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बच्चों की दुआ ने बचा ली जिदंगी
Updated Sun, 20 Aug 2017 02:12 AM IST
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बच्चों की दुआ ने बचा ली जिंदगी
मुजफ्फरनगर। उत्कल एक्सप्रेस भयावह हादसे के बाद नाते-रिश्तेदार अपनों का कुशलक्षेम जानने के लिए खतौली पहुंच गए। दिल्ली निवासी राहुल गोयल शहर के कृष्णापुरी में अपनी ससुराल आ रहा था। जैसे ही दुर्घटना की सूचना पत्नी अंजू और बच्चों को मिली, तो सब बदहवास हो गए। राहुल ने बताया कि ट्रेन में तेजी से ब्रेक लगने के कारण कोई संभल नहीं पाया। हर तरफ चीख पुकार मच गई। भगवान का शुक्र है कि बच गए।
हादसे के साक्षी राहुल गोयल को आभास भी नहीं था कि खतौली स्टेशन से निकलते ही उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हो जाएगी। राहुल ट्रेन में सवार मुजफ्फरनगर में उतरने वाले यात्रियों को कुछ मिनट बाद ही गंतव्य पर पहुंचने का इंतजार था। खतौली से ट्रेन क्रॉस हो रही थी, तभी अचानक ट्रेन में तेज आवाज के साथ ब्रेक लगे और बोगियां हवा में लहरा गई। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। डिब्बों में खून बिखरा था। जैसे ही बोगियां एक-दूसरे पर चढ़कर ठहरी, जिंदा बचे यात्री जहां भी रास्ता मिला कूद गए। मौत के डर से अपनों को भी यात्री संभाल नहीं पाए। बुजुर्गों और बच्चों के चेहरों पर डर तारी था। राहुल उत्कल एक्सप्रेस में दिल्ली से सवार हुआ। उसे मुजफ्फरनगर उतरना था। यहां कृष्णापुरी उसकी ससुराल है। हादसे की सूचना फोन पर दी तो पत्नी अंजू और उसका साला शिवम घबरा गए। शिवम बाइक से खतौली पहुंचा और राहुल को लेकर शहर आया। राहुल ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि बच गए। बच्चों की दुआओं ने मौत के मुंह से वापस खींच लिया। मौत के भंवर से बच कर शहर पहुंचे राधेलाल ने कहा कि कई बोगियां पूरी नष्ट हो गई हैं। पैंट्रीकार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। एक बोगी हवा में लहराकर रेल लाइन के बराबर में बनी बस्ती में घुस गई। ट्रेन की स्पीड तेज थी और कुछ मिनटों के बाद ही हमें उतरना था। हादसे की यात्रियों को कल्पना नहीं थी।
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मुजफ्फरनगर। उत्कल एक्सप्रेस भयावह हादसे के बाद नाते-रिश्तेदार अपनों का कुशलक्षेम जानने के लिए खतौली पहुंच गए। दिल्ली निवासी राहुल गोयल शहर के कृष्णापुरी में अपनी ससुराल आ रहा था। जैसे ही दुर्घटना की सूचना पत्नी अंजू और बच्चों को मिली, तो सब बदहवास हो गए। राहुल ने बताया कि ट्रेन में तेजी से ब्रेक लगने के कारण कोई संभल नहीं पाया। हर तरफ चीख पुकार मच गई। भगवान का शुक्र है कि बच गए।
हादसे के साक्षी राहुल गोयल को आभास भी नहीं था कि खतौली स्टेशन से निकलते ही उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हो जाएगी। राहुल ट्रेन में सवार मुजफ्फरनगर में उतरने वाले यात्रियों को कुछ मिनट बाद ही गंतव्य पर पहुंचने का इंतजार था। खतौली से ट्रेन क्रॉस हो रही थी, तभी अचानक ट्रेन में तेज आवाज के साथ ब्रेक लगे और बोगियां हवा में लहरा गई। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। डिब्बों में खून बिखरा था। जैसे ही बोगियां एक-दूसरे पर चढ़कर ठहरी, जिंदा बचे यात्री जहां भी रास्ता मिला कूद गए। मौत के डर से अपनों को भी यात्री संभाल नहीं पाए। बुजुर्गों और बच्चों के चेहरों पर डर तारी था। राहुल उत्कल एक्सप्रेस में दिल्ली से सवार हुआ। उसे मुजफ्फरनगर उतरना था। यहां कृष्णापुरी उसकी ससुराल है। हादसे की सूचना फोन पर दी तो पत्नी अंजू और उसका साला शिवम घबरा गए। शिवम बाइक से खतौली पहुंचा और राहुल को लेकर शहर आया। राहुल ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि बच गए। बच्चों की दुआओं ने मौत के मुंह से वापस खींच लिया। मौत के भंवर से बच कर शहर पहुंचे राधेलाल ने कहा कि कई बोगियां पूरी नष्ट हो गई हैं। पैंट्रीकार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। एक बोगी हवा में लहराकर रेल लाइन के बराबर में बनी बस्ती में घुस गई। ट्रेन की स्पीड तेज थी और कुछ मिनटों के बाद ही हमें उतरना था। हादसे की यात्रियों को कल्पना नहीं थी।
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