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भगवान को खोजो मत, वह सर्वव्यापी है-महाराज
Updated Tue, 15 May 2018 12:28 AM IST
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मोरना। भागवत उद्गम स्थल शुक्रताल में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा के समापन पर स्वामी किरीट भाई महाराज ने कहा कि ग्राम के ऋण से मुक्त नि:स्वार्थ सेवा करो। दुनिया में सभी जगह पर भगवान का वास होता है। भगवान को खोजो मत, वह सर्वव्यापी है। आप धर्म का आचरण करो, आपका कोई दुश्मन नहीं होगा।
शुक्रताल स्थित हनुमत धाम में कथा के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि बिना मेहनत किए कमाया पैसा दुखदाई होता है। नित्य पाठ करो भक्ति की प्राप्ति के लिए स्वभाव को सुधारों। तीर्थ यात्रा करो, रास्ते में नदियों जलाशयों को प्रणाम करो। तप कभी खाली नहीं जाता। भौतिक वाद कुछ हद तक ठीक है, जीवन में सुख आए तो ज्यादा उछल कूद मत करना। सुख भोगने से दु:ख का नाश नहीं होता। भोगियों को समस्त चीज मिल जाए तो तृप्ति नहीं होती है। ध्यान, धारण और समाधि लगाने से शरीर के अंदर से ओम का स्वर आना शुरू हो जाता है। योगियों को परमात्मा के विभिन्न प्रकार के रंगों में दर्शन होता है। विषय भोगों में मानव को त्याग करना चाहिए। नारी के चरित्र को देव भी आज तक नहीं समझ पाए हैं। मनुष्य ने बोलना सीख लिया है, जो नहीं बोलना है। कोई भी कर्म करो, शुद्ध होकर करो। जो लोग शिक्षा, स्कूल, हॉस्पिटल आदि से मानव जाति की सेवा करते हो, वही लोग वास्तव में महापुरुष होते हैं। मोक्ष तब मिलता है, जब पाप और पुण्य बराबर हो। इच्छा दुख की जननी है, अनुकूलता हो तब भजन करो। कथा के समापन पर महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कथा व्यास को राम भगत हनुमान की प्रतिमा भेंट की। कथा के आयोजन में नरेश मित्तल, सुरेश मित्तल देहरादून ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं कथा सुनने लिए पंजाब हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान आदि से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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शुक्रताल स्थित हनुमत धाम में कथा के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि बिना मेहनत किए कमाया पैसा दुखदाई होता है। नित्य पाठ करो भक्ति की प्राप्ति के लिए स्वभाव को सुधारों। तीर्थ यात्रा करो, रास्ते में नदियों जलाशयों को प्रणाम करो। तप कभी खाली नहीं जाता। भौतिक वाद कुछ हद तक ठीक है, जीवन में सुख आए तो ज्यादा उछल कूद मत करना। सुख भोगने से दु:ख का नाश नहीं होता। भोगियों को समस्त चीज मिल जाए तो तृप्ति नहीं होती है। ध्यान, धारण और समाधि लगाने से शरीर के अंदर से ओम का स्वर आना शुरू हो जाता है। योगियों को परमात्मा के विभिन्न प्रकार के रंगों में दर्शन होता है। विषय भोगों में मानव को त्याग करना चाहिए। नारी के चरित्र को देव भी आज तक नहीं समझ पाए हैं। मनुष्य ने बोलना सीख लिया है, जो नहीं बोलना है। कोई भी कर्म करो, शुद्ध होकर करो। जो लोग शिक्षा, स्कूल, हॉस्पिटल आदि से मानव जाति की सेवा करते हो, वही लोग वास्तव में महापुरुष होते हैं। मोक्ष तब मिलता है, जब पाप और पुण्य बराबर हो। इच्छा दुख की जननी है, अनुकूलता हो तब भजन करो। कथा के समापन पर महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कथा व्यास को राम भगत हनुमान की प्रतिमा भेंट की। कथा के आयोजन में नरेश मित्तल, सुरेश मित्तल देहरादून ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं कथा सुनने लिए पंजाब हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान आदि से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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