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युवाओं को प्रेरणा देता है नेताजी का जीवन
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:41 AM IST
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युवाओं को प्रेरणा देता है नेताजी का जीवन
मुजफ्फरनगर। एमजी पब्लिक स्कूल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 121वीं जयंती मनाई गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल चेयरमैन सतीश चंद्र गोयल ने सुभाष चन्द्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कक्षा आठ की छात्रा आस्था शर्मा ने नेताजी के जीवन और उनके संघर्ष पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। निचकेता, हर्षित, अवि और मयंक आदि छात्र-छात्राओं ने नेताजी के जीवन वृतांत और उनके संघर्ष से जुड़े रोचक तथ्यों की झलकियों को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से मंच पर प्रदर्शित किया। गोयल ने कहा कि उस दौर में प्रशासनिक सेवा आईसीएस को क्वालीफाई किया, तो साक्षात्कार में उनको एक अंगूठी देकर सवाल किया गया कि क्या सुभाष चंद्र इस अंगूठी में से निकल सकता है। कुशाग्र बुद्धि सुभाष चंद्र ने कागज पर अपना नाम लिखा और उसे अंगूठी से निकाल दिया, सभी हतप्रभ रह गये। प्रधानाचार्य जीबी पांडे ने कहा कि आईसीएस परीक्षा के दौरान सुभाष चन्द्र बोस से ब्रिटिश गवर्नमेंट की भारत में पॉलिसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दो शब्दों में उत्तर दिया-‘डिवाइड एंड रूल’। मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले नेताजी ने ब्रिटिश गवर्नमेंट के खिलाफ जर्मनी और पूर्वी एशिया में रहते हुए आजाद हिन्द फौज का गठन किया। उनको 11 बार जेल जाना पड़ा। उनका जीवन युवाओं को प्रेरणा देता है।
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मुजफ्फरनगर। एमजी पब्लिक स्कूल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 121वीं जयंती मनाई गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल चेयरमैन सतीश चंद्र गोयल ने सुभाष चन्द्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कक्षा आठ की छात्रा आस्था शर्मा ने नेताजी के जीवन और उनके संघर्ष पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। निचकेता, हर्षित, अवि और मयंक आदि छात्र-छात्राओं ने नेताजी के जीवन वृतांत और उनके संघर्ष से जुड़े रोचक तथ्यों की झलकियों को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से मंच पर प्रदर्शित किया। गोयल ने कहा कि उस दौर में प्रशासनिक सेवा आईसीएस को क्वालीफाई किया, तो साक्षात्कार में उनको एक अंगूठी देकर सवाल किया गया कि क्या सुभाष चंद्र इस अंगूठी में से निकल सकता है। कुशाग्र बुद्धि सुभाष चंद्र ने कागज पर अपना नाम लिखा और उसे अंगूठी से निकाल दिया, सभी हतप्रभ रह गये। प्रधानाचार्य जीबी पांडे ने कहा कि आईसीएस परीक्षा के दौरान सुभाष चन्द्र बोस से ब्रिटिश गवर्नमेंट की भारत में पॉलिसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दो शब्दों में उत्तर दिया-‘डिवाइड एंड रूल’। मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले नेताजी ने ब्रिटिश गवर्नमेंट के खिलाफ जर्मनी और पूर्वी एशिया में रहते हुए आजाद हिन्द फौज का गठन किया। उनको 11 बार जेल जाना पड़ा। उनका जीवन युवाओं को प्रेरणा देता है।