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संस्कृत और हिंदी की समृद्धि से सशक्त बनेगा राष्ट्र-स्वामी
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:15 AM IST
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संस्कृत और हिंदी की समृद्धि से सशक्त बनेगा राष्ट्र
मोरना (मुजफ्फरनगर)। भागवतपीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य और शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। जीवन के नैतिक मूल्यों और आदर्शों के मार्ग पर चलें।
शुक्रताल स्थित श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय में आयोजित जनपद स्तरीय वाल्मीकि जंयती प्रतियोगिता के विजेताओं को स्वामी ओमानंद सरस्वती ने पुरस्कृत किया। स्वामी ने कहा कि भारत की गरिमा ऋषि व मुनियों के तप, त्याग और परोपकार से वैभवशाली है। विद्यार्थी शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और जीवन आदर्शो के महत्व को समझे। अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम और सात्विक भाव से भविष्य निखरेगा। ब्रहमचर्य और सदाचरण विद्यार्थी को तेजस्वी बनाता है। संस्कृत भाषाओं की जननी है। प्रतियोगिता में जिले के संस्कृत और इंटर कालेज के प्रतिभाशाली बच्चे शामिल हुए। बाल्मीकि रामायण प्रकृति वर्णनम विषयों पर आधारित प्रतियोगिता में संस्कृत भाषण वर्ग में शुकदेव संस्कृत विद्यालय के समीर कुमार प्रथम, गुरुकुल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के सिद्धार्थ तिवारी द्वितीय तथा खतौली के शिव थानेश्वर संस्कृत विद्यालय के मनीष तृतीय स्थान पर रहे।
अंताक्षरी में आर्दश दूबे ,संदीप, हर्षित ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। गायन प्रतियोगिता में राजीव गोतम, विशाल व विकास ने क्षेष्ठता हासिल की। प्रधानाचार्य ज्ञानदास, प्रेमशंकर मिश्रा, आचार्य कृष्ण गोपाल शर्मा खतौली, कनक प्रभानंद सरस्वती, कृष्ण प्रसाद, आचार्य उतप्रेती, श्याम शास्त्री, आचार्य राणा सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन आचार्य गिरीश चंद्र उतप्रती ने किया।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। भागवतपीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य और शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। जीवन के नैतिक मूल्यों और आदर्शों के मार्ग पर चलें।
शुक्रताल स्थित श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय में आयोजित जनपद स्तरीय वाल्मीकि जंयती प्रतियोगिता के विजेताओं को स्वामी ओमानंद सरस्वती ने पुरस्कृत किया। स्वामी ने कहा कि भारत की गरिमा ऋषि व मुनियों के तप, त्याग और परोपकार से वैभवशाली है। विद्यार्थी शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और जीवन आदर्शो के महत्व को समझे। अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम और सात्विक भाव से भविष्य निखरेगा। ब्रहमचर्य और सदाचरण विद्यार्थी को तेजस्वी बनाता है। संस्कृत भाषाओं की जननी है। प्रतियोगिता में जिले के संस्कृत और इंटर कालेज के प्रतिभाशाली बच्चे शामिल हुए। बाल्मीकि रामायण प्रकृति वर्णनम विषयों पर आधारित प्रतियोगिता में संस्कृत भाषण वर्ग में शुकदेव संस्कृत विद्यालय के समीर कुमार प्रथम, गुरुकुल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के सिद्धार्थ तिवारी द्वितीय तथा खतौली के शिव थानेश्वर संस्कृत विद्यालय के मनीष तृतीय स्थान पर रहे।
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अंताक्षरी में आर्दश दूबे ,संदीप, हर्षित ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। गायन प्रतियोगिता में राजीव गोतम, विशाल व विकास ने क्षेष्ठता हासिल की। प्रधानाचार्य ज्ञानदास, प्रेमशंकर मिश्रा, आचार्य कृष्ण गोपाल शर्मा खतौली, कनक प्रभानंद सरस्वती, कृष्ण प्रसाद, आचार्य उतप्रेती, श्याम शास्त्री, आचार्य राणा सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन आचार्य गिरीश चंद्र उतप्रती ने किया।
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