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जीवन में शांति के लिए इच्छाओं को कम करना होगा-मुनिश्री
Updated Tue, 31 Jul 2018 12:14 AM IST
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जीवन में शांति के लिए इच्छाओं को कम करना होगा
खतौली। पीसनोपाड़ा जैन मंदिर के प्रवचन हाल में जैन संत क्षमा भूषण महाराज का चतुर्मास स्थापना महोत्सव श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से मनाया। इस महोत्सव के आयोजन हेतु पीत व केसरिया वस्त्रों में जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा करके धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया गया। अष्ट द्रव्य से पूजन करते हुए अर्घ्य समर्पित किए गए।
समारोह के शुभारंभ के लिए धर्म ध्वज पताका भूषण आढ़ती ने फहराई। अध्यक्षता योगेश सराफ ने की। जिनेंद्र भगवान के चित्र का अनावरण शशांक महलका परिवार ने किया। इसके पश्चात मुनिश्री ने मंगल आगमन किया। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित किए। गुरु पूजा करते हुए चतुर्मास विधि के साथ पंचभक्ति की गई। इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा में मुनिश्री ने कहा कि जीवन में शांति के लिए मनुष्य को अपनी इच्छाओं को कम करना होगा। मनुष्य अच्छे कर्मों के आधार पर ही अपने जीवन में सफल हो सकता है। संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने कहा कि चतुर्मास आत्म साधना व धर्म आराधना का काल है। वर्षा ऋतु में अन्य ऋतुओं की अपेक्षा जीवोत्पति बहुत अधिक होती है। इस कारण संत एक स्थान पर प्रवास करके धर्म साधना व धर्म जागरण करते हैं। श्रावकजन भी धर्मार्जन करते हैं। वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। भक्ति संगीत का आयोजन किया गया। सोमवार की सुबह धर्मध्वज प्रभात फेरी निकाली गई। इस अवसर पर रामकुमार, राकेश अंबर, मुकेश एडवोकेट, सुनील टीकरी, सिद्धार्थ, रवि, रविंद्र दादरी, मनोज महलका, जयभगवान, अरुण औषधि, शीलचंद, अशोक, धनेंद्र सराफ, मृदुला, अंजू, डा. आशा, अर्चना, अंजली, सरला, अलका, पायल, रजनी, अनुराग नीरज प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।
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खतौली। पीसनोपाड़ा जैन मंदिर के प्रवचन हाल में जैन संत क्षमा भूषण महाराज का चतुर्मास स्थापना महोत्सव श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से मनाया। इस महोत्सव के आयोजन हेतु पीत व केसरिया वस्त्रों में जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा करके धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया गया। अष्ट द्रव्य से पूजन करते हुए अर्घ्य समर्पित किए गए।
समारोह के शुभारंभ के लिए धर्म ध्वज पताका भूषण आढ़ती ने फहराई। अध्यक्षता योगेश सराफ ने की। जिनेंद्र भगवान के चित्र का अनावरण शशांक महलका परिवार ने किया। इसके पश्चात मुनिश्री ने मंगल आगमन किया। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित किए। गुरु पूजा करते हुए चतुर्मास विधि के साथ पंचभक्ति की गई। इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा में मुनिश्री ने कहा कि जीवन में शांति के लिए मनुष्य को अपनी इच्छाओं को कम करना होगा। मनुष्य अच्छे कर्मों के आधार पर ही अपने जीवन में सफल हो सकता है। संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने कहा कि चतुर्मास आत्म साधना व धर्म आराधना का काल है। वर्षा ऋतु में अन्य ऋतुओं की अपेक्षा जीवोत्पति बहुत अधिक होती है। इस कारण संत एक स्थान पर प्रवास करके धर्म साधना व धर्म जागरण करते हैं। श्रावकजन भी धर्मार्जन करते हैं। वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। भक्ति संगीत का आयोजन किया गया। सोमवार की सुबह धर्मध्वज प्रभात फेरी निकाली गई। इस अवसर पर रामकुमार, राकेश अंबर, मुकेश एडवोकेट, सुनील टीकरी, सिद्धार्थ, रवि, रविंद्र दादरी, मनोज महलका, जयभगवान, अरुण औषधि, शीलचंद, अशोक, धनेंद्र सराफ, मृदुला, अंजू, डा. आशा, अर्चना, अंजली, सरला, अलका, पायल, रजनी, अनुराग नीरज प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।
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