फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   मानव की सहज संवेदनाओं से जुड़े होते हैं लोकगीत

मानव की सहज संवेदनाओं से जुड़े होते हैं लोकगीत

Fri, 27 Apr 2018 01:09 AM IST
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
मानव की सहज संवेदनाओं से जुड़े होते हैं लोकगीत
लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं को रिझाया
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। संगीतमयी प्रकृति जब गुनगुना उठती है, तब लोकगीतों का स्फुरण होना स्वाभाविक है। लोक संगीत अत्यंत प्राचीन एवं मानवीय संवेदनाओं का एक आधार है। इसके साथ ही डॉ जया शर्मा ने संगीतकार उस्ताद महराज खां एवं उदय शंकर मिश्र जी के साथ चैती, कजरी, भोजपुरी एवं ब्रजभाषा के लोकगीतों की प्रस्तुति कर सभी को लोक संगीत की गहराइयों में डूबो दिया।

मेरठ रोड स्थित जैन कन्या पाठशाला महाविद्यालय में मानव जीवन मेें लोक संगीत का महत्व विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में वक्ताओं ने लोक संगीत को आम जनमानस से जुड़ा होना बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत शिक्षक एवं बनारस घराने से जुडे़ पंडित उदय शंकर मिश्र ने कहा कि लोक गीतों के विषय सामान्य मानव की सहज संवेदनाओं से जुडे़ होने के कारण संवाहक के रूप में माधुर्य प्रवाहित कर हमें तन्मयता के लोक में पहुंचा देते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में लोक संगीत की परंपरा भिन्न है। आरजी कॉलेज मेरठ की डॉ अलका शर्मा, डॉ हेमंत शुक्ला ने कहा कि संगीतमयी प्रकृति जब गुनगुना उठती है, तब लोक गीतों का स्फुरण होना स्वाभाविक है। लोक संगीत अत्यंत प्राचीन एवं मानवीय संवेदनाओं का सहजतम आधार है। डीपीएस के आशीष कुमार, प्रिया शर्मा, पूनम ने कहा कि लोक संगीत देश-प्रदेश अथवा स्थान विशिष्ट की सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का दर्पण होता है। वक्ताओं ने कहा कि भारत में बारहमासा, छैमासा, कजरी, चैती, लावणी, बाउल, बिरहा फाग, कीर्तन आदि लोक गीत परंपरा आज भी प्रचलन में है। प्रदेश में कैइसे खोले जाइबो सावन में कजरिया बदरिया घिरी आई सजनी, हरियाणा का नाच-नाच दामन पाट्या, कश्मीर का आव बहार चलो बुलबुले, पंजाब का निक्की-निक्की बूंदी, ब्रजलोक गीतों में होरी आदि मशहूर है। इसके साथ ही डॉ जया शर्मा ने संगीतकार उस्ताद महराज खां एवं उदय शंकर मिश्र जी के साथ चैती, कजरी, भोजपुरी एवं ब्रजभाषा के लोकगीतों की प्रस्तुति कर सभी को लोक संगीत की गहराइयों में डूबो दिया। इससे पूर्व, प्राचार्य ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने वर्तमान में लोक संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतिभा शर्मा, मोनिका शर्मा, डॉ निशा गुप्ता, नीता भटनागर, डॉ वंदना वर्मा, डॉ संतोष कुमारी, सोनाली सिंह, डॉ दुष्यंत गर्ग, डॉ अमर दीप, डॉ पल्लवी, डॉ वर्चसा, डॉ पूनम भारद्वाज, डॉ अंजलि, रीमा, पूर्णिमा, पूर्णिमा, अर्चना, निधि, सोनम का सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed