{"_id":"5c169ed7bdec2257093c9007","slug":"61544986327-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुजफ्फरनगर-शामली के जांबाजों से थर्राई थी पाक सेना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुजफ्फरनगर-शामली के जांबाजों से थर्राई थी पाक सेना
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर-शामली के जांबाजों से थर्राई थी पाक सेना
मुजफ्फरनगर। 16 दिसंबर मतलब भारत की पाकिस्तान पर विजय का दिन। यह ऐतिहासिक जीत यूं ही नहीं मिली थी। भारतीय सैनिकों ने अपना लहू बहाकर इसे हासिल किया। मुजफ्फरनगर और इससे अलग होकर बने शामली जनपद के जांबाजों ने लड़ाई में अपनी वीरता और शौर्य से दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। 12 सैनिकों को अपनी शहादत देनी पड़ी थी। उनकी याद में नुमाइश मैदान में आज भी शहीद स्मारक स्थित है।
देश के इतिहास में 16 दिसंबर 1971 का दिन विशेष गौरव के रूप में अंकित है। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को न केवल लंबे युद्ध में पराजित किया, बल्कि पाकिस्तानी सेना के जरनल नियाजी को उस समय के पूर्वी पाकिस्तान के शहर ढाका में करीब 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने घुटने टेकने के लिए भी मजबूर कर दिया था। इसी दिन विश्व पटल पर बांग्लादेश के रूप में एक नए देश का भी उदय हुआ। देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित इस युद्ध में मुजफ्फरनगर और बाद में इससे अलग होकर बने जनपद शामली के जांबाजों ने भी खूब बहादुरी दिखाई थी। इसमें जिले के एक कैप्टन और लेफ्टिनेंट समेत 12 जवान पाकिस्तान को नाकों चने चबवाते हुए शहीद हो गए थे। शहीदों की याद में वर्ष 1972 में शहर के नुमाइश मैदान में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया था, जिसका अनावरण तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने स्वयं मुजफ्फरनगर आकर किया था। इस स्मारक पर पाकिस्तान की जंग में शहीद हुए जनपद मुजफ्फरनगर और शामली के सभी 12 शहीदों के नाम अंकित हैं, जिन्हें दोनों जनपदों के नागरिक विजय दिवस पर अश्रूपुर्ण नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
कैप्टन मदनपाल को मिला था वीर चक्र
मुजफ्फरनगर। पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की याद में शहीद स्मारक पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रविवार को भी जिले के अधिकारियों ने स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। जनपद के शहीदों में शामिल 12 जवानों में शामिल शामली जनपद के कस्बा कांधला के गांव जसाला निवासी कैप्टन मदनपाल को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वहीं, शहर की गांधी कॉलोनी निवासी लेफ्टिनेंट राजकुमार, गांव कूकड़ा के लांस नायक धर्मपाल सिंह, बरला निवासी लांस नायक राधेश्याम, बामनहेड़ी निवासी लांस नायक खचेड़ सिंह, डांगरोल के सिपाही हरपाल सिंह, गांव नाला निवासी सिपाही चरण सिंह, शामली के बुटराड़ी के हवलदार जगदीश प्रसाद, कुरमाली गांव के नायक जयपाल सिंह, कांधला के रिछपाल सिंह, बरवाला के सुरेंद्र पाल सिंह व गांव गोयला निवासी जयपाल सिंह ने इस युद्ध में लड़ते हुए शहादत दी थी। आज भी बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मुजफ्फरनगर में हैं जो भारत-पाकिस्तान के उस युद्ध में अपनी वीरता से दुश्मन को थर्रा चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। 16 दिसंबर मतलब भारत की पाकिस्तान पर विजय का दिन। यह ऐतिहासिक जीत यूं ही नहीं मिली थी। भारतीय सैनिकों ने अपना लहू बहाकर इसे हासिल किया। मुजफ्फरनगर और इससे अलग होकर बने शामली जनपद के जांबाजों ने लड़ाई में अपनी वीरता और शौर्य से दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। 12 सैनिकों को अपनी शहादत देनी पड़ी थी। उनकी याद में नुमाइश मैदान में आज भी शहीद स्मारक स्थित है।
देश के इतिहास में 16 दिसंबर 1971 का दिन विशेष गौरव के रूप में अंकित है। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को न केवल लंबे युद्ध में पराजित किया, बल्कि पाकिस्तानी सेना के जरनल नियाजी को उस समय के पूर्वी पाकिस्तान के शहर ढाका में करीब 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने घुटने टेकने के लिए भी मजबूर कर दिया था। इसी दिन विश्व पटल पर बांग्लादेश के रूप में एक नए देश का भी उदय हुआ। देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित इस युद्ध में मुजफ्फरनगर और बाद में इससे अलग होकर बने जनपद शामली के जांबाजों ने भी खूब बहादुरी दिखाई थी। इसमें जिले के एक कैप्टन और लेफ्टिनेंट समेत 12 जवान पाकिस्तान को नाकों चने चबवाते हुए शहीद हो गए थे। शहीदों की याद में वर्ष 1972 में शहर के नुमाइश मैदान में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया था, जिसका अनावरण तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने स्वयं मुजफ्फरनगर आकर किया था। इस स्मारक पर पाकिस्तान की जंग में शहीद हुए जनपद मुजफ्फरनगर और शामली के सभी 12 शहीदों के नाम अंकित हैं, जिन्हें दोनों जनपदों के नागरिक विजय दिवस पर अश्रूपुर्ण नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
विज्ञापन
कैप्टन मदनपाल को मिला था वीर चक्र
मुजफ्फरनगर। पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की याद में शहीद स्मारक पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रविवार को भी जिले के अधिकारियों ने स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। जनपद के शहीदों में शामिल 12 जवानों में शामिल शामली जनपद के कस्बा कांधला के गांव जसाला निवासी कैप्टन मदनपाल को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वहीं, शहर की गांधी कॉलोनी निवासी लेफ्टिनेंट राजकुमार, गांव कूकड़ा के लांस नायक धर्मपाल सिंह, बरला निवासी लांस नायक राधेश्याम, बामनहेड़ी निवासी लांस नायक खचेड़ सिंह, डांगरोल के सिपाही हरपाल सिंह, गांव नाला निवासी सिपाही चरण सिंह, शामली के बुटराड़ी के हवलदार जगदीश प्रसाद, कुरमाली गांव के नायक जयपाल सिंह, कांधला के रिछपाल सिंह, बरवाला के सुरेंद्र पाल सिंह व गांव गोयला निवासी जयपाल सिंह ने इस युद्ध में लड़ते हुए शहादत दी थी। आज भी बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मुजफ्फरनगर में हैं जो भारत-पाकिस्तान के उस युद्ध में अपनी वीरता से दुश्मन को थर्रा चुके हैं।
विज्ञापन