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डॉ गुप्त ने साहित्यिक जगत को दी ऊर्जा
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:24 AM IST
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मुजफ्फरनगर। डॉ. कृष्णचंद्र गुप्त स्मृति न्यास द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में युवा साहित्यकार रोहित कौशिक को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर आरएम तिवारी ने कहा कि साहित्यकार और प्रेरक व्यक्ति की स्मृति समाज का मार्गदर्शन करती है।
रुड़की रोड स्थित एक प्लाजा में आयोजित समारोह में प्रथम डॉ. कृष्णचंद्र गुप्त सम्मान साहित्यकार कौशिक को दिया गया। प्रो. तिवारी ने कहा कि डॉ. गुप्त ने जिले में साहित्यिक जगत को विशिष्ठ ऊर्जा प्रदान की। साहित्यकार रोहित कौशिक ने कहा कि डा.ॅ गुप्त कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर और कुबेरनाथ रॉय के बड़े प्रशंसक थे। उनकी बातों को भी अपने तर्क की कसौटी पर परखते थे। जात-पात, धर्म, संप्रदाय और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लिखना होगा। डॉ. अमित धर्मसिंह ने कहा कि डॉ. गुप्त बड़े साहित्य सृजक थे। प्रोफेसर जेपी सविता ने उन्हें हिंदी साहित्य और भाषा का मूर्धन्य विद्वान, जुझारू लेखक और बेबाक वक्ता बताया। डॉ. बीएस त्यागी ने कहा कि वे एक आदर्श शिक्षक भी थे। अब्दुल हक सहर ने अपने कलाम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। एनजी मजूमदार ने भी विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. वीके मिश्रा एवं संचालन संयोजक तुषार कांत ने किया।
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रुड़की रोड स्थित एक प्लाजा में आयोजित समारोह में प्रथम डॉ. कृष्णचंद्र गुप्त सम्मान साहित्यकार कौशिक को दिया गया। प्रो. तिवारी ने कहा कि डॉ. गुप्त ने जिले में साहित्यिक जगत को विशिष्ठ ऊर्जा प्रदान की। साहित्यकार रोहित कौशिक ने कहा कि डा.ॅ गुप्त कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर और कुबेरनाथ रॉय के बड़े प्रशंसक थे। उनकी बातों को भी अपने तर्क की कसौटी पर परखते थे। जात-पात, धर्म, संप्रदाय और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लिखना होगा। डॉ. अमित धर्मसिंह ने कहा कि डॉ. गुप्त बड़े साहित्य सृजक थे। प्रोफेसर जेपी सविता ने उन्हें हिंदी साहित्य और भाषा का मूर्धन्य विद्वान, जुझारू लेखक और बेबाक वक्ता बताया। डॉ. बीएस त्यागी ने कहा कि वे एक आदर्श शिक्षक भी थे। अब्दुल हक सहर ने अपने कलाम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। एनजी मजूमदार ने भी विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. वीके मिश्रा एवं संचालन संयोजक तुषार कांत ने किया।
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