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म्हाड़ी पर 11 सितंबर को मत्था टेंकेगे लाखों श्रद्धालु
Updated Mon, 10 Sep 2018 12:47 AM IST
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गांव दूधली में उत्सव जैसा नजारा
चरथावल। ऐतिहासिक गांव दूधली में गोगा म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला 11 सितंबर से शुरू होगा। आस्था और श्रद्धा में बंधे कई प्रांतों के श्रद्धालु मत्था टेकेंगे। दूधली में अतिथि देवो भव की भावना घर-घर में रहती है। मेले की तैयारी जोरों पर है। गांव में उत्सव सा नजारा है।
दूधली गांव में स्थित जाहरवीर गोगा म्हाड़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती है। करीब पांच सौ साल पूर्व इस गांव के मजरे मरूवा आलमगीरपुर के एक किसान भक्त की मन्नत पूरी हुई, तो वह आस्था में वशीभूत होकर अपने यहां जन्मे बछेरे को पैदल बागड़ (राजस्थान) में जाहरवीर को अर्पित करने पहुंच गया। जाहरवीर को खुद प्रकट होने पर ही उसने बछेरा भेंट करने का संकल्प लिया था। मान्यता है कि भक्ति से प्रसन्न होकर जाहरवीर ने खुद प्रकट होकर बछेरा लिया और भक्त किसान को गांव में म्हाड़ी बनाने को पांच ईंट प्रदान की। बुजुर्ग महेंद्र सिंह बताते हैं कि उस वक्त गोगा ने किसान को वचन दिया था कि यदि ईट कहीं भी रख दोगे, तो वहां से उठेगी नहीं। हालांकि किसान उनके वादे को भूल गया और थका होने के कारण दूधली में हुक्का पीने के लिए ईटों की चद्दर रख दी। उसके बाद वहां से ईट नहीं उठी और वहीं म्हाड़ी बनानी पड़ी थी। यही वजह है कि म्हाड़ी की महिमा कई प्रांतों में विख्यात है। हर साल भादो महीने में यहां भव्य मेला सजता है। मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान तक के लाखों श्रद्धालु नतमस्तक होने को आते हैं। हालांकि निशान तो पहले दिन ही चढ़ता है, पर प्रसाद चढ़ाने की परंपरा तीन दिन तक चलती है। गांव में मेहमानों की खातिरदारी की तैयारी कई दिन पहले चालू हो जाती हैं। घर-घर में अधिकांश मेहमानों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। घर-घर में मेहमानों की आवभगत का अनोखा नजारा गांव में नजर आता है। मेले का प्रमुख आकर्षण दंगल रहेगा। यहां दूर प्रांतों के पहलवान जोर आजमाइश कर भरपूर मनोरंजन करेंगे। म्हाड़ी से जुड़े रामकुमार और आदेश कुमार ने बताया है कि मेले के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।
न्यामू में गुरु गोरखनाथ मूर्ति की परिक्रमा
चरथावल। न्यामू गांव में गुरु गोरखनाथ की मूर्ति की परिक्रमा के बाद भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। ढोल नगाड़ों पर श्रद्धालु झूम रहे थे। रविवार को गांव न्यामू में जाहरवीर के बाद उनके गुरु गोरखनाथ की प्राण प्रतिष्ठा विधि विधान से कराई गई। ग्रामीणों ने गांव में म्हाड़ी परिसर में गोरखनाथ की भक्ति में भजन कीर्तन का आयोजन किया। म्हाड़ी पर मेला 14 सितंबर को लगेगा। ओमपाल वाल्मीकि, पंकज त्यागी, सुंदर पांचाल, नरेंद्र जोगी, सचिन त्यागी, सतपाल नायक मौजूद रहे।
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चरथावल। ऐतिहासिक गांव दूधली में गोगा म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला 11 सितंबर से शुरू होगा। आस्था और श्रद्धा में बंधे कई प्रांतों के श्रद्धालु मत्था टेकेंगे। दूधली में अतिथि देवो भव की भावना घर-घर में रहती है। मेले की तैयारी जोरों पर है। गांव में उत्सव सा नजारा है।
दूधली गांव में स्थित जाहरवीर गोगा म्हाड़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती है। करीब पांच सौ साल पूर्व इस गांव के मजरे मरूवा आलमगीरपुर के एक किसान भक्त की मन्नत पूरी हुई, तो वह आस्था में वशीभूत होकर अपने यहां जन्मे बछेरे को पैदल बागड़ (राजस्थान) में जाहरवीर को अर्पित करने पहुंच गया। जाहरवीर को खुद प्रकट होने पर ही उसने बछेरा भेंट करने का संकल्प लिया था। मान्यता है कि भक्ति से प्रसन्न होकर जाहरवीर ने खुद प्रकट होकर बछेरा लिया और भक्त किसान को गांव में म्हाड़ी बनाने को पांच ईंट प्रदान की। बुजुर्ग महेंद्र सिंह बताते हैं कि उस वक्त गोगा ने किसान को वचन दिया था कि यदि ईट कहीं भी रख दोगे, तो वहां से उठेगी नहीं। हालांकि किसान उनके वादे को भूल गया और थका होने के कारण दूधली में हुक्का पीने के लिए ईटों की चद्दर रख दी। उसके बाद वहां से ईट नहीं उठी और वहीं म्हाड़ी बनानी पड़ी थी। यही वजह है कि म्हाड़ी की महिमा कई प्रांतों में विख्यात है। हर साल भादो महीने में यहां भव्य मेला सजता है। मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान तक के लाखों श्रद्धालु नतमस्तक होने को आते हैं। हालांकि निशान तो पहले दिन ही चढ़ता है, पर प्रसाद चढ़ाने की परंपरा तीन दिन तक चलती है। गांव में मेहमानों की खातिरदारी की तैयारी कई दिन पहले चालू हो जाती हैं। घर-घर में अधिकांश मेहमानों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। घर-घर में मेहमानों की आवभगत का अनोखा नजारा गांव में नजर आता है। मेले का प्रमुख आकर्षण दंगल रहेगा। यहां दूर प्रांतों के पहलवान जोर आजमाइश कर भरपूर मनोरंजन करेंगे। म्हाड़ी से जुड़े रामकुमार और आदेश कुमार ने बताया है कि मेले के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।
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न्यामू में गुरु गोरखनाथ मूर्ति की परिक्रमा
चरथावल। न्यामू गांव में गुरु गोरखनाथ की मूर्ति की परिक्रमा के बाद भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। ढोल नगाड़ों पर श्रद्धालु झूम रहे थे। रविवार को गांव न्यामू में जाहरवीर के बाद उनके गुरु गोरखनाथ की प्राण प्रतिष्ठा विधि विधान से कराई गई। ग्रामीणों ने गांव में म्हाड़ी परिसर में गोरखनाथ की भक्ति में भजन कीर्तन का आयोजन किया। म्हाड़ी पर मेला 14 सितंबर को लगेगा। ओमपाल वाल्मीकि, पंकज त्यागी, सुंदर पांचाल, नरेंद्र जोगी, सचिन त्यागी, सतपाल नायक मौजूद रहे।
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