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मौसम का मिजाज बदला
Updated Sat, 07 Apr 2018 12:12 AM IST
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बुढ़ाना। अचानक मौसम का मिजाज बदलने के कारण कस्बा व देहात के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं। किसानों की गेहूं और सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है। ऐसे हालात में मौसम का बिगड़ना किसानों के लिए नुुकसान का कारण बन सकता है।
शुक्रवार को शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल, आंधी के लक्षण देखकर किसानों के माथे पर पसीना छूटा है। इस समय किसानों की गेहूं व सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है। कस्बा व देहात में एक सप्ताह में दोनों फसलों की कटाई आरंभ हो जाएगी। कटाई करते ही किसान गेहूं व सरसों की थ्रेसिंग में जुट जाता है। गांव बिटावदा के प्रधान प्रदीप उर्फ मंगलू, उमरपुर के किसान अतहर हसन, फुगाना निवासी जितेंद्र मलिक व मुकेश मलिक सहित दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि गेहूं की कटाई के अवसर पर अक्सर खराब मौसम होने के कारण वर्षा व आंधी तूफान के अधिक संभावना होती है। पिछले वर्षों में तो ओले पड़ने के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी है। फसल के पकने के समय मौसम का बदलना खतरे से खाली नहीं होता।
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शुक्रवार को शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल, आंधी के लक्षण देखकर किसानों के माथे पर पसीना छूटा है। इस समय किसानों की गेहूं व सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है। कस्बा व देहात में एक सप्ताह में दोनों फसलों की कटाई आरंभ हो जाएगी। कटाई करते ही किसान गेहूं व सरसों की थ्रेसिंग में जुट जाता है। गांव बिटावदा के प्रधान प्रदीप उर्फ मंगलू, उमरपुर के किसान अतहर हसन, फुगाना निवासी जितेंद्र मलिक व मुकेश मलिक सहित दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि गेहूं की कटाई के अवसर पर अक्सर खराब मौसम होने के कारण वर्षा व आंधी तूफान के अधिक संभावना होती है। पिछले वर्षों में तो ओले पड़ने के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी है। फसल के पकने के समय मौसम का बदलना खतरे से खाली नहीं होता।
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