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भक्ति से ही ज्ञान सफल होता है: आचार्य हरितीर्थ
Updated Wed, 27 Dec 2017 12:25 AM IST
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मोरना (मुजफ्फरनगर)।
धर्मनगरी स्थित श्री विश्वकर्मा धर्मशाला में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा में श्री आचार्य हरितीर्थ महाराज ने कहा कि भक्ति से ही ज्ञान सफल होता है। जिसको भगवान के स्वरूप का ज्ञान हुआ, वह भगवान की भक्ति किए बिना नहीं रह सकता। भक्ति से मरण सुधरता है। इससे पूर्व स्वामी जी ने शुकदेव आश्रम में शिक्षाऋषि ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की और महाभारत कालीन प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर सप्तऋषि श्री कृष्ण भगवान मंदिर के दर्शन किए। इस मौके पर स्वामी ओमानंद जी महाराज से धर्मपरायण पर चर्चा की।
भागवत उद्गम स्थल के रूप में विख्यात शुक्रताल में श्री मध्वहरि संप्रदाय वृंदावन मठ संस्थान हाल पलवल हरियाणा से पधारे स्वामी हरितीर्थ महाराज ने कहा कि पाप को कभी छिपाना नहीं चाहिए। जो पाप को छिपाता है, उसके मन में पाप घर करता है और फिर से पाप करता है। जिस दिन पाप हो, उसी दिन साधु-संतों को बुलाओ, पूजा करो। पाप को प्रकट करने से पाप से मुक्ति मिलती है। जगत में गुरु जल्दी मिलते हैं, सद्गुरु देव के दर्शन जल्दी नहीं होते हैं। शब्द से जो ज्ञान का उपदेश करता है, उसको गुरु कहते हैं। सद्गुरु वह है, जो सर्वकाल और सर्वमे सत्परमात्मा का दर्शन करता है। ओम, तत् और सत्, ये तीन भगवान के नाम हैं। पाप से मरण बिगड़ता है। साधारण पाप मानव करता है। भगवान बड़े उदार हैं, क्षमा कर देते हैं। आप बहुत प्रेम से भागवत कथा को सुनते हो, भगवान के नाम का जाप करते हो। भगवान की कथा में भगवान के नाम में पाप को नष्ट करने की शक्ति है। आपके पाप का स्वयं नाश हो रहा है। लोग यात्रा करने के लिए जाते हैं। तब मार्ग में धर्मशाला में एक या दो दिन के लिए रुक जाते हैं। जब वे जानते हैं कि घर तो जाना है। घर भी धर्मशाला जैसा है। एक दिन छोड़ना तो पड़ेगा ही। मानव को घर में भक्ति कर मुक्ति के लिए सावधान रहना चाहिए। आपका घर भगवान के चरणों में है। वहीं, जगतगुरु चैतन्य तीर्थ महाराज पीठाधीश्वर हंस तीर्थ के सानिध्य में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्मलाभ कमाया। कथा का संचालन आचार्य ज्ञान हरितीर्थ महाराज ने किया। कथा के आयोजन में जयचंद्र भदौरिया इटावा, सरला बुआजी, संदीप राणा आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। कथा सुनने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान पलवल, इटावा रामगढ़, मथुरा, जटटारी, अलवर, गुजरात आदि से श्रद्धालुगण आए हैं। इस मौके पर भंडारे के प्रसाद का वितरण भी किया गया।
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धर्मनगरी स्थित श्री विश्वकर्मा धर्मशाला में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा में श्री आचार्य हरितीर्थ महाराज ने कहा कि भक्ति से ही ज्ञान सफल होता है। जिसको भगवान के स्वरूप का ज्ञान हुआ, वह भगवान की भक्ति किए बिना नहीं रह सकता। भक्ति से मरण सुधरता है। इससे पूर्व स्वामी जी ने शुकदेव आश्रम में शिक्षाऋषि ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की और महाभारत कालीन प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर सप्तऋषि श्री कृष्ण भगवान मंदिर के दर्शन किए। इस मौके पर स्वामी ओमानंद जी महाराज से धर्मपरायण पर चर्चा की।
भागवत उद्गम स्थल के रूप में विख्यात शुक्रताल में श्री मध्वहरि संप्रदाय वृंदावन मठ संस्थान हाल पलवल हरियाणा से पधारे स्वामी हरितीर्थ महाराज ने कहा कि पाप को कभी छिपाना नहीं चाहिए। जो पाप को छिपाता है, उसके मन में पाप घर करता है और फिर से पाप करता है। जिस दिन पाप हो, उसी दिन साधु-संतों को बुलाओ, पूजा करो। पाप को प्रकट करने से पाप से मुक्ति मिलती है। जगत में गुरु जल्दी मिलते हैं, सद्गुरु देव के दर्शन जल्दी नहीं होते हैं। शब्द से जो ज्ञान का उपदेश करता है, उसको गुरु कहते हैं। सद्गुरु वह है, जो सर्वकाल और सर्वमे सत्परमात्मा का दर्शन करता है। ओम, तत् और सत्, ये तीन भगवान के नाम हैं। पाप से मरण बिगड़ता है। साधारण पाप मानव करता है। भगवान बड़े उदार हैं, क्षमा कर देते हैं। आप बहुत प्रेम से भागवत कथा को सुनते हो, भगवान के नाम का जाप करते हो। भगवान की कथा में भगवान के नाम में पाप को नष्ट करने की शक्ति है। आपके पाप का स्वयं नाश हो रहा है। लोग यात्रा करने के लिए जाते हैं। तब मार्ग में धर्मशाला में एक या दो दिन के लिए रुक जाते हैं। जब वे जानते हैं कि घर तो जाना है। घर भी धर्मशाला जैसा है। एक दिन छोड़ना तो पड़ेगा ही। मानव को घर में भक्ति कर मुक्ति के लिए सावधान रहना चाहिए। आपका घर भगवान के चरणों में है। वहीं, जगतगुरु चैतन्य तीर्थ महाराज पीठाधीश्वर हंस तीर्थ के सानिध्य में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्मलाभ कमाया। कथा का संचालन आचार्य ज्ञान हरितीर्थ महाराज ने किया। कथा के आयोजन में जयचंद्र भदौरिया इटावा, सरला बुआजी, संदीप राणा आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। कथा सुनने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान पलवल, इटावा रामगढ़, मथुरा, जटटारी, अलवर, गुजरात आदि से श्रद्धालुगण आए हैं। इस मौके पर भंडारे के प्रसाद का वितरण भी किया गया।
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