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यज्ञोपवीत संस्कार से आत्मोन्नति: ओमानंद
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:40 AM IST
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यज्ञोपवीत संस्कार से आत्मोन्नति: ओमानंद
मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के नव प्रविष्ट 30 विद्यार्थियों का विधि विधान से यज्ञोपवीत संस्कार किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार विद्यार्थी को जीवन के उद्देश्यों का बोध कराता है।
शुकदेव संस्कृत विद्यालय के नव प्रविष्ट विद्यार्थियों ने वेद मंत्रों के साथ यज्ञ और पूजन किया। अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा और शुकदेव मंदिर में आराधना की। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को सदाचरण और आदर्शों की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय प्राचीन वैदिक सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों में यज्ञोपवीत सर्वश्रेष्ठ संस्कार है। विद्यार्थी को वेदादि अध्ययन का अधिकार मिलता है और जीवन को उन्नति के उच्च शिखर पर ले जाने की प्रेरणा मिलती है। यज्ञोपवीत उज्ज्वल भविष्य का संस्कार है, जो सोई सात्विक प्रवृत्तियों को जागता है। अध्यात्म और सतकर्म का मार्ग प्रशस्त करता है। दुष्प्रवृत्तियों को त्यागने, सदगुणों को ग्रहण करने तथा आत्म उन्नति का साधन है। प्रधानाचार्य ज्ञान प्रसाद ने कहा कि ब्रहमचारी यज्ञोपवीत के नियमों और मूल्यों को जीवन व्यवहार में धारण करें। देश के अलग-अलग राज्य के शिक्षार्थी बच्चों को फल, मिष्ठान आदि भेंट किया गया। आचार्य गिरीश चंद उप्रेति, प्रदीप शर्मा, श्यामाचार्य आदि मौजूद रहे।
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मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के नव प्रविष्ट 30 विद्यार्थियों का विधि विधान से यज्ञोपवीत संस्कार किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार विद्यार्थी को जीवन के उद्देश्यों का बोध कराता है।
शुकदेव संस्कृत विद्यालय के नव प्रविष्ट विद्यार्थियों ने वेद मंत्रों के साथ यज्ञ और पूजन किया। अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा और शुकदेव मंदिर में आराधना की। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को सदाचरण और आदर्शों की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय प्राचीन वैदिक सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों में यज्ञोपवीत सर्वश्रेष्ठ संस्कार है। विद्यार्थी को वेदादि अध्ययन का अधिकार मिलता है और जीवन को उन्नति के उच्च शिखर पर ले जाने की प्रेरणा मिलती है। यज्ञोपवीत उज्ज्वल भविष्य का संस्कार है, जो सोई सात्विक प्रवृत्तियों को जागता है। अध्यात्म और सतकर्म का मार्ग प्रशस्त करता है। दुष्प्रवृत्तियों को त्यागने, सदगुणों को ग्रहण करने तथा आत्म उन्नति का साधन है। प्रधानाचार्य ज्ञान प्रसाद ने कहा कि ब्रहमचारी यज्ञोपवीत के नियमों और मूल्यों को जीवन व्यवहार में धारण करें। देश के अलग-अलग राज्य के शिक्षार्थी बच्चों को फल, मिष्ठान आदि भेंट किया गया। आचार्य गिरीश चंद उप्रेति, प्रदीप शर्मा, श्यामाचार्य आदि मौजूद रहे।
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