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जमीं के जर्रे भी अपना मकाम रखते हैं
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फलक की गोद में तारों का कारवां ही सही...
खतौली। निदा-ए- गजल उर्दू सोसायटी की ओर से मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने मौजूदा हालात पर तंज कसे।
नई आबादी में मौलाना मोहम्मद अली जौहर के आवास पर आयोजित नशिस्त का आगाज फरीजा रजा खतौलवी की पाक-ए नात से हुआ। काजी उमेर साहिर ने कलाम सुनाया कि जमीं के जर्रे भी अपना मकाम रखते हैं, फलक की गोद में तारों का कारवां ही सही। जईम हसन कादरी ने सुनाया जबाने तो शोले उगलने लगी, जईम अब यहां खुश बयां ढूंढते हो। अमीरुददीन अमीर का कलाम-जब किसी शख्स को दौलत पे गुमान होता है, मुफलिसों का उन्हें अहसास कहां होता है। इनके अलावा सलमान हसन, डा. असलम, तंजीम अख्तर, अमजद सैफी, इकबाल गौहर, कारी अतीकुर्रहमान, आस मोहम्मद फातमी, डा. अहतशम सिद्दीकी ने भी अपना कलाम पेश किया। अध्यक्षता बिजनौर नगीना से आए शायर डॉ. मोहम्मद दाउद ने की। सरपरस्त .डा अहतशाम उल हक सिद्दीकी, कारी अतीकुर्रहमान रहे।
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खतौली। निदा-ए- गजल उर्दू सोसायटी की ओर से मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने मौजूदा हालात पर तंज कसे।
नई आबादी में मौलाना मोहम्मद अली जौहर के आवास पर आयोजित नशिस्त का आगाज फरीजा रजा खतौलवी की पाक-ए नात से हुआ। काजी उमेर साहिर ने कलाम सुनाया कि जमीं के जर्रे भी अपना मकाम रखते हैं, फलक की गोद में तारों का कारवां ही सही। जईम हसन कादरी ने सुनाया जबाने तो शोले उगलने लगी, जईम अब यहां खुश बयां ढूंढते हो। अमीरुददीन अमीर का कलाम-जब किसी शख्स को दौलत पे गुमान होता है, मुफलिसों का उन्हें अहसास कहां होता है। इनके अलावा सलमान हसन, डा. असलम, तंजीम अख्तर, अमजद सैफी, इकबाल गौहर, कारी अतीकुर्रहमान, आस मोहम्मद फातमी, डा. अहतशम सिद्दीकी ने भी अपना कलाम पेश किया। अध्यक्षता बिजनौर नगीना से आए शायर डॉ. मोहम्मद दाउद ने की। सरपरस्त .डा अहतशाम उल हक सिद्दीकी, कारी अतीकुर्रहमान रहे।