गालिबपुर में मोहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:39 AM IST
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गालिबपुर में मुहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला
खतौली (मुजफ्फरनगर)। गांव गालिबपुर में मुहर्रम की पांच तारीख को मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें अलम और जुलजुनाह बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने इमाम हुसैन की याद में मातम किया।
गाबिलपुर में सैयद खेरात अली के आवास पर आयोजित मजलिस में मौलाना नैय्यर रजा नकवी मुरादाबाद ने करबला में शहीद हुए इमाम हुसैन के भांजे ओनो मोहम्मद की शहादत बयान की। उन्होंने कहा कि हुसैन सफीना ए निजात है, जिन्होंने इस्लाम को जिंदा रखते हुए इंसानियत बचाई तथा अपने नाना हजरत मोहम्मद मुस्तफा का नाम जिंदा रखा। करबला की जंग में यजीदी फौज द्वारा इमाम हुसैन के कुनबे पर किए जुल्म के बारे में बयान किया, तो सोगवारों की आंखें नम हो गई। इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस गांव के मुख्यमार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा बड़वाला पहुंचा, जहां से इमामबड़ा सगीर हुसैन पहुंच कर जुलूस समाप्त हुआ। जुलूस में सबसे आगे अलम तथा जुलजुनाह था। मरसिया ख्वानी अमीर अब्बास उर्फ छुग्गन मियां, हुसैन बाकर, अली मियां, मोहम्मद जव्वाद, खुर्शीद अख्तर ने की। मातमी जुलूस में अंजुमन फरोगे अजा मेहलका के सोगवार शामिल थे। नोहा ख्वानी जाकिर अब्बास रिजवी, मंजर, शजर, असफी, यावर ने की। शमशाद अली, चांद मियां, हसन जाहिद, जुगनू, नसीम हैदर, डा, प्रवेज, शाह आलम, हसन बाकर आदि ने मातमपुर्सी की।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। गांव गालिबपुर में मुहर्रम की पांच तारीख को मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें अलम और जुलजुनाह बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने इमाम हुसैन की याद में मातम किया।
गाबिलपुर में सैयद खेरात अली के आवास पर आयोजित मजलिस में मौलाना नैय्यर रजा नकवी मुरादाबाद ने करबला में शहीद हुए इमाम हुसैन के भांजे ओनो मोहम्मद की शहादत बयान की। उन्होंने कहा कि हुसैन सफीना ए निजात है, जिन्होंने इस्लाम को जिंदा रखते हुए इंसानियत बचाई तथा अपने नाना हजरत मोहम्मद मुस्तफा का नाम जिंदा रखा। करबला की जंग में यजीदी फौज द्वारा इमाम हुसैन के कुनबे पर किए जुल्म के बारे में बयान किया, तो सोगवारों की आंखें नम हो गई। इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस गांव के मुख्यमार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा बड़वाला पहुंचा, जहां से इमामबड़ा सगीर हुसैन पहुंच कर जुलूस समाप्त हुआ। जुलूस में सबसे आगे अलम तथा जुलजुनाह था। मरसिया ख्वानी अमीर अब्बास उर्फ छुग्गन मियां, हुसैन बाकर, अली मियां, मोहम्मद जव्वाद, खुर्शीद अख्तर ने की। मातमी जुलूस में अंजुमन फरोगे अजा मेहलका के सोगवार शामिल थे। नोहा ख्वानी जाकिर अब्बास रिजवी, मंजर, शजर, असफी, यावर ने की। शमशाद अली, चांद मियां, हसन जाहिद, जुगनू, नसीम हैदर, डा, प्रवेज, शाह आलम, हसन बाकर आदि ने मातमपुर्सी की।
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