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Muzaffarnagar News: सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए 3.57 लाख मामले

Sun, 14 Dec 2025 01:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Dec 2025 01:08 AM IST
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3.57 lakh cases resolved on the basis of conciliation agreement
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए सुलभ न्याय देने के लिए अलग-अलग न्यायालयों के प्रकरणों का निस्तारण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सीताराम ने बताया कि कुल तीन लाख 57 हजार 954 प्रकरण निस्तारित किए गए।
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जनपद न्यायालय में लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश खलीकुज्जमां ने पारिवारिक मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने पर बल दिया। अदालत में पारिवारिक न्यायालयों की ओर से 67 मामलों का सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।
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लोक अदालत के नोडल अधिकारी अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि विवादों को सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित कराने का यह बहुत बड़ा माध्यम है। त्वरित न्याय प्राप्त करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है।
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पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण आदेश नैन के कुल 73 वादों का निस्तारण कराया। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों में कुल 6306 समनीय फौजदारी एवं 47 दीवानी यादों का निस्तारण किया गया।
राजस्व अधिकारियों ने कुल 16,331 राजस्व मामलों का निस्तारण कर कर राजस्व वसूला। विभिन्न बैंकों के 731 बैंक ऋण मामले निस्तारण कराए गए।
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इनसेट
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर अपर जिला जज विष्णु चंद्र वैश्य, अपर जिला जज आशा रानी सिंह, सीताराम, कनिष्क कुमार सिंह, काशिफ शेख, जिला बार संघ के अध्यक्ष ठाकुर कंवरपाल सिंह, महासचिव चंद्रवीर सिंह निर्वाल, सिविल बार संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार मित्तल, महासचिव राज सिंह रावत, रीमा मल्होत्रा, अलका भारती मौजूद रहीं।

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लोक अदालत में फैसलों से हार-जीत नहीं : बीरेंद्र सिंह
जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि लोक अदालत में होने वाले फैसले में हार-जीत का कोई प्रश्न नहीं रह जाता है, क्योंकि जब वादकारी आपसी समझौते के आधार पर वाद का निस्तारण करते हैं तो उनके मध्य आपसी सौहार्द बना रहता है। समय की बचत भी होती है। लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य वादकारियों को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय प्रदान करना है। बैंक अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया कि वह ऋण के मामलों में ग्राहकों को अधिकतम छूट देते हुए प्रकरणों का निस्तारण करना सुनिश्चित करें।
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