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लागत मूल्य से कम है गेहूं पर 50 रूपये की बढ़ोतरी, किसान असंतुष्ट
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लागत मूल्य से कम है गेहूं पर 50 रुपये की बढ़ोतरी
मुजफ्फरनगर/चरथावल। केंद्र सरकार द्वारा रबी की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा करने को किसान नाकाफी मान रहे हैं। बेतहाशा महंगाई से फसलों के उत्पादन में कई गुणा वृद्धि हो गई है। गेहूं की फसल पर 50 रुपये बढ़ाकर 1975 रुपये क्विंटल बढ़ाना लागत के अनुपात में काफी कम है। किसानों का कहना है मौजूदा समय में घोषित एमएसपी से कम दरों 1500-1600 रुपये क्विंटल पर मंडी में गेहूं बिक रहा है। किसान नेताओं की मांग है घोषित मूल्य से कम दाम पर फसल खरीद करने वालों के खिलाफ सरकार कड़ा कानून बनाएं, तभी किसानों को इसका फायदा मिलेगा। अमर उजाला से बातचीत में कई किसानों और संगठन से जुड़े नेताओं ने अपनी पीड़ा बयां की।
भाकियू के मंडल महासचिव राजू अहलावत कहते हैं कि सरकार रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाकर कृषि विधेयकों पर विरोध की आवाज दबाना चाहती है। किसानों की लागत दोगुनी हो गई है, जबकि सरकार ने गेहूं पर मात्र 50 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी कर भ्रम फैलाने का काम किया है। मुजफ्फरनगर जनपद में रबी की फसलों में सर्वाधिक गेहूं की पैदावार होती है।
बधाई कलां के प्रगतिशील किसान अरविंद मलिक कहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार की वृद्धि कम है। सीजन में किसानों की फसलों की खरीद का माकूल बंदोबस्त नहीं होने से किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने एमएसपी लागू करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापाक प्रचार-प्रसार के द्वारा खरीद की सुचारु व्यवस्था कराने की मांग की है।
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भारतीय किसान संगठन के जिलाध्यक्ष कपिल सोम ने बताया सरकार द्वारा लागू एमएसपी से कम मूल्य पर खरीद करने वालों पर विधिक कार्रवाई के लिए कानून बने। अन्यथा यह घोषणा सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाती है। पिछले साल गेहूं की फसल की एमएसपी 1925 थी। फिलहाल किसान गेहूं की फसल को मात्र 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने को मजबूर हैं।
किसान स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरीश राणा बिरालसी का मंतव्य है कि खाद, डीजल और कीटनाशक दवाओं के दाम आसमान छू रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा रबी की फसलों में वृद्धि मामूली है। सरकार द्वारा घोषित मूल्य से काफी कम दामों पर किसानों को 260 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है।
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मुजफ्फरनगर/चरथावल। केंद्र सरकार द्वारा रबी की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा करने को किसान नाकाफी मान रहे हैं। बेतहाशा महंगाई से फसलों के उत्पादन में कई गुणा वृद्धि हो गई है। गेहूं की फसल पर 50 रुपये बढ़ाकर 1975 रुपये क्विंटल बढ़ाना लागत के अनुपात में काफी कम है। किसानों का कहना है मौजूदा समय में घोषित एमएसपी से कम दरों 1500-1600 रुपये क्विंटल पर मंडी में गेहूं बिक रहा है। किसान नेताओं की मांग है घोषित मूल्य से कम दाम पर फसल खरीद करने वालों के खिलाफ सरकार कड़ा कानून बनाएं, तभी किसानों को इसका फायदा मिलेगा। अमर उजाला से बातचीत में कई किसानों और संगठन से जुड़े नेताओं ने अपनी पीड़ा बयां की।
भाकियू के मंडल महासचिव राजू अहलावत कहते हैं कि सरकार रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाकर कृषि विधेयकों पर विरोध की आवाज दबाना चाहती है। किसानों की लागत दोगुनी हो गई है, जबकि सरकार ने गेहूं पर मात्र 50 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी कर भ्रम फैलाने का काम किया है। मुजफ्फरनगर जनपद में रबी की फसलों में सर्वाधिक गेहूं की पैदावार होती है।
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बधाई कलां के प्रगतिशील किसान अरविंद मलिक कहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार की वृद्धि कम है। सीजन में किसानों की फसलों की खरीद का माकूल बंदोबस्त नहीं होने से किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने एमएसपी लागू करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापाक प्रचार-प्रसार के द्वारा खरीद की सुचारु व्यवस्था कराने की मांग की है।
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भारतीय किसान संगठन के जिलाध्यक्ष कपिल सोम ने बताया सरकार द्वारा लागू एमएसपी से कम मूल्य पर खरीद करने वालों पर विधिक कार्रवाई के लिए कानून बने। अन्यथा यह घोषणा सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाती है। पिछले साल गेहूं की फसल की एमएसपी 1925 थी। फिलहाल किसान गेहूं की फसल को मात्र 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने को मजबूर हैं।
किसान स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरीश राणा बिरालसी का मंतव्य है कि खाद, डीजल और कीटनाशक दवाओं के दाम आसमान छू रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा रबी की फसलों में वृद्धि मामूली है। सरकार द्वारा घोषित मूल्य से काफी कम दामों पर किसानों को 260 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है।