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खादर क्षेत्र में पानी से फसलें हुई बर्बाद
Updated Wed, 29 Aug 2018 01:10 AM IST
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खादर क्षेत्र में पानी से फसलें हुई बर्बाद
पुरकाजी। खादर क्षेत्र में आए पहाड़ों के पानी से खेतों में खड़ी धान व चारे और गन्ने की हजारों बीघा फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। हाल यह है कि दर्जनों गांवों के जंगलों में कई-कई फुट पानी खड़ा है, जिससे खेतों में खड़ी बाकी फसलें भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
उत्तराखंड के पहाड़ों से छोडे़ गए पानी ने खादर क्षेत्र के लोगों का जन जीवन जहां अस्त व्यस्त कर दिया है। वहीं, खेतों में खड़ी फसलों को भी पानी से भारी नुकसान पहुंचा है। हालात यह है कि खादर क्षेत्र के जंगलों में खड़ी धान व चारे की फसलें जहां पूरी तरह बर्बाद हो गयी हैं, वहीं गन्नें की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में अभी भी कई कई फुट पानी खड़ा हुआ है। ऐसे में खेतों में खड़ी बाकी फसलें भी नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। किसान अशोक गुर्जर, केवराज, राजू प्रजापति, बिजेंद्र गुर्जर, सरदार कांता सिंह, सरदार गुरविंद्र सिंह, टहल सिंह, कंवल सिंह, सतनाम सिंह, गुरनाम सिंह, जसविंद्र सिंह, राजेंद्र पांचली, राजेश कुमार आदि ने बताया कि पानी से खादर क्षेत्र की हजारों बीघा फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जो पानी खेतों में खड़ा हुआ है उसके हफ्तों तक सूखने के आसार नहीं हैं। ऐसे में खेतों में खड़ी गन्ने की फसलों को भी भारी नुकसान होने की संभावना बनी हुई है। उनका कहना है कि अगर पानी और आ गया तो रही सही फसलें भी बर्बाद हो जाऐंगी और सैंकडों किसानों के समक्ष परिवार के पालन पोषण की विकराल समस्या आ जाएगी।
कई गांवों में जलभराव
मीरापुर। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के निकट पहुंचने से रामराज थाना क्षेत्र के आठ गांवों के जंगल में जलभराव से फसलों को क्षति पहुंची है। क्षेत्र के किसान आजाद बंसल, सरदार हरवेंद्र सिंह आदि ने बताया कि गंगा का पानी आने से लालपुर, रहडवा, खेडा, बुटराडी, शाहपुर, चुहापुर, फरीदपुर आदि गांवों के जंगल में जलभराव हुआ है। सोमवार की रात से पानी उतर भी रहा है। जंगल में पानी आने से धान, गन्ना व चारे की फसल प्रभावित हुई हैं। उधर, खादर क्षेत्र के गांव अहमदवाला के निकट पुराने बांध के कटान को देखते हुए ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर बांध को मजबूती दी है। गंगा बेराज के जेई पीयुष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के निकट 219.20 मीटर पर चल रहा है। जबकि 220 मीटर पर खतरे की संभावना बन जाती है।
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पुरकाजी। खादर क्षेत्र में आए पहाड़ों के पानी से खेतों में खड़ी धान व चारे और गन्ने की हजारों बीघा फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। हाल यह है कि दर्जनों गांवों के जंगलों में कई-कई फुट पानी खड़ा है, जिससे खेतों में खड़ी बाकी फसलें भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
उत्तराखंड के पहाड़ों से छोडे़ गए पानी ने खादर क्षेत्र के लोगों का जन जीवन जहां अस्त व्यस्त कर दिया है। वहीं, खेतों में खड़ी फसलों को भी पानी से भारी नुकसान पहुंचा है। हालात यह है कि खादर क्षेत्र के जंगलों में खड़ी धान व चारे की फसलें जहां पूरी तरह बर्बाद हो गयी हैं, वहीं गन्नें की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में अभी भी कई कई फुट पानी खड़ा हुआ है। ऐसे में खेतों में खड़ी बाकी फसलें भी नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। किसान अशोक गुर्जर, केवराज, राजू प्रजापति, बिजेंद्र गुर्जर, सरदार कांता सिंह, सरदार गुरविंद्र सिंह, टहल सिंह, कंवल सिंह, सतनाम सिंह, गुरनाम सिंह, जसविंद्र सिंह, राजेंद्र पांचली, राजेश कुमार आदि ने बताया कि पानी से खादर क्षेत्र की हजारों बीघा फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जो पानी खेतों में खड़ा हुआ है उसके हफ्तों तक सूखने के आसार नहीं हैं। ऐसे में खेतों में खड़ी गन्ने की फसलों को भी भारी नुकसान होने की संभावना बनी हुई है। उनका कहना है कि अगर पानी और आ गया तो रही सही फसलें भी बर्बाद हो जाऐंगी और सैंकडों किसानों के समक्ष परिवार के पालन पोषण की विकराल समस्या आ जाएगी।
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कई गांवों में जलभराव
मीरापुर। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के निकट पहुंचने से रामराज थाना क्षेत्र के आठ गांवों के जंगल में जलभराव से फसलों को क्षति पहुंची है। क्षेत्र के किसान आजाद बंसल, सरदार हरवेंद्र सिंह आदि ने बताया कि गंगा का पानी आने से लालपुर, रहडवा, खेडा, बुटराडी, शाहपुर, चुहापुर, फरीदपुर आदि गांवों के जंगल में जलभराव हुआ है। सोमवार की रात से पानी उतर भी रहा है। जंगल में पानी आने से धान, गन्ना व चारे की फसल प्रभावित हुई हैं। उधर, खादर क्षेत्र के गांव अहमदवाला के निकट पुराने बांध के कटान को देखते हुए ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर बांध को मजबूती दी है। गंगा बेराज के जेई पीयुष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के निकट 219.20 मीटर पर चल रहा है। जबकि 220 मीटर पर खतरे की संभावना बन जाती है।
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