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ब्लॉक प्रमुख के पीए समेत चार को हाईकोर्ट ने दी राहत
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भाजपा नेताओं पर मुकदमे में सुलह को कराया केस
चरथावल। मुकदमे में आरोपी पीए नीरज मिश्रा ने बताया कि पहली दिसंबर को बीडीसी को अपने खेमे में करने की रंजिश में उन पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें भाजपा नेता सौरभ पुंडीर समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस मुकदमे में सुलह कराने की नीयत से बीडीसी महिला के द्वारा फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। बता दें कि ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ तीन दिसंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा नेताओं को मात मिली थी। प्रमुख के पति रालोद नेता सलमान जैदी ने बताया कि पहली दिसंबर की घटना में सुलह कराने की नियत से भाजपा नेताओं के घटना के 11 दिन बाद केस दर्ज कराया गया है। केस के विवेचक सीओ सदर रिजवान अहमद ने बताया कि हाईकोर्ट का आदेश नहीं मिला है। केस की वादिया के कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराएं जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।
सरकार वंचितों और पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाती है। हालांकि जब रंजिशन अथवा स्वार्थी तत्वों द्वारा कानून का दुरुपयोग किया जाता है, तो इस कृत्य पर अंकुश लगाने के लिए देश की अदालतें जागरूक और सतर्क हैं। वह समय समय पर पीड़ितों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देती रहती है। एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट हाल में कई बार गाइडलाइन दे चुका है।
अनिल जिंदल वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी
पूर्व अध्यक्ष जिला बार संघ
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चरथावल। मुकदमे में आरोपी पीए नीरज मिश्रा ने बताया कि पहली दिसंबर को बीडीसी को अपने खेमे में करने की रंजिश में उन पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें भाजपा नेता सौरभ पुंडीर समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस मुकदमे में सुलह कराने की नीयत से बीडीसी महिला के द्वारा फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। बता दें कि ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ तीन दिसंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा नेताओं को मात मिली थी। प्रमुख के पति रालोद नेता सलमान जैदी ने बताया कि पहली दिसंबर की घटना में सुलह कराने की नियत से भाजपा नेताओं के घटना के 11 दिन बाद केस दर्ज कराया गया है। केस के विवेचक सीओ सदर रिजवान अहमद ने बताया कि हाईकोर्ट का आदेश नहीं मिला है। केस की वादिया के कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराएं जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।
सरकार वंचितों और पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाती है। हालांकि जब रंजिशन अथवा स्वार्थी तत्वों द्वारा कानून का दुरुपयोग किया जाता है, तो इस कृत्य पर अंकुश लगाने के लिए देश की अदालतें जागरूक और सतर्क हैं। वह समय समय पर पीड़ितों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देती रहती है। एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट हाल में कई बार गाइडलाइन दे चुका है।
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अनिल जिंदल वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी
पूर्व अध्यक्ष जिला बार संघ