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ओएचई वायर में फाल्ट, एक्सप्रेस ट्रेनों के पहिए थमे
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:04 AM IST
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। रेलवे लाइन का ओएचई वायर में अचानक फाल्ट होने से कई ट्रेनें ट्रैक पर खड़ी हो गईं। सूचना मिलने पर ओएचई वायर ठीक करने के लिए मेरठ और मुजफ्फरनगर के एसएससी मौके पर पहुंचे और डेढ़ घंटे के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हो सका।
शनिवार को रेलवे स्टेशन से आधा किमी की दूरी पर मेरठ ओर रेलवे लाइन के ओएचई (ओवरहैड इक्यूपमेंट) वायर पर चिड़िया बैठ गई। अर्थ आने की वजह से वायर में फाल्ट हो गया। जिस कारण दिल्ली से अमृतसर जाने वाली इंदौर एक्सप्रेस पावली खास में थम गई। इसके अलावा दिल्ली से देहरादून जाने वाली ओखा एक्सप्रेस सकौती रेलवे स्टेशन पर और इंटरसिटी एक्सप्रेस सफेदा फाटक से मेरठ की ओर करीब किमी दूर रुक गई। इसकी सूचना मिलने पर रेलवे विभाग में अफरातफरी मच गई। आननफानन में मेरठ और मुजफ्फरनगर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर मौके पर पहुंचे और ओएचई वायर को ठीक कराया। वायर ठीक करने में करीब डेढ़ घंटे का समय लग गया। डेढ़ घंटे बाद एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हो सका।
उधर, कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर ओएचई वायर के चार नए पोल लगाए गए हैं। अभी तक चारों पोल मजबूत नहीं हो सके हैं। इंजीनियरों के मुताबिक जब तक पोल मजबूत नहीं होंगे। कॉशन लेकर ही सभी ट्रेनों को 10 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से निकाला जाएगा। इन पोल के मजबूत होने पर दस दिन का समय और लग सकता है।
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शनिवार को रेलवे स्टेशन से आधा किमी की दूरी पर मेरठ ओर रेलवे लाइन के ओएचई (ओवरहैड इक्यूपमेंट) वायर पर चिड़िया बैठ गई। अर्थ आने की वजह से वायर में फाल्ट हो गया। जिस कारण दिल्ली से अमृतसर जाने वाली इंदौर एक्सप्रेस पावली खास में थम गई। इसके अलावा दिल्ली से देहरादून जाने वाली ओखा एक्सप्रेस सकौती रेलवे स्टेशन पर और इंटरसिटी एक्सप्रेस सफेदा फाटक से मेरठ की ओर करीब किमी दूर रुक गई। इसकी सूचना मिलने पर रेलवे विभाग में अफरातफरी मच गई। आननफानन में मेरठ और मुजफ्फरनगर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर मौके पर पहुंचे और ओएचई वायर को ठीक कराया। वायर ठीक करने में करीब डेढ़ घंटे का समय लग गया। डेढ़ घंटे बाद एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हो सका।
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उधर, कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर ओएचई वायर के चार नए पोल लगाए गए हैं। अभी तक चारों पोल मजबूत नहीं हो सके हैं। इंजीनियरों के मुताबिक जब तक पोल मजबूत नहीं होंगे। कॉशन लेकर ही सभी ट्रेनों को 10 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से निकाला जाएगा। इन पोल के मजबूत होने पर दस दिन का समय और लग सकता है।
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