{"_id":"5a04a12c4f1c1bca678ba49d","slug":"51510252844-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिया सौगवारों ने किया मातम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिया सौगवारों ने किया मातम
Updated Fri, 10 Nov 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस्लाम में आतंक की कोई जगह नहीं
तितावी (मुजफ्फरनगर)। सैदपुरा खुर्द में चेहल्लुम के मौके पर ताजिया जुलजुनाह बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने उसके बाद जंजीरों से मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया।
कदीम छोटे इमामबाड़े में मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना अमीर हसन आब्दी लखनऊ ने कहा कि इमाम हुसैन ने आतंक के खात्मे के लिए लड़ाई लड़ी। इस्लाम और इंसानियत को जिंदा रखने के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने कुनबे सहित 72 लोगों के साथ खुद को भी शहीद करा लिया। इस्लाम में आतंक की कोई जगह नहीं है। इमाम हुसैन को यजीद ने कई दिन तक पानी नहीं दिया। भूखे-प्यासे करबला के मैदान मे यजीद से लड़ते रहे। दीन-ए-इस्लाम के लिए इमाम हुसैन ने अपनी फ़ौज के साथ कुर्बानी दे दी। कर्बला का मंजर सुनकर हर कोई जार-जार रोया। मजलिस में मर्सिया ख्वानी मुमताज, चांद मिया, वसी हैदर, शिराज, इरशाद अली ने और नोहाख्वानी अहसान अली, सलामत अली, इमाम अली, सद्दन आदि ने की। इस दौरान पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
विज्ञापन
तितावी (मुजफ्फरनगर)। सैदपुरा खुर्द में चेहल्लुम के मौके पर ताजिया जुलजुनाह बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने उसके बाद जंजीरों से मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया।
कदीम छोटे इमामबाड़े में मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना अमीर हसन आब्दी लखनऊ ने कहा कि इमाम हुसैन ने आतंक के खात्मे के लिए लड़ाई लड़ी। इस्लाम और इंसानियत को जिंदा रखने के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने कुनबे सहित 72 लोगों के साथ खुद को भी शहीद करा लिया। इस्लाम में आतंक की कोई जगह नहीं है। इमाम हुसैन को यजीद ने कई दिन तक पानी नहीं दिया। भूखे-प्यासे करबला के मैदान मे यजीद से लड़ते रहे। दीन-ए-इस्लाम के लिए इमाम हुसैन ने अपनी फ़ौज के साथ कुर्बानी दे दी। कर्बला का मंजर सुनकर हर कोई जार-जार रोया। मजलिस में मर्सिया ख्वानी मुमताज, चांद मिया, वसी हैदर, शिराज, इरशाद अली ने और नोहाख्वानी अहसान अली, सलामत अली, इमाम अली, सद्दन आदि ने की। इस दौरान पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
विज्ञापन