{"_id":"5a8c6ba74f1c1ba2268bb6a6","slug":"550-million-rupees-of-pnb-in-the-district-submerged","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में पीएनबी के 550 करोड़ रुपये डूबे, अधिकतम पैसा उद्योगों के नाम पर लिया गया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में पीएनबी के 550 करोड़ रुपये डूबे, अधिकतम पैसा उद्योगों के नाम पर लिया गया
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:10 AM IST
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जिले में पंजाब नेशनल बैंक के 550 करोड़ रुपये डूब गए हैं। बैंक ने यह पैसा औद्योगिक इकाईयों को जारी किया था, जिन इकाईयां को पैसा जारी किया गया, इनमें से अधिकतम अपने आपको दिवालिया घोषित कर बंद हो चुकी हैं। खाते एनपीए में तो चले गए हैं, इन्हें डिफाल्टर घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। मुंबई में पीएनबी का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद यहां भी बैंक अधिकारियों में खलबली मच गई हैं।
मुजफ्फरनगर जिले में पीएनबी लीड बैंक है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पीएनबी औद्योगिक इकाईयों को पैसा जारी करता रहा है। जनपद में लोहा और स्टील फैक्ट्रियों में बड़ी संख्या में ताले लटक गए हैं। इसमें जिले में पीएनबी का इंडस्ट्रियल शाखाओं में 550 करोड़ रुपये डूब गए हैं। पीएनबी के अधिकारियों ने पैसा नहीं आता देख इस पैसे को एनपीए में डाल दिया है।
एनपीए की कार्रवाई के बाद कंपनियों को डिफाल्टर घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। 550 करोड़ में दो फैक्ट्री ऐसी हैं, जिन पर 100-100 करोड़ के लगभग बकाया है। लीड बैंक मैनेजर शशि कुमार जैन का कहना है कि जब तक ऋण जमा नहीं करने वालों को डिफाल्टर घोषित नहीं किया जाता, तब तक बकाएदारों के नाम घोषित नहीं किए जा सकते।
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रिकार्ड के अनुसार जिले में अकेले पीएनबी का 550 करोड़ एनपीए में पहुंच गया है। अन्य बैंकों का एनपीए इससे अलग है। हालांकि लीड बैंक होने के कारण अधिकतम फंसा हुआ पैसा पीएनबी का ही है।
बाहरी राज्यों में भी दे दिया बैंकों ने ऋण
मुजफ्फरनगर। पीएनबी का यहां जो 550 करोड़ रुपये डूबे हैं, इसमें कुछ पैसा वह भी है जो जिले के उद्यमियों को उड़ीसा और उत्तराखंड में फैक्ट्री लगाने के लिए दिया गया था। उद्यमियों से बैंक अफसरों की सेटिंग के चलते ही यह संभव हो पाया है। अब उन बैंक अफसरों के होश उड़े हुए हैं, जिन्होंने दूसरे राज्यों में यहीं से ऋण दे दिया।
पैसा हजम करने वालों के घर पर गांधीगीरी
मुजफ्फरनगर। पीएनबी बीते तीन माह से एनपीए में पहुंचे बड़े बकायेदारों के घर गांधीगीरी कर रहा है। बकायेदारों के घर पीएनबी के अफसरों की टीम पहुंचती है और उन्हें गुलाब का फूल भेंटकर ऋण का पैसा जमा करने की अपील की जाती है। बैंक का पैसा जनता का पैसा, इस तरह के नारे भी बैंककर्मी लगाते हैं।
बिजनौर से एनपीए पर इनपुट
बिजनौर। जिले में करीब सवा तीन लाख किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। इन पर करीब 4,350 करोड़ रुपये का ऋण किसानों ने ले रखा है। इनमें से 20,850 किसानों के खाते एनपीए श्रेणी में आ चुके हैं। इन किसानों ने समय पर अपने ऋण पर ब्याज तक का भुगतान भी नहीं किया है। इन किसानों पर करीब 500 करोड़ रुपये का ऋण है। इसमें करीब 15 प्रतिशत किसान पंजाब नेशनल बैंक के हैं।
20 हजार खाताधारकों पर 337 करोड़ बकाया
बागपत। जिले के बैंकों में ऐसे 20278 खाता धारक हैं, जिन्होंने बैंकों की 337 करोड़ रुपये की रकम नहीं लौटाई। बैंकों ने इस रकम को अब एनपीए खातों में डाल दिया है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीवी राजू ने बताया कि लोन के लिए जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं में 1,35,191 लाख खाते खुलवाए गए थे। वर्तमान में 20278 बैंक खाते ऐसे हैं, जिन्होंने लोन की रकम नहीं चुकाई। यह रकम 337 करोड़ 18 लाख 14 हजार 450 तक पहुंच गई है। इन खातों को एनपीए में शामिल किया गया है।
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मुजफ्फरनगर जिले में पीएनबी लीड बैंक है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पीएनबी औद्योगिक इकाईयों को पैसा जारी करता रहा है। जनपद में लोहा और स्टील फैक्ट्रियों में बड़ी संख्या में ताले लटक गए हैं। इसमें जिले में पीएनबी का इंडस्ट्रियल शाखाओं में 550 करोड़ रुपये डूब गए हैं। पीएनबी के अधिकारियों ने पैसा नहीं आता देख इस पैसे को एनपीए में डाल दिया है।
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एनपीए की कार्रवाई के बाद कंपनियों को डिफाल्टर घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। 550 करोड़ में दो फैक्ट्री ऐसी हैं, जिन पर 100-100 करोड़ के लगभग बकाया है। लीड बैंक मैनेजर शशि कुमार जैन का कहना है कि जब तक ऋण जमा नहीं करने वालों को डिफाल्टर घोषित नहीं किया जाता, तब तक बकाएदारों के नाम घोषित नहीं किए जा सकते।
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रिकार्ड के अनुसार जिले में अकेले पीएनबी का 550 करोड़ एनपीए में पहुंच गया है। अन्य बैंकों का एनपीए इससे अलग है। हालांकि लीड बैंक होने के कारण अधिकतम फंसा हुआ पैसा पीएनबी का ही है।
बाहरी राज्यों में भी दे दिया बैंकों ने ऋण
मुजफ्फरनगर। पीएनबी का यहां जो 550 करोड़ रुपये डूबे हैं, इसमें कुछ पैसा वह भी है जो जिले के उद्यमियों को उड़ीसा और उत्तराखंड में फैक्ट्री लगाने के लिए दिया गया था। उद्यमियों से बैंक अफसरों की सेटिंग के चलते ही यह संभव हो पाया है। अब उन बैंक अफसरों के होश उड़े हुए हैं, जिन्होंने दूसरे राज्यों में यहीं से ऋण दे दिया।
पैसा हजम करने वालों के घर पर गांधीगीरी
मुजफ्फरनगर। पीएनबी बीते तीन माह से एनपीए में पहुंचे बड़े बकायेदारों के घर गांधीगीरी कर रहा है। बकायेदारों के घर पीएनबी के अफसरों की टीम पहुंचती है और उन्हें गुलाब का फूल भेंटकर ऋण का पैसा जमा करने की अपील की जाती है। बैंक का पैसा जनता का पैसा, इस तरह के नारे भी बैंककर्मी लगाते हैं।
बिजनौर से एनपीए पर इनपुट
बिजनौर। जिले में करीब सवा तीन लाख किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। इन पर करीब 4,350 करोड़ रुपये का ऋण किसानों ने ले रखा है। इनमें से 20,850 किसानों के खाते एनपीए श्रेणी में आ चुके हैं। इन किसानों ने समय पर अपने ऋण पर ब्याज तक का भुगतान भी नहीं किया है। इन किसानों पर करीब 500 करोड़ रुपये का ऋण है। इसमें करीब 15 प्रतिशत किसान पंजाब नेशनल बैंक के हैं।
20 हजार खाताधारकों पर 337 करोड़ बकाया
बागपत। जिले के बैंकों में ऐसे 20278 खाता धारक हैं, जिन्होंने बैंकों की 337 करोड़ रुपये की रकम नहीं लौटाई। बैंकों ने इस रकम को अब एनपीए खातों में डाल दिया है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीवी राजू ने बताया कि लोन के लिए जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं में 1,35,191 लाख खाते खुलवाए गए थे। वर्तमान में 20278 बैंक खाते ऐसे हैं, जिन्होंने लोन की रकम नहीं चुकाई। यह रकम 337 करोड़ 18 लाख 14 हजार 450 तक पहुंच गई है। इन खातों को एनपीए में शामिल किया गया है।