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डीएवी में गूंजा था आजादी का बिगुल

Tue, 15 Aug 2017 01:12 AM IST
Updated Tue, 15 Aug 2017 01:12 AM IST
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डीएवी में गूंजा था आजादी का बिगुल
डीएवी में गूंजा था आजादी का बिगुल
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मुजफ्फरनगर। आजादी के आंदोलन में युवा शक्ति के जोश और जज्बे ने अंग्रेजों को पस्त कर दिया था। डीएवी हाईस्कूल पर छात्रों ने तिरंगा फहराया और शहर के मुख्य डाकघर में आग लगा दी, तो अंग्रेज कलक्टर जे.वी. लिंच के लिए मोर्चा लेना मुश्किल हो गया था। डीएवी में पढ़ने आए जिले भर के विद्यार्थियों को उस दौर में स्वतंत्रता की घुंटी पिलाई जाती थी।
शहर में आर्य समाज रोड पर स्थित डीएवी इंटर कालेज स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर का योगदान, पुस्तक में डीएवी स्कूल की महत्ता अंकित है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों के दमन के विरोध में यहां के छात्रों ने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में जुलूस निकाले। स्कूल की प्रयोगशाला से रात के दो बजे खिड़की का शीशा तोड़कर फास्फोरस से मिश्रण तैयार कर शिवचौक के मुख्य डाकघर में आग लगा दी थी। स्वतंत्रता सेनानी त्रिलोकचंद जैन, श्याम लाल गर्ग, शिवचरण दास, त्रिलोकीनाथ शर्मा, अरुण गुप्त, जय प्रकाश, मामचंद्र जैन, रमेशचंद की टोली ने घटना अंजाम दी। मंसूरपुर में तार काटते भी छात्र पकड़े गए थे। डीएवी की छत पर तिरंगा फहरा दिया। कलक्टर लिंच ने स्कूल प्रबंधक डॉ हीरालाल और हैड मास्टर किशोरीलाल को झंडा उतरवाने के लिए कहा, विद्यार्थी डिगे नहीं। फिर जिमनेजियम हाल पर तिरंगा फहराने की सहमति बनी। दसवीं के छात्र श्यामलाल को गिरफ्तार कर एक साल की सजा सुनाई गई। हरभगवान त्यागी, देवदत्त शर्मा आदि ने एसडी इंटर कालेज के सत्यप्रकाश गुप्ता, लक्ष्मीचंद गुप्ता, जगभूषण, सुखबीर सिंह जैन और इस्लामिया इंटर कालेज के अब्दुल वहाब के साथ मिल कर शहर में क्रांति का सिंहनाद किया। अंग्रेजों के लाठीचार्ज में छात्र घायल हुए। स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की आंखों में किरकिरी बने डीएवी इंटर कालेज की आज भी विशिष्ट गरिमा हैं।
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हेडमास्टर विशंभर दयाल ने जलाई थी क्रांति की मशाल
मुजफ्फरनगर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन से जुड़ी वयोवृद्ध आर्य कन्या पाठशाला की पूर्व प्रधानाचार्या शांति शर्मा बताती हैं कि मुजफ्फरनगर में वर्ष 1920 में पहला राजनैतिक सम्मेलन हुआ। उस वक्त मास्टर विशंभर दयाल डीएवी स्कूल के हेड मास्टर थे। क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने जिले में खिलाफत आंदोलन खड़ा किया। विशंभर दयाल ने प्रधानाध्यापक पद से इस्तीफा तक दे दिया था। उनकी अगुवाई में छात्र प्रभात फेरियां निकालते, शहर में इंकलाब जिंदाबाद के नारे गूंजते। बाद में वह गुरुकुल ज्वालापुर में प्रोफेसर रहे। आर्य प्रतिनिधि सभा यूपी के अध्यक्ष बने। दिल्ली में एक पैसे मूल्य का रोटी नाम का अख़बार निकाला। 1930 में उन्होंने शामली की वीरांगना ज्ञानदेवी धीमान को दी गई यातनाओं के विरोध में दारोगा असलम के खिलाफ आवाज उठाई थी।
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विद्यार्थियों को प्रेेरित करता है क्रांतिकारियों का जीवन
हेड मास्टर विशंबर दयाल का पूरा जीवन संघर्षशील रहा। आजादी के आंदोलन में कई बार नजरबंद किए गए। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में संस्था के विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने यहां शिक्षा ग्रहण की। स्वतंत्रता के मूल्यों, आदर्शों और क्रांतिकारियों के जीवन से विद्यार्थियों को प्रेरित करना भी लक्ष्य है, ताकि युवा देशभक्त बने।
- शिवकुमार यादव
प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कालेज
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