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जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का शिकार है जसौला मार्ग
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बदहाल जसौला मार्ग गड्ढों में तब्दील
खतौली। जसौला मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग पर हर समय धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। राहगीर इस मार्ग पर चलते समय धूल फांकते हैं। वाहन सवार पत्थरों में फिसल कर चोटिल हो रहे हैं। यह मार्ग कई गांवों के संपर्क को जोड़ता है। इसी मार्ग से रेल यात्रा करने वाले लोग रेलवे स्टेशन पर आने जाने के लिए आवागमन करते हैं। इस मार्ग का निर्माण न होने से ग्रामीणों में प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष व्याप्त है।
गांव जसौला मार्ग शेखपुरा, अतरपुरा, शाहपुर, पिपलहेड़ा, सिखेड़ा, फहीमपुर, आदमपुर मोचड़ी, सिकंदरपुर, कढ़ली, चांदसमद आदि गांवों को नगर से जोड़ता है। गन्ना पेराई सत्र के दौरान इस मार्ग पर गन्नों की खाली ट्रॉली तथा बुग्ग्यिां निकलती हैं। इसके अलावा इसी मार्ग पर नए रेलवे स्टेशन का भी निर्माण हुआ। रेलवे स्टेशन तथा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के समय भारी सामान लाने वाले ट्रक तथा जेसीबी ने सडक़ का नामोनिशान भी मिटा दिया था, जिसको लेकर भाकियू ने रेलवे अधिकारियों से वार्ता कर सड़क निर्माण की बात उठाई थी। इस पर रेलवे विभाग ने सड़क निर्माण कराने की बात कही थी, मगर निर्माण नहीं कराया गया।
गांव फहीमपुर निवासी ग्रामीण सतेंद्र चौहान ने बताया कि इस मार्ग पर धूल मिटटी उड़ती रहती है। धूल के गुबार के बीच इस मार्ग से निकलते समय दम सा घुटता है। हल्की वर्षा में मार्ग पर जलभराव हो जाता है। जिस कारण आवागमन ने भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है।
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गांव आदमपुर मोचड़ी निवासी कर्मसिंह का कहना है कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से कई बार सड़क निर्माण की मांग उठाई है। मगर इस ओर उनका कोई ध्यान नहीं है। शुगर मिल, रेलवे विभाग तथा लोकनिर्माण विभाग सड़क निर्माण के लिए एक दूसरे की ओर देखते हैं।
गांव शेखपुरा निवासी इंतजार व गांव जसौला निवासी विनोद का कहना है कि विगत दिनों आरएसएस की ओर से इसी मार्ग से पथ संचलन निकाला गया था। पथ संचलन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। लोक निर्माण विभाग बजट का रोना रोकर इतिश्री कर देते हैं।
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी का कहना है कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग तथा शुगर मिल अधिकारियों से बात कर मार्ग का पुनर्निर्माण कराने की बात की जाएगी। सड़क निर्माण का स्टीमेट बनवा कर लखनऊ भिजवाया जाएगा।
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खतौली। जसौला मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग पर हर समय धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। राहगीर इस मार्ग पर चलते समय धूल फांकते हैं। वाहन सवार पत्थरों में फिसल कर चोटिल हो रहे हैं। यह मार्ग कई गांवों के संपर्क को जोड़ता है। इसी मार्ग से रेल यात्रा करने वाले लोग रेलवे स्टेशन पर आने जाने के लिए आवागमन करते हैं। इस मार्ग का निर्माण न होने से ग्रामीणों में प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष व्याप्त है।
गांव जसौला मार्ग शेखपुरा, अतरपुरा, शाहपुर, पिपलहेड़ा, सिखेड़ा, फहीमपुर, आदमपुर मोचड़ी, सिकंदरपुर, कढ़ली, चांदसमद आदि गांवों को नगर से जोड़ता है। गन्ना पेराई सत्र के दौरान इस मार्ग पर गन्नों की खाली ट्रॉली तथा बुग्ग्यिां निकलती हैं। इसके अलावा इसी मार्ग पर नए रेलवे स्टेशन का भी निर्माण हुआ। रेलवे स्टेशन तथा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के समय भारी सामान लाने वाले ट्रक तथा जेसीबी ने सडक़ का नामोनिशान भी मिटा दिया था, जिसको लेकर भाकियू ने रेलवे अधिकारियों से वार्ता कर सड़क निर्माण की बात उठाई थी। इस पर रेलवे विभाग ने सड़क निर्माण कराने की बात कही थी, मगर निर्माण नहीं कराया गया।
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गांव फहीमपुर निवासी ग्रामीण सतेंद्र चौहान ने बताया कि इस मार्ग पर धूल मिटटी उड़ती रहती है। धूल के गुबार के बीच इस मार्ग से निकलते समय दम सा घुटता है। हल्की वर्षा में मार्ग पर जलभराव हो जाता है। जिस कारण आवागमन ने भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है।
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गांव आदमपुर मोचड़ी निवासी कर्मसिंह का कहना है कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से कई बार सड़क निर्माण की मांग उठाई है। मगर इस ओर उनका कोई ध्यान नहीं है। शुगर मिल, रेलवे विभाग तथा लोकनिर्माण विभाग सड़क निर्माण के लिए एक दूसरे की ओर देखते हैं।
गांव शेखपुरा निवासी इंतजार व गांव जसौला निवासी विनोद का कहना है कि विगत दिनों आरएसएस की ओर से इसी मार्ग से पथ संचलन निकाला गया था। पथ संचलन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। लोक निर्माण विभाग बजट का रोना रोकर इतिश्री कर देते हैं।
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी का कहना है कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग तथा शुगर मिल अधिकारियों से बात कर मार्ग का पुनर्निर्माण कराने की बात की जाएगी। सड़क निर्माण का स्टीमेट बनवा कर लखनऊ भिजवाया जाएगा।