{"_id":"5a96f2a44f1c1b3f658b56a8","slug":"61519841956-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रावण वध व राम राज्य स्थापना का सार समझाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रावण वध व राम राज्य स्थापना का सार समझाया
Updated Wed, 28 Feb 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खतौली। गीता भवन में आयोजित श्रीराम कथा में साध्वी दीपिका भारती ने कथा के अंतिम रावण वध और रामराज्य की स्थापना का सार बताया।
साध्वी ने कहा कि तुलसीदास रामराज्य स्थापना प्रसंग द्वारा संपूर्ण रामचरित मानस का सार देते हुए समझाते हैं कि अयोध्या मनुष्य देह का प्रतीक है और जब अयोध्या रूपी देह के राज्य में सीता रूपी भक्ति का राम रूपी परमात्मा से समागम होता है तब मनुष्य के भीतर रामराज्य की स्थापना हो जाती है। अगर रामराज्य की स्थापना प्रत्येक मनुष्य के भीतर हो जाए तो विश्व में स्वत: ही शांति आ जाएगी। परंतु रामराज्य की स्थापना बिना हनुमान रूपी संत के असंभव है। यदि मनुष्य रामचरित मानस को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहता तो आवश्यकता है कि वे एक ऐसे संत की खोज करें जो उसे मात्र राम की चर्च तक सीमित न रखे। अपितु उसकी दिव्य दृष्टि खोलकर उसे राम के दर्शन भी करा दें। विभीषण और रावण एक ही कुल के थे पर अगर विभीषण राम को प्राप्त कर पाया तो उसका कारण संत की संगति थी। विभीषण के जीवन में जब हनुमान रूपी संत का आगमन हुआ तब विभीषण में विवेक और भक्ति का जन्म हुआ। बुधवार को श्रीराम कथा का समापन हो गया। बृहस्पतिवार को गीता भवन में होली का उत्सव मनाया जाएगा और दुल्हेंडी के दिन नगर में भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा निकाली जाएगी।
विज्ञापन
साध्वी ने कहा कि तुलसीदास रामराज्य स्थापना प्रसंग द्वारा संपूर्ण रामचरित मानस का सार देते हुए समझाते हैं कि अयोध्या मनुष्य देह का प्रतीक है और जब अयोध्या रूपी देह के राज्य में सीता रूपी भक्ति का राम रूपी परमात्मा से समागम होता है तब मनुष्य के भीतर रामराज्य की स्थापना हो जाती है। अगर रामराज्य की स्थापना प्रत्येक मनुष्य के भीतर हो जाए तो विश्व में स्वत: ही शांति आ जाएगी। परंतु रामराज्य की स्थापना बिना हनुमान रूपी संत के असंभव है। यदि मनुष्य रामचरित मानस को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहता तो आवश्यकता है कि वे एक ऐसे संत की खोज करें जो उसे मात्र राम की चर्च तक सीमित न रखे। अपितु उसकी दिव्य दृष्टि खोलकर उसे राम के दर्शन भी करा दें। विभीषण और रावण एक ही कुल के थे पर अगर विभीषण राम को प्राप्त कर पाया तो उसका कारण संत की संगति थी। विभीषण के जीवन में जब हनुमान रूपी संत का आगमन हुआ तब विभीषण में विवेक और भक्ति का जन्म हुआ। बुधवार को श्रीराम कथा का समापन हो गया। बृहस्पतिवार को गीता भवन में होली का उत्सव मनाया जाएगा और दुल्हेंडी के दिन नगर में भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा निकाली जाएगी।