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नृत्य नाटिका का भव्य मंचन
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:35 AM IST
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नृत्य नाटिका का शानदार मंचन
खतौली (मुजफ्फरनगर)। पद्म प्रभ जैन मंदिर में अंजू जैन, नैना जैन व रुचि जैन के कुशल मार्गदर्शन में समाज की महिलाओं व बालिकाओं ने अतिशयकारी भक्तामर स्तोत्र पर आधारित नृत्य नाटिका, बंधन से मुक्ति की मनमोहक प्रस्तुति की। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीजी के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन का कार्य श्रेष्ठी श्रावक मृदुला जैन व शशांक महलका परिवार ने किया।
कार्यक्रम नाटिका के प्रारंभ में भक्ति नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण द्वारा धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। आयोजन में समाज की लगभग 80 महिलाओं व युवतियों द्वारा नृत्य के माध्यम से भक्तामर का मानव जीवन में महत्व बताया गया। भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग द्वारा की गई थी। इसका वाचन व अध्ययन मानव जीवन के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। भक्तामर स्तोत्र हमें सिखाता है। धर्म के मार्ग पर चलकर इंद्रियों पर तथा इच्छाओं पर नियंत्रण करके दास्ता के बंधन से मुक्ति मार्ग पर जाना है। चलचित्र के माध्यम से सभी जैन तीर्थों का दर्शन कराया गया। आयोजन में समाज के लोगों की भारी भीड़ रही। परमपूज्य अंतसमती माता जी का आयोजन में मंगल सानिध्य रहा। कार्यक्रम का संचालन अरुण जैन ने किया। मंचन में आंचल, तनीशा, तन्नु, प्रगति, रजनी प्रवक्ता, पिंकी, रिया, पारुल, ज्योति आदि महिलाओं ने प्रस्तुति दी। सूत्रधार की भूमिका निधि जैन ने की। इस अवसर पर रामकुमार, संजय एलजी, रतनलाल, जुगमंदर, सतीश, राकेश अंबर, जनारधन, जयभगवान, पवन, आरडी जैन, डीके जैन, धनेंद्र, पतेंद्र, मुकेश, अजय प्रवक्ता, अकलंक, डा. आशा, सुधीर मुखिया, कल्पेंद्र, अशोक, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। पद्म प्रभ जैन मंदिर में अंजू जैन, नैना जैन व रुचि जैन के कुशल मार्गदर्शन में समाज की महिलाओं व बालिकाओं ने अतिशयकारी भक्तामर स्तोत्र पर आधारित नृत्य नाटिका, बंधन से मुक्ति की मनमोहक प्रस्तुति की। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीजी के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन का कार्य श्रेष्ठी श्रावक मृदुला जैन व शशांक महलका परिवार ने किया।
कार्यक्रम नाटिका के प्रारंभ में भक्ति नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण द्वारा धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। आयोजन में समाज की लगभग 80 महिलाओं व युवतियों द्वारा नृत्य के माध्यम से भक्तामर का मानव जीवन में महत्व बताया गया। भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग द्वारा की गई थी। इसका वाचन व अध्ययन मानव जीवन के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। भक्तामर स्तोत्र हमें सिखाता है। धर्म के मार्ग पर चलकर इंद्रियों पर तथा इच्छाओं पर नियंत्रण करके दास्ता के बंधन से मुक्ति मार्ग पर जाना है। चलचित्र के माध्यम से सभी जैन तीर्थों का दर्शन कराया गया। आयोजन में समाज के लोगों की भारी भीड़ रही। परमपूज्य अंतसमती माता जी का आयोजन में मंगल सानिध्य रहा। कार्यक्रम का संचालन अरुण जैन ने किया। मंचन में आंचल, तनीशा, तन्नु, प्रगति, रजनी प्रवक्ता, पिंकी, रिया, पारुल, ज्योति आदि महिलाओं ने प्रस्तुति दी। सूत्रधार की भूमिका निधि जैन ने की। इस अवसर पर रामकुमार, संजय एलजी, रतनलाल, जुगमंदर, सतीश, राकेश अंबर, जनारधन, जयभगवान, पवन, आरडी जैन, डीके जैन, धनेंद्र, पतेंद्र, मुकेश, अजय प्रवक्ता, अकलंक, डा. आशा, सुधीर मुखिया, कल्पेंद्र, अशोक, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
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