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संत संस्कृति का रक्षक कवच है-कृपालदास महाराज
Updated Tue, 16 Oct 2018 12:10 AM IST
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‘संत संस्कृति का रक्षक कवच’
मोरना। ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान की चतुर्थ पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि स्वामी कृपाल दास महाराज ने कहा कि संत संस्कृति के रक्षक कवच है। संस्कृति अच्छी होगी तो समाज और परिवार स्वस्थ होंगे। जिससे युवा पीढ़ी अपने आप अच्छे कर्म करने लगेगी। अच्छे कार्य हमेशा प्रगति की ओर अग्रसर करने में सहायक होते हैं। गुरु हनुमान ने समाज हित कार्य कर वैदिक संस्कृति को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। समाज सदैव उनका ऋणि रहेगा।
शुकतीर्थ स्थित सिद्धपीठ पूर्णागिरी आश्रम के प्रांगण में ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान महाराज की समाधि मंदिर में उनके परम शिष्य आश्रम अधिष्ठता महामण्डलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामी भजनानंद महाराज ने कहा कि जो नि:स्वार्थ भाव से मानव समाज के उत्थान के लिए सेवा करता है, वही योग्य है। माता राजनंदेश्वरी ने कहा कि जीवन भर भक्ति कर मानव जाति के लिए अपना स्वर्श न्यौछावर कर दे, वही संत है। जगपाल वैध, स्वामी राजेंद्र गिरी महाराज, स्वामी यशपाल ब्रहमचारी, स्वामी पुरषोत्तम गिरी महाराज, स्वामी धर्मदास महाराज, स्वामी रतनगिरी महाराज, स्वामी कृष्णदास महाराज, स्वामी रमेशदास महाराज आदि ने अपने विचार प्रकट कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अध्यक्षता स्वामी महानंद महाराज ने की तथा संचालन आचार्य अजय कृष्ण ने किया। इस मौके पर नगर से पधारे संत महात्माओं को भंडारे का प्रसाद खिलाकर नकद दान दक्षिणा भी दी। कार्यक्रम के आयोजन में बिजेंद्र आर्य, गुड्डू राठी, जाविंद्र फौजी, सुरेंद्र चौधरी, महकार सिंह सचिव, सुरेंद्र मुखिया, देवेंद्र प्रधान, धूम सिंह, गुड्डू बेलड़ा, मास्टर अनूप सिंह आदि रहे।
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मोरना। ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान की चतुर्थ पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि स्वामी कृपाल दास महाराज ने कहा कि संत संस्कृति के रक्षक कवच है। संस्कृति अच्छी होगी तो समाज और परिवार स्वस्थ होंगे। जिससे युवा पीढ़ी अपने आप अच्छे कर्म करने लगेगी। अच्छे कार्य हमेशा प्रगति की ओर अग्रसर करने में सहायक होते हैं। गुरु हनुमान ने समाज हित कार्य कर वैदिक संस्कृति को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। समाज सदैव उनका ऋणि रहेगा।
शुकतीर्थ स्थित सिद्धपीठ पूर्णागिरी आश्रम के प्रांगण में ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान महाराज की समाधि मंदिर में उनके परम शिष्य आश्रम अधिष्ठता महामण्डलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामी भजनानंद महाराज ने कहा कि जो नि:स्वार्थ भाव से मानव समाज के उत्थान के लिए सेवा करता है, वही योग्य है। माता राजनंदेश्वरी ने कहा कि जीवन भर भक्ति कर मानव जाति के लिए अपना स्वर्श न्यौछावर कर दे, वही संत है। जगपाल वैध, स्वामी राजेंद्र गिरी महाराज, स्वामी यशपाल ब्रहमचारी, स्वामी पुरषोत्तम गिरी महाराज, स्वामी धर्मदास महाराज, स्वामी रतनगिरी महाराज, स्वामी कृष्णदास महाराज, स्वामी रमेशदास महाराज आदि ने अपने विचार प्रकट कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अध्यक्षता स्वामी महानंद महाराज ने की तथा संचालन आचार्य अजय कृष्ण ने किया। इस मौके पर नगर से पधारे संत महात्माओं को भंडारे का प्रसाद खिलाकर नकद दान दक्षिणा भी दी। कार्यक्रम के आयोजन में बिजेंद्र आर्य, गुड्डू राठी, जाविंद्र फौजी, सुरेंद्र चौधरी, महकार सिंह सचिव, सुरेंद्र मुखिया, देवेंद्र प्रधान, धूम सिंह, गुड्डू बेलड़ा, मास्टर अनूप सिंह आदि रहे।
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