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मेडिकल रिपोर्ट में किशोरी दो बहनों के बालिग होने की पुष्टि
Updated Mon, 14 May 2018 12:09 AM IST
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। दो किशोरियों को जेल में भेज देने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा मुजफ्फरनगर पुलिस को भेजे गए नोटिस का जवाब देने को खतौली पुलिस तैयार है। पुलिस का दावा है कि किशोरियों के बालिग होने की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से भी हुई थी।
खतौली पुलिस ने 29 दिसंबर 2017 में कुछ लोगों को गोकशी के आरोप में पकड़ा गया था और उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। पुलिस गोकशी के आरोप में महिलाओं समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसमें पुलिस पर आरोप था कि परिवार की दो नाबालिग बहनें जिनकी आयु 12 साल और दूसरी की 16 साल को बाल संरक्षण गृह भेजने के बजाए जिला कारागार में भेज दिया था। जिनकी जमानत कई माह बाद हाईकोर्ट से हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने इस प्रकरण में मुजफ्फरनगर पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया। पुलिस का कहना है कि गोकशी के मामले में जेल भेजी गई दोनों किशोरी बहनें बालिग हैं। पुलिस ने सरकारी अस्पताल में दोनों किशोरियों का कोर्ट में पेश करने से पूर्व मेडिकल परीक्षण कराया था। मेडिकल रिपोर्ट में चिकित्सक ने एक किशोरी की उम्र 19 वर्ष तथा दूसरी किशोरी की उम्र को 21 वर्ष दर्ज की थी।
मुकदमे के विवेचक की ओर से भी उस वक्त की गई जांच पड़ताल में किशोरियां बालिग निकली थी। तीन माह बाद हाईकोर्ट से इनकी जमानत हुई थी। पुलिस का यहां तक कहना है कि अगर दोनों किशोरियां नाबालिग थी तो परिजनों ने उस वक्त कोर्ट या जुवेनाईनल बोर्ड में उम्र निर्धारित कराने के लिए क्लेम क्यों नहीं किया। परिजनों की ओर से कोर्ट में नाबालिग होने के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इतना ही नहीं हाईकोर्ट में भी नाबालिग साबित करने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। वहीं पुलिस मेडिकल रिपोर्ट को ही किशोरियों को बालिग साबित करने का ठोस साक्ष्य मान रही है।
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- मेडिकल रिपोर्ट में दोनों बहनें बालिग हैं। मानवाधिकार आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस की कोई प्रतिलिपि उनको नहीं मिली है। अगर नोटिस का जवाब मांगा गया तो वे इसके लिए तैयार हैं। नोटिस का जवाब देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। - अंबिका प्रसाद भारद्वाज, इंस्पेक्टर, खतौली।
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खतौली पुलिस ने 29 दिसंबर 2017 में कुछ लोगों को गोकशी के आरोप में पकड़ा गया था और उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। पुलिस गोकशी के आरोप में महिलाओं समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसमें पुलिस पर आरोप था कि परिवार की दो नाबालिग बहनें जिनकी आयु 12 साल और दूसरी की 16 साल को बाल संरक्षण गृह भेजने के बजाए जिला कारागार में भेज दिया था। जिनकी जमानत कई माह बाद हाईकोर्ट से हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने इस प्रकरण में मुजफ्फरनगर पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया। पुलिस का कहना है कि गोकशी के मामले में जेल भेजी गई दोनों किशोरी बहनें बालिग हैं। पुलिस ने सरकारी अस्पताल में दोनों किशोरियों का कोर्ट में पेश करने से पूर्व मेडिकल परीक्षण कराया था। मेडिकल रिपोर्ट में चिकित्सक ने एक किशोरी की उम्र 19 वर्ष तथा दूसरी किशोरी की उम्र को 21 वर्ष दर्ज की थी।
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मुकदमे के विवेचक की ओर से भी उस वक्त की गई जांच पड़ताल में किशोरियां बालिग निकली थी। तीन माह बाद हाईकोर्ट से इनकी जमानत हुई थी। पुलिस का यहां तक कहना है कि अगर दोनों किशोरियां नाबालिग थी तो परिजनों ने उस वक्त कोर्ट या जुवेनाईनल बोर्ड में उम्र निर्धारित कराने के लिए क्लेम क्यों नहीं किया। परिजनों की ओर से कोर्ट में नाबालिग होने के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इतना ही नहीं हाईकोर्ट में भी नाबालिग साबित करने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। वहीं पुलिस मेडिकल रिपोर्ट को ही किशोरियों को बालिग साबित करने का ठोस साक्ष्य मान रही है।
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- मेडिकल रिपोर्ट में दोनों बहनें बालिग हैं। मानवाधिकार आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस की कोई प्रतिलिपि उनको नहीं मिली है। अगर नोटिस का जवाब मांगा गया तो वे इसके लिए तैयार हैं। नोटिस का जवाब देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। - अंबिका प्रसाद भारद्वाज, इंस्पेक्टर, खतौली।