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वेजीटेबल सॉस दिखावा, आरारोट-पेपरी पेस्ट
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:56 PM IST
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मुजफ्फरनगर। टोमेटो, हरी मिर्च सॉस के साथ चाऊमीन, बर्गर या पेटीज खाने के शौकीन हैं तो जरा संभलिए। यह आपको अस्पताल पहुंचा सकती है। वेजिटेबल (हरी सब्जी) सॉस दिखावा है, असल में वह आरारोट और पेपरी कलर मिलाकर तैयार किया जा रहा है, जबकि लाल रंग मिलाकर टोमेटो सॉस तैयार की जा रही है। इसके इस्तेमाल से फेफड़े खराब होने के साथ कैंसर होने का खतरा है। फूड विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। मिलावटखोर अपने मुनाफे के लिए लोगों की जान से खेल रहे हैं।
शहर में ठेलों और जगह-जगह स्थानों पर चाऊमीन, बर्गर, पेटीज के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के साथ सॉस का प्रयोग खुलेआम हो रहा है। कारोबारी वेजिटेबल सॉस का रेपर लगाकर उसके भीतर आरारोट, पेपरी कलर से तैयार पेस्ट बेच रहे हैं। यह पेस्ट दिखने में सॉस की तरह है, जो सेहत पर विपरीत प्रभाव डालता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सॉस का लगातार प्रयोग कैंसर की बीमारी पैदा कर सकता है। इसके अलावा फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। एफएसडीए ने गांव सुजडू और अलमासपुर चौराहे, हनुमान चौक पर तीन फर्म की जांच की गई थी, जिनकी सॉस में यह तथ्य सामने आए हैं। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। यह सॉस पूरी तरह से सिंथेटिक और हानिकारक है।
शहर में बंद, मेरठ से सप्लाई
मुजफ्फरनगर। शहर में कार्रवाई के बाद सॉस बनाने का कार्य ठप हो गया है। जबकि व्यापारी, कारोबारी मेरठ से सॉस की सप्लाई कर रहे हैं। पांच लीटर की एक कैन 100 रुपये यानि 20 रुपये प्रति लीटर की दर से सॉस खरीदी जाती है। यह 200 से 300 रुपये तक में बिक रही है।
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ऐसे बना रहे मिलावटखोर सॉस
मुजफ्फरनगर। आरारोट को पानी में मिलाकर बाउल करने पर उसमें थिकनेस बनता है, जबकि मिर्च जैसा तीखापन देने के लिए पेपरी कलर मिलाया जा रहा है। वहीं, आरारोट में टोमेटो फ्लेवर मिलाकर टोमेटो सॉस बन रही है। कासनोजैनिक कलर डालकर सॉस को गाढ़ा किया जाता है। यह कलर पूरी तरह से सेहत पर विपरीत प्रभाव डालता है।
बोले अधिकारी...
आरारोट और पेपरी कलर मिलाकर सॉस बनाया जाना सामने आया है। शहर में यह खेल बंद करा दिया गया। कुछ कारोबारी मेरठ से सॉस की सप्लाई कर रहे हैं। इसकी जांच की जा रही है। मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई होगी। - विनीत कुमार, डीओ, खाद्य सुरक्षा विभाग मुजफ्फरनगर।
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शहर में ठेलों और जगह-जगह स्थानों पर चाऊमीन, बर्गर, पेटीज के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के साथ सॉस का प्रयोग खुलेआम हो रहा है। कारोबारी वेजिटेबल सॉस का रेपर लगाकर उसके भीतर आरारोट, पेपरी कलर से तैयार पेस्ट बेच रहे हैं। यह पेस्ट दिखने में सॉस की तरह है, जो सेहत पर विपरीत प्रभाव डालता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सॉस का लगातार प्रयोग कैंसर की बीमारी पैदा कर सकता है। इसके अलावा फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। एफएसडीए ने गांव सुजडू और अलमासपुर चौराहे, हनुमान चौक पर तीन फर्म की जांच की गई थी, जिनकी सॉस में यह तथ्य सामने आए हैं। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। यह सॉस पूरी तरह से सिंथेटिक और हानिकारक है।
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शहर में बंद, मेरठ से सप्लाई
मुजफ्फरनगर। शहर में कार्रवाई के बाद सॉस बनाने का कार्य ठप हो गया है। जबकि व्यापारी, कारोबारी मेरठ से सॉस की सप्लाई कर रहे हैं। पांच लीटर की एक कैन 100 रुपये यानि 20 रुपये प्रति लीटर की दर से सॉस खरीदी जाती है। यह 200 से 300 रुपये तक में बिक रही है।
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ऐसे बना रहे मिलावटखोर सॉस
मुजफ्फरनगर। आरारोट को पानी में मिलाकर बाउल करने पर उसमें थिकनेस बनता है, जबकि मिर्च जैसा तीखापन देने के लिए पेपरी कलर मिलाया जा रहा है। वहीं, आरारोट में टोमेटो फ्लेवर मिलाकर टोमेटो सॉस बन रही है। कासनोजैनिक कलर डालकर सॉस को गाढ़ा किया जाता है। यह कलर पूरी तरह से सेहत पर विपरीत प्रभाव डालता है।
बोले अधिकारी...
आरारोट और पेपरी कलर मिलाकर सॉस बनाया जाना सामने आया है। शहर में यह खेल बंद करा दिया गया। कुछ कारोबारी मेरठ से सॉस की सप्लाई कर रहे हैं। इसकी जांच की जा रही है। मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई होगी। - विनीत कुमार, डीओ, खाद्य सुरक्षा विभाग मुजफ्फरनगर।