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फर्जी बाबाओं के पाखंड से बचे समाज: कर्मवीर
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:44 AM IST
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फर्जी बाबाओं के पाखंड से बचे समाज : कर्मवीर
पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। महर्षि पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विद्यापीठ के संस्थापक योगी स्वामी कर्मवीर ने कहा कि अखाड़ा परिषद का 14 फर्जी बाबाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सही है। समाज फर्जी बाबाओं के पाखंड, ढोंग और अंधविश्वास से बचे। वैदिक संस्कृति के संवर्द्धन से ही राष्ट्र के मूल्यों की रक्षा संभव है।
तुगलकपुर कम्हेड़ा स्थित योग विद्या पीठ में आचार्य गुरुदत्त आर्य के नेतृत्व में आर्य समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने योगी स्वामी कर्मवीर का अभिनंदन किया। योगाचार्य ने कहा कि आसाराम और राम-रहीम जैसे बाबाओं के आचरण से धर्म की हानि हुई है। अनैतिक कार्यों में लिप्त बाबाओं के फरेब से समाज और गृहस्थी बचें। अखाड़ा परिषद का फर्जी बाबाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सही है, जिसका आचरण अमर्यादित है, वह संत नहीं है। वैदिक संस्कृति का मार्ग सत्य, न्याय और तार्किक कसौटी पर खरा है। वेदों में प्राणी मात्र के कल्याण की भावना निहित है। महर्षि दयानंद के सिद्धांतों से ही समाज से बुराइयों का उन्मूलन संभव है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य के ज्ञान से अज्ञानता का अंधेरा मिटाएं। सदाचार, देशभक्ति और अनुशासन से ही राष्ट्र की गरिमा बढ़ती है। संस्कृति राष्ट्र की आत्मा होती है। माता-पिता बच्चों को संस्कारों का महत्व बताएं। आनंद पाल सिंह, आरपी शर्मा, योगेश्वर दयाल, मंगत सिंह, ब्रहम सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। महर्षि पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विद्यापीठ के संस्थापक योगी स्वामी कर्मवीर ने कहा कि अखाड़ा परिषद का 14 फर्जी बाबाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सही है। समाज फर्जी बाबाओं के पाखंड, ढोंग और अंधविश्वास से बचे। वैदिक संस्कृति के संवर्द्धन से ही राष्ट्र के मूल्यों की रक्षा संभव है।
तुगलकपुर कम्हेड़ा स्थित योग विद्या पीठ में आचार्य गुरुदत्त आर्य के नेतृत्व में आर्य समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने योगी स्वामी कर्मवीर का अभिनंदन किया। योगाचार्य ने कहा कि आसाराम और राम-रहीम जैसे बाबाओं के आचरण से धर्म की हानि हुई है। अनैतिक कार्यों में लिप्त बाबाओं के फरेब से समाज और गृहस्थी बचें। अखाड़ा परिषद का फर्जी बाबाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सही है, जिसका आचरण अमर्यादित है, वह संत नहीं है। वैदिक संस्कृति का मार्ग सत्य, न्याय और तार्किक कसौटी पर खरा है। वेदों में प्राणी मात्र के कल्याण की भावना निहित है। महर्षि दयानंद के सिद्धांतों से ही समाज से बुराइयों का उन्मूलन संभव है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य के ज्ञान से अज्ञानता का अंधेरा मिटाएं। सदाचार, देशभक्ति और अनुशासन से ही राष्ट्र की गरिमा बढ़ती है। संस्कृति राष्ट्र की आत्मा होती है। माता-पिता बच्चों को संस्कारों का महत्व बताएं। आनंद पाल सिंह, आरपी शर्मा, योगेश्वर दयाल, मंगत सिंह, ब्रहम सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।
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