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दु:खों के भंवर में फंसा निसार व ताजिम का परिवार
Updated Tue, 26 Jun 2018 01:00 AM IST
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दुखों के भंवर में फंसा निसार व ताजिम का परिवार
मुजफ्फरनगर। सरवट में कबाड़ी की दुकान पर हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले निसार व ताजिम का परिवार दुखों के भंवर में फंस गया है। दोनों परिवारों के कुल नौ बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद उनका भविष्य भी दांव पर लग गया है। वहीं, मेरठ के हॉस्पिटल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे यूसुफ के आठ बच्चे भी गमजदा हैं, जो रो-रोकर पिता की जिंदगी की भीख मांग रहे हैं।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के सरवट निवासी निसार ने करीब दो माह पूर्व ही नवाजिश के मकान के बाहरी हिस्से में खाली पड़ी दो दुकानों को किराये पर लेकर कबाड़ का काम शुरू किया था। उस समय किसी को नहीं पता था कि महज दो माह में ही निसार को यूं मौत अपना शिकार बना लेगी। निसार के परिवार में पत्नी व पांच बच्चे हैं, जो मुखिया की असमय मौत के बाद गम व दुखों के भंवर में फंस गए हैं। इसी तरह, नवाजिश के पड़ोस में स्थित दुकानों में वेल्डिंग का काम करने वाले इंदिरा कॉलोनी निवासी ताजिम के चार बच्चे हैं, जिनके सिर से एक झटके में पिता का साया उठ गया है। ताजिम भी अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था, जिसकी मौत के बाद उसका परिवार भी बेसहारा हो गया है। इनके अलावा, विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए यूसुफ की हादसे में एक आंख पूरी तरह से उड़ चुकी है, जिसके चलते वह मेरठ के हॉस्पिटल में जिंदगी व मौत के बीच झूल रहा है। यूसुफ के परिवार में पत्नी के साथ आठ बच्चे हैं, जो रो-रोकर पिता की सलामती के लिए दुआ मांग रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर। सरवट में कबाड़ी की दुकान पर हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले निसार व ताजिम का परिवार दुखों के भंवर में फंस गया है। दोनों परिवारों के कुल नौ बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद उनका भविष्य भी दांव पर लग गया है। वहीं, मेरठ के हॉस्पिटल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे यूसुफ के आठ बच्चे भी गमजदा हैं, जो रो-रोकर पिता की जिंदगी की भीख मांग रहे हैं।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के सरवट निवासी निसार ने करीब दो माह पूर्व ही नवाजिश के मकान के बाहरी हिस्से में खाली पड़ी दो दुकानों को किराये पर लेकर कबाड़ का काम शुरू किया था। उस समय किसी को नहीं पता था कि महज दो माह में ही निसार को यूं मौत अपना शिकार बना लेगी। निसार के परिवार में पत्नी व पांच बच्चे हैं, जो मुखिया की असमय मौत के बाद गम व दुखों के भंवर में फंस गए हैं। इसी तरह, नवाजिश के पड़ोस में स्थित दुकानों में वेल्डिंग का काम करने वाले इंदिरा कॉलोनी निवासी ताजिम के चार बच्चे हैं, जिनके सिर से एक झटके में पिता का साया उठ गया है। ताजिम भी अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था, जिसकी मौत के बाद उसका परिवार भी बेसहारा हो गया है। इनके अलावा, विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए यूसुफ की हादसे में एक आंख पूरी तरह से उड़ चुकी है, जिसके चलते वह मेरठ के हॉस्पिटल में जिंदगी व मौत के बीच झूल रहा है। यूसुफ के परिवार में पत्नी के साथ आठ बच्चे हैं, जो रो-रोकर पिता की सलामती के लिए दुआ मांग रहे हैं।
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