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नगर पंचायत का महाबली गरजा
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:18 AM IST
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करोड़ों रुपये की भूमि कब्जा मुक्त कराई
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
नगर पंचायत की खसरा नंबर 2167 की आंशिक भाग की भूमि पर कई लोगों ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ था। न्यायालय के आदेश पर अधिशासी अधिकारी ने नगर पंचायत के कर्मचारियों व पुलिस को साथ लेकर अवैध निर्माण गिराया। विरोध करने वाले कब्जाधारकों व उनके परिवार की महिलाओं को पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया।
कस्बे के पैंठ में मुख्यमार्ग पर स्थित नगर पंचायत की खसरा नंबर 2167 की भूमि पर करीब तीन दर्जन लोगों ने अपने खोखे रखकर अवैध कब्जा किया हुआ था। कुछ लोगों ने अपने खोखे रखकर किराये पर भी दे रखे थे। नगर पंचायत इस भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए वर्ष 1982 से न्यायालय की शरण में था। 29 जनवरी 2007 को न्यायालय द्वारा नगर पंचायत के पक्ष में निर्णय आया तो कब्जाधारी इस निर्णय के खिलाफ दूसरी अदालत में चले गए। जमना देवी बनाम नगर पंचायत का यह वाद वर्ष 2007 से अपर जिला न्यायाधीश की अदालत में था। सबूतों आधार पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने 25 अक्तूबर 2017 को अवैध कब्जे वाली भूमि को नगर पंचायत की बताते हुए कब्जा मुक्त कराने का आदेश दिया गया। अधिशासी अधिकारी ओम गिरि तथा नगर पंचायत के मुख्य लिपिक दिनेश कुमार ने पत्रावली दिखाते हुए बताया कि नगर पंचायत की करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जा था। न्यायालय का निर्णय आने के बाद से वे कई बार अवैध कब्जाधारकों को अपने खोखे हटाने के बारे में कह चुके थे। 15 दिन पहले भी मौके पर जाकर सभी अवैध कब्जाधारी दुकानदारों को सूचना दी गई। सूचना के बाद भी अवैध कब्जा नहीं छोड़ा गया। 24 घंटे पहले अधिशासी अधिकारी ने सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किए तथा मौके पर जाकर नोटिस भी चस्पा किया। उसके बाद भी अवैध कब्जा नहीं छोड़ा गया। मंगलवार को अधिशासी अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। नगर पंचायत की जेसीबी मशीन द्वारा अवैध निर्माण को तोड़ा गया। दुकानदारों और महिलाओं ने कब्जा हटाने का जमकर विरोध किया। स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को मौके से खदेड़ा। इसी दौरान किसी दुकानदार ने अपने खोखे में रखे टोकरे व बोरी आदि में आग लगा दी। नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा पानी डालकर आग पर काबू पाया। देखते ही देखते अवैध निर्माण गिरा दिया गया। नगर पंचायत ने अपनी भूमि पर अपना बोर्ड लगवाकर कब्जा कर लिया। विरोध करने वालों में प्रमोद, वेदप्रकाश, चन्द्रवीर, धीरज, मोनू आदि तथा उनके परिवारों की महिलाएं प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
नगर पंचायत की खसरा नंबर 2167 की आंशिक भाग की भूमि पर कई लोगों ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ था। न्यायालय के आदेश पर अधिशासी अधिकारी ने नगर पंचायत के कर्मचारियों व पुलिस को साथ लेकर अवैध निर्माण गिराया। विरोध करने वाले कब्जाधारकों व उनके परिवार की महिलाओं को पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया।
कस्बे के पैंठ में मुख्यमार्ग पर स्थित नगर पंचायत की खसरा नंबर 2167 की भूमि पर करीब तीन दर्जन लोगों ने अपने खोखे रखकर अवैध कब्जा किया हुआ था। कुछ लोगों ने अपने खोखे रखकर किराये पर भी दे रखे थे। नगर पंचायत इस भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए वर्ष 1982 से न्यायालय की शरण में था। 29 जनवरी 2007 को न्यायालय द्वारा नगर पंचायत के पक्ष में निर्णय आया तो कब्जाधारी इस निर्णय के खिलाफ दूसरी अदालत में चले गए। जमना देवी बनाम नगर पंचायत का यह वाद वर्ष 2007 से अपर जिला न्यायाधीश की अदालत में था। सबूतों आधार पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने 25 अक्तूबर 2017 को अवैध कब्जे वाली भूमि को नगर पंचायत की बताते हुए कब्जा मुक्त कराने का आदेश दिया गया। अधिशासी अधिकारी ओम गिरि तथा नगर पंचायत के मुख्य लिपिक दिनेश कुमार ने पत्रावली दिखाते हुए बताया कि नगर पंचायत की करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जा था। न्यायालय का निर्णय आने के बाद से वे कई बार अवैध कब्जाधारकों को अपने खोखे हटाने के बारे में कह चुके थे। 15 दिन पहले भी मौके पर जाकर सभी अवैध कब्जाधारी दुकानदारों को सूचना दी गई। सूचना के बाद भी अवैध कब्जा नहीं छोड़ा गया। 24 घंटे पहले अधिशासी अधिकारी ने सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किए तथा मौके पर जाकर नोटिस भी चस्पा किया। उसके बाद भी अवैध कब्जा नहीं छोड़ा गया। मंगलवार को अधिशासी अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। नगर पंचायत की जेसीबी मशीन द्वारा अवैध निर्माण को तोड़ा गया। दुकानदारों और महिलाओं ने कब्जा हटाने का जमकर विरोध किया। स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को मौके से खदेड़ा। इसी दौरान किसी दुकानदार ने अपने खोखे में रखे टोकरे व बोरी आदि में आग लगा दी। नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा पानी डालकर आग पर काबू पाया। देखते ही देखते अवैध निर्माण गिरा दिया गया। नगर पंचायत ने अपनी भूमि पर अपना बोर्ड लगवाकर कब्जा कर लिया। विरोध करने वालों में प्रमोद, वेदप्रकाश, चन्द्रवीर, धीरज, मोनू आदि तथा उनके परिवारों की महिलाएं प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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