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विपक्ष ने भाजपा पर बोला हमला
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:58 AM IST
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विपक्ष ने भाजपा पर बोला हमला
मुजफ्फरनगर। सत्ता पक्ष के विधायकों पर प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाते हुए बुधवार को विपक्षी दलों कांग्रेस, रालोद और सपा के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम जीएस प्रियदर्शी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन भी दिया, जिसमें प्रशासनिक कार्यों में भाजपा विधायकों का हस्तक्षेप रोकने की मांग की गई।
बुधवार को कांग्रेस, रालोद और सपा नेताओं ने डीएम जीएस प्रियदर्शी से मुलाकात कर सीएम योगी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में सूबे में सहकारिता समितियों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। ये चुनाव ग्रामीण अंचलों के आधार पर होते हैं, ये चुनाव हमेशा ही दलगत राजनीति से ऊपर उठकर होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक सत्ता के दबाव नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि बुढ़ाना क्षेत्र के विधायक उमेश मलिक एआर कोऑपरेटिव पर गलत तरीके से दबाव बना रहे हैं। उनकी कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने खतौली के विधायक पर जनपद में धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप लगाते हुए कहा कि वो आए दिन विवादित बयान देते हैं। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के वितरण में पारदर्शिता बरतने की व्यवस्था कराने, इन दुकानों के आवंटन में हो रही धांधली को खुद सत्ता पक्ष के लोगों ने उठाया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सत्ता पक्ष के विधायकों पर ये भी आरोप लगाए कि वह जमीनों पर कब्जे, बुढ़ाना और शाहपुर में अवैध कब्जे, जमीनों की डील और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं, जो अत्यंत गंभीर विषय है। प्रतिनिधिमंडल में सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप, रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, कांग्रेस शहराध्यक्ष सतीश गर्ग, तारिक कुरैशी के अलावा पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, प्रमोद त्यागी, पूर्वमंत्री राजकुमार यादव, कृष्णपाल राठी, अनूप प्रमुख, सुधीर भारतीय, विकास कादियान, चंद्रवीर एडवोकेट, अशोक बालियान, अश्वनी राठी आदि शामिल रहे।
अफसरों पर कोई दबाव नहीं: उमेश
बुढ़ाना विधायक एवं सहकारिता प्रभारी उमेश मलिक ने आरोपों के संबंध में सफाई दी कि सहकारिता चुनाव की प्रक्रिया संबंधित अधिकारी अपने विवेक से करा रहे हैं। उन पर किसी का कोई दबाव नहीं है। विपक्षी दलों के लोगों की बौखलाहट से साफ हो रहा है कि सहकारिता के चुनाव में वह अपनी हार स्वीकार कर चुके हैं।
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मुजफ्फरनगर। सत्ता पक्ष के विधायकों पर प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाते हुए बुधवार को विपक्षी दलों कांग्रेस, रालोद और सपा के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम जीएस प्रियदर्शी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन भी दिया, जिसमें प्रशासनिक कार्यों में भाजपा विधायकों का हस्तक्षेप रोकने की मांग की गई।
बुधवार को कांग्रेस, रालोद और सपा नेताओं ने डीएम जीएस प्रियदर्शी से मुलाकात कर सीएम योगी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में सूबे में सहकारिता समितियों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। ये चुनाव ग्रामीण अंचलों के आधार पर होते हैं, ये चुनाव हमेशा ही दलगत राजनीति से ऊपर उठकर होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक सत्ता के दबाव नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि बुढ़ाना क्षेत्र के विधायक उमेश मलिक एआर कोऑपरेटिव पर गलत तरीके से दबाव बना रहे हैं। उनकी कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने खतौली के विधायक पर जनपद में धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप लगाते हुए कहा कि वो आए दिन विवादित बयान देते हैं। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के वितरण में पारदर्शिता बरतने की व्यवस्था कराने, इन दुकानों के आवंटन में हो रही धांधली को खुद सत्ता पक्ष के लोगों ने उठाया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सत्ता पक्ष के विधायकों पर ये भी आरोप लगाए कि वह जमीनों पर कब्जे, बुढ़ाना और शाहपुर में अवैध कब्जे, जमीनों की डील और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं, जो अत्यंत गंभीर विषय है। प्रतिनिधिमंडल में सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप, रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, कांग्रेस शहराध्यक्ष सतीश गर्ग, तारिक कुरैशी के अलावा पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, प्रमोद त्यागी, पूर्वमंत्री राजकुमार यादव, कृष्णपाल राठी, अनूप प्रमुख, सुधीर भारतीय, विकास कादियान, चंद्रवीर एडवोकेट, अशोक बालियान, अश्वनी राठी आदि शामिल रहे।
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अफसरों पर कोई दबाव नहीं: उमेश
बुढ़ाना विधायक एवं सहकारिता प्रभारी उमेश मलिक ने आरोपों के संबंध में सफाई दी कि सहकारिता चुनाव की प्रक्रिया संबंधित अधिकारी अपने विवेक से करा रहे हैं। उन पर किसी का कोई दबाव नहीं है। विपक्षी दलों के लोगों की बौखलाहट से साफ हो रहा है कि सहकारिता के चुनाव में वह अपनी हार स्वीकार कर चुके हैं।
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