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परमार्थ की शिक्षा देती है भागवत: ओमानंद
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:48 AM IST
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परमार्थ की शिक्षा देती है भागवत: ओमानंद
मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत मानव को परमार्थ की शिक्षा देती है। परिश्रम और पुरुषार्थ से कमाए धन से ही सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शुक्रताल के अखंड धाम में कथा व्यास आचार्य चंद्रसागर की कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओामनंद सरस्वती ने कहा कि भागवत श्रेष्ठता के शिखर पर ले जाती है। परमार्थ की शिक्षा से भक्ति के साथ राष्ट्र को भी समर्पित होने का संदेश देती है। भारतीय संस्कृति सभी को जोड़ती है। भागवत मन में शांति, समाज में सद्भाव और सौहार्द पैदा करती है। समाज में फैली बुराइयों, कुरीतियों पर रोक लगाकर स्वच्छ समाज और सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण में सहयोग करती है। भागवत से वाणी की शुद्धि होती है। वाणी की शुद्धि ही जीवन की असली संपत्ति है। स्वामी ने कहा कि परिश्रम, सच्चाई, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों से प्राप्त धन ही सुख देता है। व्यास पीठ पर आचार्य चंद्रसागर को तिलक कर संत ने आशीर्वाद दिया। यज्ञमान नरेश कुमार ने विधि विधान से पूजन किया। चित्रकूट, अलवर, छत्तीसगढ और दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने भागवत सुनी।
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मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत मानव को परमार्थ की शिक्षा देती है। परिश्रम और पुरुषार्थ से कमाए धन से ही सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शुक्रताल के अखंड धाम में कथा व्यास आचार्य चंद्रसागर की कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओामनंद सरस्वती ने कहा कि भागवत श्रेष्ठता के शिखर पर ले जाती है। परमार्थ की शिक्षा से भक्ति के साथ राष्ट्र को भी समर्पित होने का संदेश देती है। भारतीय संस्कृति सभी को जोड़ती है। भागवत मन में शांति, समाज में सद्भाव और सौहार्द पैदा करती है। समाज में फैली बुराइयों, कुरीतियों पर रोक लगाकर स्वच्छ समाज और सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण में सहयोग करती है। भागवत से वाणी की शुद्धि होती है। वाणी की शुद्धि ही जीवन की असली संपत्ति है। स्वामी ने कहा कि परिश्रम, सच्चाई, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों से प्राप्त धन ही सुख देता है। व्यास पीठ पर आचार्य चंद्रसागर को तिलक कर संत ने आशीर्वाद दिया। यज्ञमान नरेश कुमार ने विधि विधान से पूजन किया। चित्रकूट, अलवर, छत्तीसगढ और दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने भागवत सुनी।
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