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विरोध-समर्थन के बीच जीएसटी में दो दिन शेष
Updated Thu, 29 Jun 2017 01:23 AM IST
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विरोध-समर्थन के बीच जीएसटी में दो दिन शेष
मुजफ्फरनगर। व्यापारियों के विरोध और समर्थन के बीच दो दिन बाद जीएसटी लागू हो जाएगा। वाणिज्य कर विभाग के अफसर जहां जीएसटी की पूरी तैयारी की बात कर रहे हैं और माइग्रेट हो चुके व्यापारियों को सर्टिफिकेट वितरित कर रहे हैं, वहीं कुछ व्यापारी संगठन खुला विरोध कर रहे हैं।
जीएसटी को लेकर कपड़ा व्यापारी विरोध में उतरे हैं। उनका कहना है कि देश की आजादी के बाद पहली बार कपड़े पर टैक्स लग रहा है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने भी जीएसटी का विरोध किया है और तीस जून के भारत में बंद में सहयोग की घोषणा की है। संगठन के अजय सिंघल का कहना है कि जीएसटी को एक सूत्रीय, सरल और पारदर्शी बनाया जाए। ई-वेबिल व्यापारी पर लागू नहीं होना चाहिए। महीने में तीन रिटर्न के स्थान पर एक त्रैमासिक रिटर्न हो। ऑनलाइन रिटर्न की बाध्यता समाप्त हो। दी गुड खांडसारी एंड गे्रन मर्चेंटस एसोसिएशन ने भी जीएसटी का विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल का कहना है कि मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए। किसी व्यापारी से माल खरीदने पर जीएसटी देने की जिम्मेदारी खरीदार की न हो। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार आधी अधूरी तैयारियों में जीएसटी लागू कर रही है।
दूसरी तरफ वाणिज्यक कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर केएम मिश्रा का कहना है कि विभाग ने अपनी सभी तैयारी पूरी कर ली है। जो व्यापारी जीएसटी मायग्रेट हो चुके हैं, उनके ई-मेल के माध्यम से सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। जीएसटी को लेकर व्यापारियों को समझाने और प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पांच हेल्प डेस्क बनाई गई है। इन हेल्प डेस्क पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक अधिकारी बैठ रहे हैं। व्यापारियों को इसके अलावा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्हें मोटिवेट किया जा रहा है। जो व्यापारी अभी तक रजिस्ट्रड नहीं है उन्हें समझाया जा रहा है।
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मुजफ्फरनगर। व्यापारियों के विरोध और समर्थन के बीच दो दिन बाद जीएसटी लागू हो जाएगा। वाणिज्य कर विभाग के अफसर जहां जीएसटी की पूरी तैयारी की बात कर रहे हैं और माइग्रेट हो चुके व्यापारियों को सर्टिफिकेट वितरित कर रहे हैं, वहीं कुछ व्यापारी संगठन खुला विरोध कर रहे हैं।
जीएसटी को लेकर कपड़ा व्यापारी विरोध में उतरे हैं। उनका कहना है कि देश की आजादी के बाद पहली बार कपड़े पर टैक्स लग रहा है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने भी जीएसटी का विरोध किया है और तीस जून के भारत में बंद में सहयोग की घोषणा की है। संगठन के अजय सिंघल का कहना है कि जीएसटी को एक सूत्रीय, सरल और पारदर्शी बनाया जाए। ई-वेबिल व्यापारी पर लागू नहीं होना चाहिए। महीने में तीन रिटर्न के स्थान पर एक त्रैमासिक रिटर्न हो। ऑनलाइन रिटर्न की बाध्यता समाप्त हो। दी गुड खांडसारी एंड गे्रन मर्चेंटस एसोसिएशन ने भी जीएसटी का विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल का कहना है कि मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए। किसी व्यापारी से माल खरीदने पर जीएसटी देने की जिम्मेदारी खरीदार की न हो। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार आधी अधूरी तैयारियों में जीएसटी लागू कर रही है।
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दूसरी तरफ वाणिज्यक कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर केएम मिश्रा का कहना है कि विभाग ने अपनी सभी तैयारी पूरी कर ली है। जो व्यापारी जीएसटी मायग्रेट हो चुके हैं, उनके ई-मेल के माध्यम से सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। जीएसटी को लेकर व्यापारियों को समझाने और प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पांच हेल्प डेस्क बनाई गई है। इन हेल्प डेस्क पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक अधिकारी बैठ रहे हैं। व्यापारियों को इसके अलावा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्हें मोटिवेट किया जा रहा है। जो व्यापारी अभी तक रजिस्ट्रड नहीं है उन्हें समझाया जा रहा है।
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