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इबादतगाहों में अब नहीं गूंजती आयतें-अजान
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:51 AM IST
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इबादतगाहों में अब नहीं गूंजती आयतें-अजान
मुजफ्फरनगर। सात सितंबर को शाम होते-होते तमाम परिवारों की दुनिया उजड़ गई। चारों तरफ कत्ल-ए-आम का शोर और बेबस जिंदगियां सहारे की तलाश में पनाह मांग रही थीं। उन्माद से कई गांवों की गलियों और इबादतगाह आज भी वीरान हैं। यहां अब न तो आयतों का शोर सुनाई पड़ता है और न ही अजान के बोल गूंजते हैं। दंगाइयों ने आशियानों के साथ ही वाहनों और धर्मस्थलों को भी निशाना बनाया था।
दंगाइयों की भीड़ द्वारा किए गए नुकसान का आकलन प्रशासनिक मशीनरियों ने कर लिया, लेकिन हिंसा में तबाह हुई जिंदगियों का हिसाब कैसे चुकाए जाए, यह आज भी पहेली बना हुआ है। वक्त के साथ तस्वीरें भले ही धुंधली हो गई हों, लेकिन जख्म आज भी हरे हैं। सात सितंबर को भड़की हिंसा में दंगाइयों ने दो-तीन घंटे के भीतर ही करोड़ों का नुकसान कर दिया। भीड़ की शक्ल में आए उन्मादियों ने जानसठ क्षेत्र में 6.20 लाख रुपये की कीमत के वाहन फूंके, जबकि बुढ़ाना के सात गांवों में 6,43,500 रुपये का धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया। सदर तहसील में धार्मिक स्थलों में 95 हजार की क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा भी बुढ़ाना, जानसठ, खतौली, सदर में लोगों की करीब 1, 30,92,500 रुपये की चल-अचल संपत्ति को फूंक दिया।
सात सिंतबर को प्रशासन ने भड़की हिंसा में करीब एक करोड़ 44 लाख 51 हजार रुपये की क्षति का आकलन किया। हिंसा में निशाना बनाए गए धार्मिक स्थल आज भी वीरान अवस्था में पड़े हैं। भौराकलां के गांव मोहम्मदपुर और शाहपुर के गांव कुटबा की मस्जिदों में पिछले चार साल से परिंदा भी पर मारने नहीं पहुंचा। इसके अलावा भी फुगाना, काकड़ा, हलौली, खरड़, मुंडभर समेत कई गांवों में इबादतगाहों के दरवाजों पर ताले पड़े हैं। दंगे की दहशत से यहां विस्थापित लोग अपने गांवों में नहीं लौट सके।
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मुजफ्फरनगर। सात सितंबर को शाम होते-होते तमाम परिवारों की दुनिया उजड़ गई। चारों तरफ कत्ल-ए-आम का शोर और बेबस जिंदगियां सहारे की तलाश में पनाह मांग रही थीं। उन्माद से कई गांवों की गलियों और इबादतगाह आज भी वीरान हैं। यहां अब न तो आयतों का शोर सुनाई पड़ता है और न ही अजान के बोल गूंजते हैं। दंगाइयों ने आशियानों के साथ ही वाहनों और धर्मस्थलों को भी निशाना बनाया था।
दंगाइयों की भीड़ द्वारा किए गए नुकसान का आकलन प्रशासनिक मशीनरियों ने कर लिया, लेकिन हिंसा में तबाह हुई जिंदगियों का हिसाब कैसे चुकाए जाए, यह आज भी पहेली बना हुआ है। वक्त के साथ तस्वीरें भले ही धुंधली हो गई हों, लेकिन जख्म आज भी हरे हैं। सात सितंबर को भड़की हिंसा में दंगाइयों ने दो-तीन घंटे के भीतर ही करोड़ों का नुकसान कर दिया। भीड़ की शक्ल में आए उन्मादियों ने जानसठ क्षेत्र में 6.20 लाख रुपये की कीमत के वाहन फूंके, जबकि बुढ़ाना के सात गांवों में 6,43,500 रुपये का धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया। सदर तहसील में धार्मिक स्थलों में 95 हजार की क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा भी बुढ़ाना, जानसठ, खतौली, सदर में लोगों की करीब 1, 30,92,500 रुपये की चल-अचल संपत्ति को फूंक दिया।
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सात सिंतबर को प्रशासन ने भड़की हिंसा में करीब एक करोड़ 44 लाख 51 हजार रुपये की क्षति का आकलन किया। हिंसा में निशाना बनाए गए धार्मिक स्थल आज भी वीरान अवस्था में पड़े हैं। भौराकलां के गांव मोहम्मदपुर और शाहपुर के गांव कुटबा की मस्जिदों में पिछले चार साल से परिंदा भी पर मारने नहीं पहुंचा। इसके अलावा भी फुगाना, काकड़ा, हलौली, खरड़, मुंडभर समेत कई गांवों में इबादतगाहों के दरवाजों पर ताले पड़े हैं। दंगे की दहशत से यहां विस्थापित लोग अपने गांवों में नहीं लौट सके।
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