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सत्संग से ही देवत्य की प्राप्ति: ज्ञानानंद
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:32 AM IST
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मुजफ्फरनगर। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सत्संग कोई आयोजन, मनोरंजन या प्रदर्शन नहीं होता। सत्संग से व्यक्ति मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर होता है।
महावीर चौक स्थित बैंक्वेट हाल में दिव्य गीता सत्संग में स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता परमेश्वर श्रीकृष्ण की वाणी से निकली जीवन जीने की कला है। सत्संग में चार के अंक का महत्व है। हमारे वेद, तीर्थधाम, दिशाएं चार ही हैं। गीता में उवाच भी चार ही हैं। हमारी सनातन संस्कृति में पुरुषार्थ भी चार ही हैं। समूचे विश्व में जितना धर्म, अध्यात्म, भाषा और संस्कृतियों का वांगमय है, उसमें जो व्यापकता भगवान कृष्ण द्वारा बोली गई गीता जी को प्राप्त है, वह अन्य किसी ग्रंथ को नहीं है। संसार के किसी भी गीत-संगीत की चमक समय के साथ फीकी पड़ जाती है, किंतु देश-विदेश के विद्वान एकमत हैं कि गीता की चमक कभी भी किसी भी देशकाल परिस्थिति और वातावरण में फीकी नहीं हो सकती। गीता हमें बताती है कि हमारा जीवन क्या है। गीता न केवल हमें कर्म से जोड़ती है, कर्म को पूजा बताती है, यह मानव जीवन की शुष्कता को गायब करने वाली एक महान अलौकिक संजीवनी है। इससे पूर्व महाराज श्री का अभिनंदन किया गया। अतुल गर्ग, महेंद्र गोयल, सुरेंद्र अग्रवाल, श्यामलाल बंसल, होतीलाल शर्मा, अमरकांत, सुरेंद्र गुप्ता, अतुल जैन, शिवचरण जैन, मुकुल दुआ, प्रेम प्रकाश अरोरा, ब्रजगोपाल छारिया, सतीश गोयल, अर्जुन अग्रवाल, ऊदल सिंह, ब्रजमोहन दास आदि मौजूद रहे।
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महावीर चौक स्थित बैंक्वेट हाल में दिव्य गीता सत्संग में स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता परमेश्वर श्रीकृष्ण की वाणी से निकली जीवन जीने की कला है। सत्संग में चार के अंक का महत्व है। हमारे वेद, तीर्थधाम, दिशाएं चार ही हैं। गीता में उवाच भी चार ही हैं। हमारी सनातन संस्कृति में पुरुषार्थ भी चार ही हैं। समूचे विश्व में जितना धर्म, अध्यात्म, भाषा और संस्कृतियों का वांगमय है, उसमें जो व्यापकता भगवान कृष्ण द्वारा बोली गई गीता जी को प्राप्त है, वह अन्य किसी ग्रंथ को नहीं है। संसार के किसी भी गीत-संगीत की चमक समय के साथ फीकी पड़ जाती है, किंतु देश-विदेश के विद्वान एकमत हैं कि गीता की चमक कभी भी किसी भी देशकाल परिस्थिति और वातावरण में फीकी नहीं हो सकती। गीता हमें बताती है कि हमारा जीवन क्या है। गीता न केवल हमें कर्म से जोड़ती है, कर्म को पूजा बताती है, यह मानव जीवन की शुष्कता को गायब करने वाली एक महान अलौकिक संजीवनी है। इससे पूर्व महाराज श्री का अभिनंदन किया गया। अतुल गर्ग, महेंद्र गोयल, सुरेंद्र अग्रवाल, श्यामलाल बंसल, होतीलाल शर्मा, अमरकांत, सुरेंद्र गुप्ता, अतुल जैन, शिवचरण जैन, मुकुल दुआ, प्रेम प्रकाश अरोरा, ब्रजगोपाल छारिया, सतीश गोयल, अर्जुन अग्रवाल, ऊदल सिंह, ब्रजमोहन दास आदि मौजूद रहे।
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