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पराली-कूड़ा जलाने पर रोक लगने से बनेगी बात
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:38 AM IST
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आने वाले दिनों में शहर को परेशान करेगा स्मॉग
मुजफ्फरनगर। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने किसानों के पुराल जलाने, नगरीय क्षेत्रों में कूड़ा जलाए जाने पर रोक लगाई है। इसके लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश किया गया है। बोर्ड अफसरों के सामने समस्या है कि किसानों की तादात अधिक है। एक साथ सब पर नजर नहीं रखी जा सकती है, जबकि नगर क्षेत्र में कूड़ा जलने से रोकने लिए पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अकेले चौकसी रखने से हाथ खड़े किए हैं।
एनसीआर में बढ़े प्रदूषण के कारण स्थिति बेकाबू रही है। स्मॉग और कोहर के साथ जहरीले पार्टिकुलेट मैटर हवा में घूम रहे हैं, जिससे सांस के रोगियों को अधिक परेशानी बन रही है। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एनसीआर में किसानों के पुराल जलाने और शहर-नगर क्षेत्रों में कूड़ा जलाने पर पाबंदी लगाई है। इससे प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ रहा है। इसको लेकर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देशित किया गया है। एनजीटी के आदेश आने पर बोर्ड के अफसरों ने कार्रवाई की रूपरेखा बनाई है। हालांकि जनपद में किसानों की संख्या अधिक है। जिसके चलते बोर्ड अकेले कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसको लेकर क्षेत्रीय बोर्ड अफसरों ने कृषि विभाग और नगर पालिका से सहयोग मांगा है, ताकि प्रदूषण की मात्रा में कमी की जा सके। अवर अभियंता विपुल कुमार ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर किसानों के पुराल जलाने पर रोक लगाई गई है। इसके लिए कृषि विभाग को भी सहयोग करना होगा, तभी यह कार्रवाई संभव है। इंडस्ट्रियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन किसानों पर कार्रवाई के लिए कृषि विभाग को देखना होगा।
कृषि अपशिष्ट जलाने पर
होगी कार्रवाई: डीएम
मुजफ्फरनगर। बढ़ते प्रदूषण को लेकर डीएम जीएस प्रियदर्शी ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा कि खेतों में धान, गन्ने एवं गेहूं समेत अन्य फसलों के कृषि अपशिष्टों को जलाए जाने पर रोक है। जांच पड़ताल के दौरान यह चीजें खेतों में जलती मिली तो कार्रवाई होगी।
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डीएम ने कहा कि कृषि अपशिष्ट जलाए जाने के कारण वातावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ फसलों के मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने किसानों को कृषि अपशिष्ट नहीं जलाकर उससे कम्पोस्ट खाद बनाकर प्रयोग करने का आग्रह किया है। ताकि भूमि की उर्वरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहयोग मिल सके। उधर, डीएम ने खेतों में अवशेष जलाने की लगातार दो घटनाएं मिलने पर संबंधित किसान मिलने वाले अनुदान आदि वंचित कर दिए जाने की चेतावनी दी।
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मुजफ्फरनगर। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने किसानों के पुराल जलाने, नगरीय क्षेत्रों में कूड़ा जलाए जाने पर रोक लगाई है। इसके लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश किया गया है। बोर्ड अफसरों के सामने समस्या है कि किसानों की तादात अधिक है। एक साथ सब पर नजर नहीं रखी जा सकती है, जबकि नगर क्षेत्र में कूड़ा जलने से रोकने लिए पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अकेले चौकसी रखने से हाथ खड़े किए हैं।
एनसीआर में बढ़े प्रदूषण के कारण स्थिति बेकाबू रही है। स्मॉग और कोहर के साथ जहरीले पार्टिकुलेट मैटर हवा में घूम रहे हैं, जिससे सांस के रोगियों को अधिक परेशानी बन रही है। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एनसीआर में किसानों के पुराल जलाने और शहर-नगर क्षेत्रों में कूड़ा जलाने पर पाबंदी लगाई है। इससे प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ रहा है। इसको लेकर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देशित किया गया है। एनजीटी के आदेश आने पर बोर्ड के अफसरों ने कार्रवाई की रूपरेखा बनाई है। हालांकि जनपद में किसानों की संख्या अधिक है। जिसके चलते बोर्ड अकेले कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसको लेकर क्षेत्रीय बोर्ड अफसरों ने कृषि विभाग और नगर पालिका से सहयोग मांगा है, ताकि प्रदूषण की मात्रा में कमी की जा सके। अवर अभियंता विपुल कुमार ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर किसानों के पुराल जलाने पर रोक लगाई गई है। इसके लिए कृषि विभाग को भी सहयोग करना होगा, तभी यह कार्रवाई संभव है। इंडस्ट्रियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन किसानों पर कार्रवाई के लिए कृषि विभाग को देखना होगा।
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कृषि अपशिष्ट जलाने पर
होगी कार्रवाई: डीएम
मुजफ्फरनगर। बढ़ते प्रदूषण को लेकर डीएम जीएस प्रियदर्शी ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा कि खेतों में धान, गन्ने एवं गेहूं समेत अन्य फसलों के कृषि अपशिष्टों को जलाए जाने पर रोक है। जांच पड़ताल के दौरान यह चीजें खेतों में जलती मिली तो कार्रवाई होगी।
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डीएम ने कहा कि कृषि अपशिष्ट जलाए जाने के कारण वातावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ फसलों के मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने किसानों को कृषि अपशिष्ट नहीं जलाकर उससे कम्पोस्ट खाद बनाकर प्रयोग करने का आग्रह किया है। ताकि भूमि की उर्वरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहयोग मिल सके। उधर, डीएम ने खेतों में अवशेष जलाने की लगातार दो घटनाएं मिलने पर संबंधित किसान मिलने वाले अनुदान आदि वंचित कर दिए जाने की चेतावनी दी।
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