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Muzaffarnagar News: छह महीने में बसपा के खाते से खिसके 52 हजार वोट
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मुजफ्फरनगर। पहली बार उपचुनाव के मैदान में उतरी बसपा का जनाधार खिसकता नजर आया। सिर्फ छह महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में मीरापुर विधानसभा में बसपा प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह को 55514 वोट मिले थे। उपचुनाव में शाह नजर सिर्फ 3248 वोट हासिल किए। जाहिर है कि बसपा के हिस्से में इस बार 52266 वोट कम आए हैं। अनुसूचित जाति के मतों का रुझान बड़ी संख्या में आजाद समाज पार्टी कांशीराम की तरफ दिखाई दिया। पिछले 22 साल में बसपा का विधानसभा चुनाव में यह सबसे खराब प्रदर्शन है।
बसपा के चुनाव लड़ने के तौर-तरीकों से बेस वोटरों के बीच बिखराव हो गया। आसपा अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर ने आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ा और दलित, मुस्लिम और गुर्जर समाज को एकजुट करने का प्रयास किया। नतीजा यह हुआ कि प्रत्याशी जाहिद हुसैन को 22661 वोट मिले। इनमें बड़ी संख्या दलित मतदाताओं की मानी जा रही है। नतीजों में स्थान भले ही तीसरा रहा हो, लेकिन 2027 में आसपा की सियासत मजबूत होगी और बसपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। बसपा का वोट बैंक आसपा के खाते में ट्रांसफर होता नजर आया है। उपचुनाव लड़ने की घोषणा के बाद शीर्ष नेतृत्व खुद चुनाव के मैदान में नहीं उतरा, जिससे मतदाताओं में बिखराव हो गया।
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बसपा के चुनाव लड़ने के तौर-तरीकों से बेस वोटरों के बीच बिखराव हो गया। आसपा अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर ने आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ा और दलित, मुस्लिम और गुर्जर समाज को एकजुट करने का प्रयास किया। नतीजा यह हुआ कि प्रत्याशी जाहिद हुसैन को 22661 वोट मिले। इनमें बड़ी संख्या दलित मतदाताओं की मानी जा रही है। नतीजों में स्थान भले ही तीसरा रहा हो, लेकिन 2027 में आसपा की सियासत मजबूत होगी और बसपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। बसपा का वोट बैंक आसपा के खाते में ट्रांसफर होता नजर आया है। उपचुनाव लड़ने की घोषणा के बाद शीर्ष नेतृत्व खुद चुनाव के मैदान में नहीं उतरा, जिससे मतदाताओं में बिखराव हो गया।
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