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सहज और सरलता का रूप उपन्यास बिसात
Updated Mon, 05 Mar 2018 12:09 AM IST
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मुजफ्फरनगर। एसडी कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सभागार में नेमपाल प्रजापति के उपन्यास बिसात पर परिसंवाद का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने उपन्यास की बारीकियों से दर्शकों को अवगत कराया। उपन्यास में साहित्य, समाज के साथ अनेक तथ्यों को दिया गया है, जो आज के दौर में प्रचलित है। इसके बाद अतिथियों ने उपन्यास का विमोचन किया।
शुभारंभ सुविख्यात साहित्यकार निर्मल गुप्त ने किया। कहा कि बिसात उपन्यास इसलिए देर तक याद रखा जाएगा, क्योंकि यह आदमी पर चढ़े तरह-तरह के मुखौटों और खुरच-खुरच कर उतारता है। इसमें कथ्य को पुरजोर तरीके से संप्रेषित किया है। प्रो जेपी सविता ने कहा कि उपन्यास में कई जानकारियों को प्रौढ़ता के साथ उभारा गया है। मध्य स्तर के शहरों, कस्बों को केंद्र में रखकर लिखा गया साहित्य अपेक्षाकृत कम है। व्यंग्ता के प्रयोग ने इसे पठनीय बना दिया। विशिष्ठ अतिथि डॉ. एसएन चौहान ने कहा कि उपन्यास समाज में विसंगतियों से जूझते इंसान की आपबीती व्यथा का निरूपण है। परमेंद्र सिंह ने कहा कि लेखक ने जिस सूझबूझ से उपन्यास को गढ़ा है, वह काफी रोमांचक है। बिखरे पात्रों और तथ्यों को एक सूत्र में बांधा गया है।
रोहित कौशिक ने कहा कि उपन्यास सहज और सरलता का रूप है। अमित धर्म सिंह ने कहा कि साहित्य और समाज में कैसे-कैसे खेल हैं। कैसे किसी को मोहरा और राजा बनाया जाता है, इसकी बानगी उपन्यास बिसात है। लेखक नेमपाल प्रजापति ने कहा कि साहित्य को लिखना आज के आधुनिक दौर में बड़ा कठिन है। आधुनिक युग युवा इससे दूर है। इसके बाद उपन्यास का विमोचन किया गया। अध्यक्षता प्रो. जेपी सविता और संचालन डॉ. प्रदीप जैन ने किया। इस मौके पर डॉ. आरएम तिवारी, एनएन पंत, डॉ. विश्वंभर पांडेय, तरुण गोयल, अश्वनी खंडेलवाल, शिवकुमार, सुरेंद्र कुमार वत्स आदि मौजूद रहे।
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शुभारंभ सुविख्यात साहित्यकार निर्मल गुप्त ने किया। कहा कि बिसात उपन्यास इसलिए देर तक याद रखा जाएगा, क्योंकि यह आदमी पर चढ़े तरह-तरह के मुखौटों और खुरच-खुरच कर उतारता है। इसमें कथ्य को पुरजोर तरीके से संप्रेषित किया है। प्रो जेपी सविता ने कहा कि उपन्यास में कई जानकारियों को प्रौढ़ता के साथ उभारा गया है। मध्य स्तर के शहरों, कस्बों को केंद्र में रखकर लिखा गया साहित्य अपेक्षाकृत कम है। व्यंग्ता के प्रयोग ने इसे पठनीय बना दिया। विशिष्ठ अतिथि डॉ. एसएन चौहान ने कहा कि उपन्यास समाज में विसंगतियों से जूझते इंसान की आपबीती व्यथा का निरूपण है। परमेंद्र सिंह ने कहा कि लेखक ने जिस सूझबूझ से उपन्यास को गढ़ा है, वह काफी रोमांचक है। बिखरे पात्रों और तथ्यों को एक सूत्र में बांधा गया है।
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रोहित कौशिक ने कहा कि उपन्यास सहज और सरलता का रूप है। अमित धर्म सिंह ने कहा कि साहित्य और समाज में कैसे-कैसे खेल हैं। कैसे किसी को मोहरा और राजा बनाया जाता है, इसकी बानगी उपन्यास बिसात है। लेखक नेमपाल प्रजापति ने कहा कि साहित्य को लिखना आज के आधुनिक दौर में बड़ा कठिन है। आधुनिक युग युवा इससे दूर है। इसके बाद उपन्यास का विमोचन किया गया। अध्यक्षता प्रो. जेपी सविता और संचालन डॉ. प्रदीप जैन ने किया। इस मौके पर डॉ. आरएम तिवारी, एनएन पंत, डॉ. विश्वंभर पांडेय, तरुण गोयल, अश्वनी खंडेलवाल, शिवकुमार, सुरेंद्र कुमार वत्स आदि मौजूद रहे।
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